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Russia Missile Aid : उत्तर कोरिया की बैलिस्टिक मिसाइलों से रूस मजबूत, यूक्रेन ने गंभीर सैन्य सहयोग का आरोप लगाया

रूस-यूक्रेन युद्ध में उत्तर कोरिया की बढ़ी भूमिका, रूस को बैलिस्टिक मिसाइलें भेजने का यूक्रेन का दावा

नई दिल्ली: रूस और यूक्रेन के बीच ढाई साल से अधिक समय से जारी युद्ध अब एक नए मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। यूक्रेन ने दावा किया है कि उत्तर कोरिया ने रूस को बड़ी संख्या में आधुनिक बैलिस्टिक मिसाइलें और सैन्य उपकरण उपलब्ध कराए हैं। इतना ही नहीं, यूक्रेनी सैन्य खुफिया एजेंसी (HUR) का आरोप है कि उत्तर कोरिया ने रूस के समर्थन में एक विशेष मिसाइल यूनिट भी तैनात की है। इन दावों के बाद राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह रूस और उत्तर कोरिया के बीच लगातार मजबूत हो रहे सैन्य गठबंधन का स्पष्ट संकेत है।

यूक्रेन का कहना है कि उत्तर कोरिया से मिल रही मदद के कारण रूस की मिसाइल हमले करने की क्षमता और बढ़ गई है, जिससे युद्ध और अधिक खतरनाक होता जा रहा है।

रूस को मिली नई बैलिस्टिक मिसाइलों की खेप

यूक्रेन की सैन्य खुफिया एजेंसी (HUR) के अनुसार, रूस को उत्तर कोरिया से लगभग 120 बैलिस्टिक मिसाइलें मिली हैं। इनमें 40 नई KN-23 और KN-24 मिसाइलें शामिल हैं। इसके अलावा रूस में एक विशेष मिसाइल यूनिट की तैनाती भी की गई है, जिसमें लगभग 90 उत्तर कोरियाई सैन्य कर्मी और 6 मिसाइल लॉन्चर शामिल बताए गए हैं।

यूक्रेनी अधिकारियों का कहना है कि KN-23 और KN-24 मिसाइलें रूस की इस्कंदर मिसाइलों की तुलना में अधिक दूरी तक मार कर सकती हैं और इनमें बड़े वॉरहेड लगाए जा सकते हैं। हालांकि इनकी सटीकता अपेक्षाकृत कम मानी जाती है, जिसके कारण कई हमलों में आम नागरिकों के हताहत होने की आशंका अधिक रहती है।

जेलेंस्की ने लगाया गंभीर आरोप

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने आरोप लगाया कि उत्तर कोरिया केवल हथियार ही नहीं भेज रहा, बल्कि रूस के युद्ध अभियान को सीधे मजबूत करने का काम भी कर रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग लगातार बढ़ रहा है और इससे क्षेत्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है।

जेलेंस्की ने यह भी कहा कि यूक्रेन की वायु रक्षा क्षमता पर दबाव बढ़ रहा है क्योंकि अमेरिका में निर्मित पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्टॉक सीमित होता जा रहा है। ऐसे में रूस के बढ़ते बैलिस्टिक मिसाइल हमलों का मुकाबला करना पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।

पुतिन और किम जोंग उन की रणनीतिक साझेदारी

रूस और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ता सैन्य सहयोग कोई नया घटनाक्रम नहीं है। जून 2024 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्योंगयांग का दौरा किया था, जहां उन्होंने उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी संधि’ पर हस्ताक्षर किए थे।

इस समझौते के तहत यदि किसी एक देश पर बाहरी हमला होता है तो दूसरा देश तत्काल सैन्य और अन्य प्रकार की सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इसी समझौते के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग पहले की तुलना में काफी तेज़ी से बढ़ा है।

दक्षिण कोरिया ने पहले भी जताई थी चिंता

दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने वर्ष 2024 में दावा किया था कि उत्तर कोरिया रूस को गोला-बारूद से भरे लगभग 6,700 कंटेनर भेज चुका है। इनमें करीब 30 लाख से अधिक 152 मिमी आर्टिलरी शेल और लगभग 5 लाख 122 मिमी राउंड या उनका मिश्रण शामिल था।

इसके बाद अप्रैल 2025 में जारी एक रिपोर्ट में कहा गया कि सितंबर 2023 से मार्च 2025 के बीच चार रूसी मालवाहक जहाजों ने उत्तर कोरिया और रूस के बीच 64 यात्राएं कीं, जिनके जरिए अनुमानित 40 लाख से 60 लाख आर्टिलरी शेल रूस पहुंचाए गए।

उत्तर कोरियाई सैनिकों की तैनाती भी स्वीकार

अप्रैल 2025 में उत्तर कोरिया ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उसने रूस के साथ हुए रणनीतिक समझौते के तहत अपने सैनिकों को रूसी सेना के साथ लड़ने के लिए भेजा है। सरकारी मीडिया के अनुसार, किम जोंग उन ने स्वयं इस तैनाती को मंजूरी दी थी और उत्तर कोरियाई सैनिकों ने रूस के कुर्स्क क्षेत्र में अभियानों में हिस्सा लिया।

रूस ने भी बाद में सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उत्तर कोरियाई सैनिक युद्ध अभियानों में शामिल रहे हैं। इससे दोनों देशों के बीच सैन्य साझेदारी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं और बढ़ गई हैं।

युद्ध पर क्या पड़ सकता है असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रूस को उत्तर कोरिया से लगातार बैलिस्टिक मिसाइलें, गोला-बारूद और सैन्य सहायता मिलती रही तो यूक्रेन पर मिसाइल हमलों की तीव्रता और बढ़ सकती है। दूसरी ओर, यूक्रेन अपने पश्चिमी सहयोगियों, विशेषकर अमेरिका और यूरोपीय देशों से अतिरिक्त वायु रक्षा प्रणाली और इंटरसेप्टर मिसाइलों की मांग तेज़ कर सकता है।

रूस-यूक्रेन युद्ध पहले ही वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर चुका है। ऐसे में उत्तर कोरिया की बढ़ती भूमिका इस संघर्ष को और अधिक जटिल तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवेदनशील बना सकती है।

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