
Health News: बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान और बढ़ते तनाव के कारण आज बड़ी संख्या में महिलाएं पीएमओएस (PMOS) की समस्या का सामना कर रही हैं। पहले इस बीमारी को पीसीओएस (PCOS) के नाम से जाना जाता था, लेकिन अब विशेषज्ञ इसे पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम (PMOS) कहने लगे हैं। इसकी वजह यह है कि यह केवल हार्मोनल समस्या नहीं रह गई है, बल्कि इसका सीधा संबंध शरीर की मेटाबोलिक हेल्थ से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है।

पीएमओएस की स्थिति में महिलाओं को केवल अनियमित या देर से आने वाले पीरियड्स की समस्या ही नहीं होती, बल्कि वजन तेजी से बढ़ना, चेहरे पर मुंहासे, बालों का झड़ना, शरीर और चेहरे पर जरूरत से ज्यादा मोटे बाल आना, थकान और इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी कई परेशानियों का सामना भी करना पड़ सकता है। ऐसे में सही खानपान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इसके लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
सर्टिफाइड नेशनल डायबिटीज एजुकेटर और न्यूट्रिशनिस्ट दीपशिखा जैन ने अपने इंस्टाग्राम वीडियो में पीएमओएस से जूझ रही महिलाओं के लिए तीन ऐसी महत्वपूर्ण आदतें बताई हैं, जिन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल करके हार्मोनल और मेटाबोलिक हेल्थ को बेहतर बनाया जा सकता है।
1. हर मील में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन शामिल करें
न्यूट्रिशनिस्ट के अनुसार पीएमओएस से पीड़ित महिलाओं को अपनी डाइट में पर्याप्त प्रोटीन शामिल करना चाहिए। हर मुख्य भोजन में 25 से 30 ग्राम प्रोटीन लेने का लक्ष्य रखें। प्रोटीन शरीर में ब्लड शुगर को स्थिर रखने में मदद करता है, जिससे इंसुलिन का संतुलन बेहतर रहता है और हार्मोनल बदलाव भी नियंत्रित होते हैं।
इसके लिए दाल, पनीर, अंडे, दूध, दही, सोया, चना, राजमा, मछली और चिकन जैसे प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों को भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है। वहीं, मीठे पेय पदार्थ, पैकेज्ड फूड, जंक फूड और अत्यधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनाना भी जरूरी है।
2. तनाव कम करें और अच्छी नींद लें
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार तनाव में रहने से शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। कॉर्टिसोल बढ़ने पर शरीर में सूजन (Inflammation) बढ़ सकती है, जिससे हार्मोनल असंतुलन और अधिक गंभीर हो सकता है।
तनाव कम करने के लिए रोजाना 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लें, मेडिटेशन, योग या गहरी सांस लेने जैसी तकनीकों का अभ्यास करें। इसके अलावा, सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल फोन और सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखें ताकि नींद की गुणवत्ता बेहतर हो सके।
3. नियमित एक्सरसाइज और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें
पीएमओएस से पीड़ित महिलाओं के लिए शारीरिक रूप से सक्रिय रहना बेहद जरूरी है। न्यूट्रिशनिस्ट सलाह देती हैं कि सप्ताह में 3 से 4 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें और रोजाना 10 से 12 हजार कदम चलने की आदत डालें। इसके साथ योग, तेज चाल से वॉक या अन्य हल्की-फुल्की एक्सरसाइज भी फायदेमंद साबित हो सकती हैं।
नियमित शारीरिक गतिविधि इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाती है, वजन नियंत्रित रखने में मदद करती है और हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
पीएमओएस में जीवनशैली का बदलाव क्यों है जरूरी?
विशेषज्ञों का मानना है कि पीएमओएस का इलाज केवल दवाओं तक सीमित नहीं है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव नियंत्रण जैसी स्वस्थ आदतें अपनाकर इसके लक्षणों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। हालांकि, हर महिला की शारीरिक स्थिति अलग होती है, इसलिए किसी भी नई डाइट, सप्लीमेंट, फिटनेस प्रोग्राम या उपचार को शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई सलाह किसी चिकित्सीय परामर्श का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या, डाइट या फिटनेस कार्यक्रम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।



