नेपाल में कवरेज करने गए भारतीय पत्रकारों के साथ कथित बदसलूकी का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। जनतंत्र TV की टीम ने आरोप लगाया है कि नेपाल पुलिस और कुछ स्थानीय पत्रकारों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और करीब दो घंटे तक उन्हें रोककर पूछताछ की गई। इस घटना के बाद मीडिया जगत और पत्रकार संगठनों में नाराजगी बढ़ गई है।
भारत-नेपाल सीमा से जुड़े क्षेत्र में कवरेज करने गई जनतंत्र TV की टीम के साथ नेपाल में कथित दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार भारतीय पत्रकारों को नेपाल में रिपोर्टिंग के दौरान करीब दो घंटे तक रोके रखा गया। इस दौरान उनसे लगातार पूछताछ की गई और कवरेज करने से भी रोका गया।
टीम का आरोप है कि नेपाल पुलिस के अलावा मौके पर मौजूद कुछ नेपाली पत्रकारों ने भी उनके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और तीखी बहस की। घटना के दौरान माहौल तनावपूर्ण बना रहा, जिससे भारतीय पत्रकारों में असुरक्षा की भावना पैदा हो गई।
बताया जा रहा है कि इस टीम में लखनऊ के पत्रकार नंदन श्रीवास्तव, उनके कैमरामैन और बहराइच जनपद के संवाददाता रिजवान खान भी शामिल थे। पत्रकारों का आरोप है कि उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया, जो प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
घटना के बाद इस मामले ने प्रशासनिक और पत्रकार संगठनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। बहराइच जिला अधिकारी से जब इस मामले को लेकर बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि नेपाल के जिलाधिकारी और एसएसपी से इस पूरे प्रकरण को लेकर वार्ता की जाएगी। उन्होंने माना कि सीमा क्षेत्र में पत्रकारों के साथ इस प्रकार का व्यवहार गंभीर विषय है और संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
इधर, ऑल इंडिया पत्रकार संगठन ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए बहराइच जिला अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। संगठन ने मांग की है कि नेपाल में भारतीय पत्रकारों के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।
पत्रकार संगठनों का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मीडिया की स्वतंत्रता बेहद महत्वपूर्ण है और पत्रकारों के साथ इस प्रकार की घटनाएं प्रेस की आजादी पर सवाल खड़े करती हैं। संगठन ने यह भी कहा कि सीमा पार रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दोनों देशों के प्रशासन को मिलकर स्पष्ट व्यवस्था बनानी चाहिए।
घटना के बाद मीडिया जगत में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी पत्रकारों के समर्थन में प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई पत्रकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में उचित कार्रवाई नहीं हुई तो व्यापक स्तर पर विरोध दर्ज कराया जाएगा।
फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर मामले को लेकर बातचीत की तैयारी की जा रही है और सभी की नजर अब दोनों देशों के अधिकारियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
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