
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के चुनावों को लेकर दिए गए बयान ने सियासी माहौल गरमा दिया है। खरगे की ओर से चुनावों को ‘अवैध’ बताए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला है। बीजेपी नेताओं ने सवाल उठाया कि अगर चुनाव ही अवैध हैं तो उन्हीं चुनावों के जरिए संसद में पहुंचे कांग्रेस नेता और खुद मल्लिकार्जुन खरगे किस आधार पर अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियां निभा रहे हैं? बीजेपी ने खरगे के बयान को मतदाताओं के जनादेश का अपमान बताते हुए उनसे माफी मांगने की मांग की है।
किरेन रीजीजू ने खरगे से पूछा तीखा सवाल
केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू ने कांग्रेस अध्यक्ष के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सवाल किया कि क्या खरगे खुद को भी ‘अवैध सांसद’ मानते हैं? बीजेपी का तर्क है कि देश में चुनाव संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होते हैं और चुनाव परिणाम जनता के मत से तय होते हैं। ऐसे में किसी चुनाव को सीधे तौर पर ‘अवैध’ बताना उन करोड़ों मतदाताओं के फैसले पर सवाल खड़ा करता है, जिन्होंने मतदान के जरिए अपना प्रतिनिधि चुना है।
रीजीजू ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्षी दलों को चुनाव में हार या किसी राजनीतिक फैसले से असहमति हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पूरे चुनाव और जनता के जनादेश को ही खारिज कर दिया जाए। बीजेपी का कहना है कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोच्च होता है और राजनीतिक दलों को उसे स्वीकार करना चाहिए।
सुधांशु त्रिवेदी ने भी कांग्रेस को घेरा
बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने भी खरगे के बयान पर कांग्रेस को घेरा। उन्होंने सवाल किया कि अगर कांग्रेस को चुनाव प्रक्रिया पर इतना ही अविश्वास है, तो वह उन्हीं चुनावों के जरिए मिली राजनीतिक जिम्मेदारियों और पदों को स्वीकार क्यों कर रही है?
त्रिवेदी ने इस मुद्दे को लोकतांत्रिक व्यवस्था से जोड़ते हुए कहा कि चुनाव केवल राजनीतिक दलों के बीच मुकाबला नहीं होते, बल्कि यह जनता की भागीदारी का सबसे बड़ा माध्यम हैं। मतदाता मतदान केंद्रों पर जाकर अपने प्रतिनिधि का चुनाव करते हैं। इसलिए चुनावी प्रक्रिया को अवैध बताने वाला बयान सीधे तौर पर मतदाताओं के निर्णय को चुनौती देने जैसा माना जा सकता है।
बीजेपी ने मांगी माफी
बीजेपी नेताओं ने खरगे से अपने बयान पर स्पष्टीकरण देने और माफी मांगने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दल सवाल उठा सकते हैं, लेकिन आरोप लगाते समय संवैधानिक संस्थाओं और मतदाताओं की गरिमा का ध्यान रखा जाना चाहिए।
बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस चुनावी नतीजे अपने पक्ष में नहीं आने पर लगातार चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाती रही है। पार्टी नेताओं के मुताबिक, लोकतंत्र में हार-जीत चुनाव का हिस्सा है और राजनीतिक दलों को जनता के फैसले को स्वीकार करने की परंपरा का पालन करना चाहिए।
चुनाव को लेकर पहले भी आमने-सामने रही है बीजेपी-कांग्रेस
चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच पहले भी कई बार टकराव देखने को मिला है। कांग्रेस की ओर से चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाए जाते रहे हैं, जबकि बीजेपी इन आरोपों को राजनीतिक निराशा से जोड़ती रही है।
खरगे के ताजा बयान ने एक बार फिर दोनों दलों के बीच सियासी बहस को तेज कर दिया है। बीजेपी जहां इसे लोकतंत्र और मतदाताओं के जनादेश का अपमान बता रही है, वहीं कांग्रेस चुनाव प्रक्रिया को लेकर अपने सवालों पर कायम है।

अब देखना होगा कि खरगे बीजेपी के इस हमले पर क्या जवाब देते हैं और क्या कांग्रेस अपने नेता के बयान को लेकर कोई विस्तृत सफाई देती है। फिलहाल इस मुद्दे ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है और आने वाले दिनों में यह विवाद और तेज होने के आसार हैं।




