Paan Masala Effects: क्या पान मसाला स्मोकिंग से कम खतरनाक है? डॉक्टर ने बताया मुंह से लेकर फेफड़ों तक कितना बड़ा है खतरा
Paan Masala Side Effects: भारत में पान मसाला और गुटखा खाने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। खासकर युवाओं के बीच इसे एक माउथ फ्रेशनर या स्मोकिंग के सुरक्षित विकल्प के रूप में देखा जाता है। कई लोगों का मानना है कि पान मसाला खाने से धुआं नहीं निकलता, इसलिए यह सिगरेट या बीड़ी की तुलना में कम नुकसानदायक है। लेकिन कैंसर विशेषज्ञों का कहना है कि यह धारणा पूरी तरह गलत है। पान मसाला भी शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है और कई जानलेवा बीमारियों का कारण बन सकता है।
एशियन हॉस्पिटल की एचओडी एवं सीनियर कंसल्टेंट, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, डॉ. रुचि सिंह के अनुसार, तंबाकू चाहे धूम्रपान के जरिए लिया जाए या पान मसाले के रूप में, दोनों ही शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और कैंसर समेत कई गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ाते हैं।
पान मसाला शरीर पर कैसे करता है असर?
डॉ. रुचि सिंह बताती हैं कि स्वास्थ्य को नुकसान केवल धुएं से नहीं होता। तंबाकू युक्त पान मसाले में निकोटीन के साथ कई हानिकारक रसायन मौजूद होते हैं, जो लगातार मुंह, जीभ, मसूड़ों और गले की कोशिकाओं के संपर्क में रहते हैं। लंबे समय तक सेवन करने से इन अंगों में गंभीर बदलाव आने लगते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, नियमित रूप से पान मसाला खाने वाले लोगों में ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस (Oral Submucous Fibrosis) जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। इस स्थिति में मुंह के अंदर के ऊतक धीरे-धीरे सख्त होने लगते हैं, जिससे मुंह खोलने में परेशानी होती है। समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी मुंह के कैंसर का रूप भी ले सकती है।
डॉ. सिंह कहती हैं कि अस्पतालों में ऐसे कई मरीज आते हैं, जिन्हें वर्षों से पान मसाला या गुटखा खाने की आदत होती है। शुरुआत में उन्हें मुंह में जलन, सफेद धब्बे और मुंह कम खुलने जैसी समस्याएं होती हैं, लेकिन इन लक्षणों को नजरअंदाज करने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।
क्या स्मोकिंग ज्यादा खतरनाक है?
विशेषज्ञों का कहना है कि स्मोकिंग और पान मसाला दोनों ही स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं, लेकिन दोनों शरीर के अलग-अलग अंगों को अधिक प्रभावित करते हैं।
स्मोकिंग का सबसे ज्यादा असर फेफड़ों, श्वसन तंत्र और हृदय पर पड़ता है। इससे फेफड़ों का कैंसर, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD), स्ट्रोक और हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है।
वहीं, पान मसाला मुख्य रूप से मुंह, जीभ, गाल, मसूड़ों, गले और पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचाता है। यह ओरल कैंसर और गले के कैंसर के प्रमुख कारणों में से एक माना जाता है। दोनों ही उत्पादों में मौजूद निकोटीन लत पैदा करता है, जिससे इन्हें छोड़ना मुश्किल हो जाता है।
युवाओं में बढ़ रही है पान मसाले की लत
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में युवाओं के बीच पान मसाला और इससे जुड़े उत्पादों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। आकर्षक पैकेजिंग, अलग-अलग फ्लेवर और आसान उपलब्धता इसकी बड़ी वजह मानी जाती है।
कई युवा इसे केवल माउथ फ्रेशनर समझकर खाना शुरू करते हैं और धीरे-धीरे इसकी लत लग जाती है। डॉ. रुचि सिंह का कहना है कि बड़ी संख्या में युवा यह मानते हैं कि पान मसाला स्मोकिंग का सुरक्षित विकल्प है, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। नियमित सेवन लंबे समय में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति में निम्नलिखित लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए—
- मुंह में बार-बार छाले होना।
- मुंह के अंदर सफेद या लाल धब्बे दिखाई देना।
- मुंह कम खुलना या जबड़े में जकड़न महसूस होना।
- निगलने में परेशानी होना।
- मसूड़ों से बार-बार खून आना।
- मुंह या गले में लगातार जलन और दर्द बने रहना।
- आवाज में बदलाव या लंबे समय तक खराश रहना।
डॉक्टर की क्या है सलाह?
डॉ. रुचि सिंह के अनुसार, तंबाकू और पान मसाले से जुड़ी किसी भी आदत से दूरी बनाना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है। जो लोग लंबे समय से इन उत्पादों का सेवन कर रहे हैं, उन्हें नियमित रूप से डेंटल और ओरल हेल्थ चेकअप कराना चाहिए ताकि शुरुआती अवस्था में किसी भी समस्या का पता लगाया जा सके।
उनका कहना है कि लोग अक्सर पान मसाले और स्मोकिंग की तुलना करते हैं कि कौन ज्यादा खतरनाक है, लेकिन चिकित्सा विज्ञान की नजर में दोनों ही स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हैं। एक फेफड़ों और हृदय को नुकसान पहुंचाता है, जबकि दूसरा मुंह और गले के कैंसर का जोखिम बढ़ाता है। इसलिए बेहतर यही है कि किसी भी रूप में तंबाकू से दूरी बनाई जाए।
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