
जनपद लखीमपुर खीरी में परिवहन विभाग की लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां ओवरलोड गन्ने से भरा एक ट्रक स्कूली बच्चों से भरी वैन पर पलट गया। यह हादसा मोहम्मदी–पुवायां रोड पर उस समय हुआ, जब स्कूल वैन बच्चों को लेकर जा रही थी। वैन में करीब 19 स्कूली बच्चे सवार थे, जिससे घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गन्ने से भरा ट्रक क्षमता से कहीं अधिक लदा हुआ था। संतुलन बिगड़ने के कारण ट्रक अचानक सड़क किनारे चल रही स्कूली वैन पर पलट गया। ट्रक के पलटते ही वैन पूरी तरह गन्नों के नीचे दब गई और अंदर बैठे बच्चों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग तुरंत मौके पर दौड़ पड़े।
हादसे की सूचना मिलते ही सैकड़ों ग्रामीण, राहगीर और स्थानीय लोग बिना किसी सरकारी मदद का इंतजार किए तुरंत रेस्क्यू कार्य में जुट गए। लोगों ने हाथों से गन्ने हटाए, कुछ ने जेसीबी और ट्रैक्टर की मदद मंगवाई, तो कुछ ने वैन के शीशे तोड़कर बच्चों को बाहर निकालना शुरू किया। स्थानीय लोगों की तत्परता और साहस के चलते एक-एक कर सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
गनीमत यह रही कि इस भयावह हादसे में किसी भी बच्चे की जान नहीं गई, हालांकि कुछ बच्चों को हल्की चोटें आईं, जिन्हें प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। घटना के बाद बच्चों के परिजनों में दहशत का माहौल रहा, वहीं मौके पर पहुंचे अभिभावकों ने प्रशासन और परिवहन विभाग की लापरवाही पर नाराजगी जताई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मोहम्मदी–पुवायां रोड पर अक्सर ओवरलोड गन्ना लदे ट्रक बेखौफ होकर चलते हैं। परिवहन विभाग और संबंधित अधिकारियों की ओर से न तो नियमित जांच होती है और न ही ओवरलोड वाहनों पर सख्त कार्रवाई की जाती है। इसी लापरवाही का नतीजा आज एक बड़े हादसे के रूप में सामने आया, जिसमें मासूम बच्चों की जान खतरे में पड़ गई।
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। लोगों ने मांग की है कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले को गंभीरता से संज्ञान में ले और ओवरलोड वाहनों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
इस हादसे ने एक बार फिर परिवहन व्यवस्था और सड़क सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यदि समय रहते स्थानीय लोग रेस्क्यू में न जुटते, तो यह घटना एक बड़े हादसे में तब्दील हो सकती थी। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और परिवहन विभाग इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेता है और आगे क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।




