
मास्को/वाशिंगटन:रूस के साइबेरिया प्रांत से आ रही एक बेहद चौंकाने वाली खबर ने पूरी दुनिया, खासकर अमेरिका की चिंता बढ़ा दी है। साइबेरिया के इरकुत्स्क (Irkutsk) स्थित एक अति-सुरक्षित प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करने वाली 28 वर्षीय महिला कर्मचारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। शुरुआती जांच में मौत की वजह गंभीर निमोनिया बताई जा रही है, लेकिन जिस जगह महिला काम करती थी, उसे देखते हुए दुनिया भर में ‘निमोनिक प्लेग’ (Pneumonic Plague) के फैलने का खतरा मंडराने लगा है। इस घटना के बाद रूसी प्रशासन ने आनन-फानन में एहतियात के तौर पर लगभग 200 लोगों को क्वारंटीन (निगरानी में) कर दिया है।
अमेरिका अलर्ट: हर घंटे की रिपोर्ट मांग रहे विदेश मंत्री
इस संवेदनशील मामले पर अमेरिका ने बेहद कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने आइसलैंड में मीडिया से बात करते हुए कहा कि वाशिंगटन इस पूरी स्थिति पर “हर घंटे” नजर रख रहा है। उन्होंने रूस से वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा का हवाला देते हुए पूरी पारदर्शिता बरतने और इस घटना से जुड़ी हर एक जानकारी दुनिया के साथ साझा करने की मांग की है।
रुबियो ने स्पष्ट किया, “हमें इस मामले की पल-पल की डिटेल चाहिए। अगर स्थिति वैसी ही है जैसी बताई जा रही है, तो ठीक है। लेकिन अगर खतरा उससे कहीं अधिक गंभीर निकलता है, तो अमेरिका के पास स्थिति से निपटने और रूस की मदद करने के लिए पर्याप्त उपाय तैयार हैं। हालांकि, किसी भी कदम को उठाने से पहले हमें सटीक और पूरी जानकारी की दरकार है।” इसके साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी मॉस्को के लिए इसे एक बड़ी समस्या बताते हुए रूस को इस संकट से निपटने के लिए हरसंभव मदद की पेशकश की है।
WHO की पैनी नजर, रूस ने कहा- खतरा नियंत्रण में है
मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी पूरी तरह सक्रिय हो गया है। हालांकि, WHO के प्रवक्ता क्रिश्चियन लिंडमायर ने दुनिया को आश्वस्त करते हुए कहा है कि इस संभावित निमोनिक प्लेग के मामले से फिलहाल रूस की सीमाओं के बाहर खतरा बेहद कम है। WHO ने बताया कि मृतका के संपर्क में आए सभी संदिग्धों की पहचान कर ली गई है और उन पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। राहत की बात यह है कि अभी तक किसी भी क्वारंटीन किए गए व्यक्ति में बीमारी के कोई लक्षण नहीं दिखे हैं।
दूसरी ओर, रूस की केंद्रीय स्वास्थ्य निगरानी संस्था ‘रोस्पोट्रेबनादजोर’ ने आधिकारिक बयान जारी कर अफवाहों पर विराम लगाने की कोशिश की है। संस्था के मुताबिक, लैब कर्मचारी के संपर्क में आए किसी भी व्यक्ति में प्लेग की पुष्टि नहीं हुई है। पिछले 10 दिनों में इंस्टीट्यूट के किसी भी अन्य स्टाफ में किसी प्रकार की संक्रामक बीमारी देखने को नहीं मिली है। महिला के शव के विस्तृत परीक्षण (विस्तृत जांच) में भी उसके काम से जुड़े किसी भी खतरनाक माइक्रोऑर्गेनिज्म या वायरस का कोई सबूत नहीं मिला है। रूस का दावा है कि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है और घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।

यदि आप इस मामले से जुड़े किसी खास पहलू के बारे में जानना चाहते हैं, जैसे कि निमोनिक प्लेग के लक्षण क्या हैं या अमेरिका और रूस के बीच चल रही इस बातचीत के भू-राजनीतिक (Geopolitical) मायने क्या हैं, तो मुझे जरूर बताएं।




