Corruption Case : केजीएमयू में कैंसर दवाओं का करोड़ों का घोटाला, चार पर कार्रवाई

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में कथित तौर पर करोड़ों रुपये के दवा घोटाले का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने बड़ा एक्शन लिया है। यूरोलॉजी विभाग में कैंसर की महंगी दवाओं की खरीद और खपत से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों ने चिकित्सा जगत में हड़कंप मचा दिया है। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि मृत मरीजों और किडनी रोगियों के नाम पर कैंसर की दवाओं की फर्जी बिलिंग कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए KGMU प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तीन संविदाकर्मियों को बर्खास्त कर दिया है, जबकि एक स्थायी कर्मचारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने और निलंबन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही घोटाले से हुई वित्तीय क्षति की भरपाई के लिए संबंधित एजेंसी से रकम वसूलने की भी तैयारी की जा रही है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया बड़ा फर्जीवाड़ा

KGMU प्रशासन द्वारा गठित जांच समिति की अंतरिम रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच में पाया गया कि असाध्य योजना के तहत कैंसर मरीजों के लिए खरीदी गई महंगी दवाओं की खपत रिकॉर्ड में गंभीर अनियमितताएं हैं।

आरोप है कि कई ऐसे मरीजों के नाम पर दवाएं जारी दिखाई गईं जिनकी पहले ही मृत्यु हो चुकी थी। इतना ही नहीं, कुछ मामलों में किडनी रोगियों को रिकॉर्ड में कैंसर मरीज दर्शाकर उनके नाम पर भी दवाओं की बिलिंग की गई। इस तरह सरकारी योजनाओं के तहत उपलब्ध कराई जाने वाली महंगी दवाओं का गलत तरीके से उपयोग दिखाकर वित्तीय लाभ उठाने का प्रयास किया गया।

प्रारंभिक जांच के अनुसार अब तक करीब 40 मरीजों से जुड़े मामलों में अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। प्रशासन को आशंका है कि जांच का दायरा बढ़ने पर यह संख्या और भी अधिक हो सकती है।

दो करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले की आशंका

अंतरिम जांच रिपोर्ट के आधार पर अब तक दो करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितता होने की आशंका जताई गई है। हालांकि अधिकारियों का मानना है कि विस्तृत जांच पूरी होने के बाद घोटाले की वास्तविक राशि इससे कहीं अधिक भी हो सकती है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए KGMU प्रशासन ने यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष को भी उनके पद से हटा दिया है। प्रशासन का कहना है कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका तय करने के लिए यह कदम उठाया गया है।

मृत मरीजों के नाम पर बनते रहे बिल

जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि जिन मरीजों की मृत्यु दिसंबर माह में हो चुकी थी, उनके नाम पर जनवरी, फरवरी, मार्च और अप्रैल तक दवाओं की खपत दर्ज की जाती रही।

सूत्रों के मुताबिक, रिकॉर्ड में ऐसे मरीजों के नाम पर लगातार दवाएं जारी दिखाई गईं, जबकि वे जीवित ही नहीं थे। इससे यह आशंका मजबूत हो गई है कि अस्पताल के रिकॉर्ड का दुरुपयोग कर फर्जी तरीके से दवाओं की निकासी और बिलिंग की जा रही थी।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी चिकित्सा संस्थान में मृत मरीजों के नाम पर दवाओं की खपत दिखाया जाना न केवल वित्तीय अनियमितता है, बल्कि यह स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

चार कर्मचारियों पर गिरी गाज

मामले में प्राथमिक जिम्मेदारी तय करते हुए KGMU प्रशासन ने चार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। इनमें तीन संविदाकर्मी और एक स्थायी कर्मचारी शामिल हैं।

कार्रवाई की जद में आए कर्मचारियों में:

  • प्रकाश सिंह (यूरोलॉजी विभाग, संविदाकर्मी)
  • हेमंत श्रीवास्तव (एलपी काउंटर IPD, संविदाकर्मी)
  • सचिन तिवारी (यूरोलॉजी विभाग, संविदाकर्मी)
  • अरशद वसी (चीफ फार्मासिस्ट, एलपी काउंटर IPD, स्थायी कर्मचारी)

शामिल हैं।

तीनों संविदाकर्मियों को तत्काल प्रभाव से सेवा से हटा दिया गया है। वहीं चीफ फार्मासिस्ट अरशद वसी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ मुकदमा दर्ज कराने और निलंबन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

एजेंसी से होगी नुकसान की भरपाई

KGMU प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन संविदाकर्मियों के माध्यम से यह अनियमितताएं सामने आई हैं, उन्हें उपलब्ध कराने वाली एजेंसी की भूमिका की भी जांच की जाएगी।

प्रशासन का कहना है कि यदि जांच में एजेंसी की जिम्मेदारी तय होती है तो उससे वित्तीय नुकसान की भरपाई कराई जाएगी। इसके लिए कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

अधिकारियों का मानना है कि सरकारी धन के दुरुपयोग के मामलों में केवल दोषियों पर कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि हुए नुकसान की वसूली भी जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

पुलिस जांच की भी तैयारी

KGMU प्रशासन ने पूरे मामले की विस्तृत जांच और प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने के लिए पुलिस को औपचारिक पत्र भेज दिया है। पुलिस जांच शुरू होने के बाद मामले से जुड़े दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन और दवा वितरण रिकॉर्ड की गहन जांच की जाएगी।

संभावना जताई जा रही है कि पुलिस जांच में कई अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। यदि ऐसा होता है तो कार्रवाई का दायरा और व्यापक हो सकता है।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब सरकारी अस्पतालों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर लगातार जोर दिया जा रहा है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के मरीजों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली महंगी दवाओं में कथित घोटाले ने स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पतालों में डिजिटल रिकॉर्ड, दवा वितरण प्रणाली और मरीज सत्यापन प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में इस प्रकार की वित्तीय अनियमितताओं को रोका जा सके।

जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर

फिलहाल KGMU प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों द्वारा मामले की जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि यह केवल प्रारंभिक कार्रवाई है और जांच पूरी होने के बाद घोटाले की वास्तविक राशि, इसमें शामिल लोगों की संख्या तथा पूरे नेटवर्क की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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