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Sanjay Lake Restoration : संजय झील पुनरुद्धार तेज, अगस्त तक पहला चरण, मई तक दूसरा पूरा

नई दिल्ली: दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) टी.एस. संधू ने गुरुवार को पूर्वी दिल्ली स्थित संजय झील का दौरा कर वहां चल रहे पुनरुद्धार, संरक्षण और सौंदर्यीकरण कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। लगभग 52 एकड़ में फैले जलाशय और उसके आसपास के 165 एकड़ संरक्षित वन क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों का निरीक्षण करते हुए उन्होंने संबंधित विभागों को सभी परियोजनाओं को तय समयसीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए। इस दौरान दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के उपाध्यक्ष सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

जल आपूर्ति बाधित होने पर जताई चिंता

निरीक्षण के दौरान एलजी ने झील में पानी की आपूर्ति बाधित होने पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) को डल्लूपुरा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से उपचारित पानी की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पाइपलाइन मरम्मत कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया।

उन्होंने कहा कि संजय झील का जलस्तर बनाए रखना और इसे एक टिकाऊ ब्लू-ग्रीन एसेट के रूप में विकसित करना दिल्ली के पर्यावरण संरक्षण और जल प्रबंधन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है।

झील की सफाई और तटबंधों को मजबूत करने पर जोर

एलजी ने बताया कि झील में लगातार खरपतवार और शैवाल (एल्गी) हटाने का कार्य किया जा रहा है ताकि जल की गुणवत्ता बेहतर बनी रहे। इसके अलावा मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए आधुनिक जियोटेक्सटाइल तकनीक के माध्यम से तटबंधों को मजबूत किया जा रहा है।

उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि परियोजना के किसी भी हिस्से में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी और सभी कार्य गुणवत्ता के साथ समय पर पूरे किए जाएं।

5,000 देशी पौधे लगाने के निर्देश

पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एलजी ने पूरे क्षेत्र में 5,000 देशी पेड़ लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि वर्ष 1977-78 में इस इलाके में भूमि सुधार के लिए यूकेलिप्टस के पौधे लगाए गए थे।

वर्तमान में यहां नीम, अर्जुन, पापड़ी, अशोक, पिलखन, चांदनी, हिबिस्कस, हमेलिया, कनेर और टेकोमा जैसी कई देशी प्रजातियां मौजूद हैं। इन पौधों की संख्या बढ़ाकर क्षेत्र को और अधिक हरित एवं पर्यावरण अनुकूल बनाया जाएगा।

सभी विभागों के समन्वय पर दिया जोर

एलजी ने कहा कि संजय झील के संरक्षण और विकास के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने परियोजना में कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के सहयोग और स्थानीय रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWA) की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने पर भी बल दिया।

उन्होंने कहा कि संजय झील को उसकी पुरानी पहचान लौटाना उनकी प्राथमिकता है और इसे भविष्य में दिल्लीवासियों के लिए स्वच्छ, हरित, सुरक्षित और जैव विविधता से समृद्ध सार्वजनिक स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।

अगस्त 2026 तक पूरे होंगे पहले चरण के कार्य

पुनरुद्धार परियोजना के पहले चरण को अगस्त 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस चरण में निम्नलिखित प्रमुख कार्य किए जाएंगे—

  • आसपास जमा वर्षा एवं ठहरे हुए पानी को झील तक पहुंचाने के लिए चैनलाइजेशन।
  • जलभराव वाले क्षेत्रों में बायो-स्वेल्स का निर्माण, जिससे भूजल रिचार्ज बढ़ेगा और पैदल मार्ग सुरक्षित रहेंगे।
  • पैदल मार्गों की मरम्मत और नियमित रखरखाव।
  • झील के तल में उगी घास और अवांछित वनस्पतियों को हटाना।

मई 2027 तक दूसरे चरण में होंगे व्यापक सुधार

परियोजना के दूसरे चरण को मई 2027 तक पूरा करने की योजना बनाई गई है। इस चरण में कई दीर्घकालिक और आधुनिक पर्यावरणीय उपाय शामिल होंगे, जिनमें—

  • आसपास के क्षेत्रों से जल प्रवाह को झील तक पहुंचाने की व्यवस्था का विस्तार।
  • अतिरिक्त बायो-स्वेल्स का निर्माण।
  • झील के पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए बायो-रिमेडिएशन तकनीक का उपयोग।
  • जल में घुलित ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाने और झील की सुंदरता बढ़ाने के लिए एरेटर एवं आकर्षक फव्वारों की स्थापना।

पर्यावरण संरक्षण के साथ पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा

विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजना पूरी होने के बाद संजय झील न केवल पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगी, बल्कि पूर्वी दिल्ली के लोगों के लिए बेहतर मनोरंजन, प्रकृति पर्यटन, मॉर्निंग वॉक, बर्ड वॉचिंग और आउटडोर गतिविधियों का प्रमुख स्थल भी बनकर उभरेगी। इससे क्षेत्र की जैव विविधता, जल संरक्षण और शहरी हरित क्षेत्र को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

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