
हमीरपुर में हाईवे जाम बना काल, एंबुलेंस फंसी, गर्भ में ही शिशु की मौत
एनएच-34 पर 25 किलोमीटर लंबा जाम, 5 घंटे तक तड़पती रही गर्भवती महिला
हमीरपुर जनपद से मानवता को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही ने एक अजन्मे बच्चे की जान ले ली। नेशनल हाईवे-34 पर लगे भीषण जाम के कारण एक गर्भवती महिला समय पर अस्पताल नहीं पहुंच सकी और इलाज में हुई देरी की वजह से गर्भ में ही शिशु की मौत हो गई। यह घटना न सिर्फ ट्रैफिक व्यवस्था की पोल खोलती है, बल्कि आपातकालीन सेवाओं की तैयारियों पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
मामला हमीरपुर जनपद के मौदहा क्षेत्र का है, जहां पाटनपुर गांव निवासी एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने पर मौदहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था। प्राथमिक जांच के बाद हालत गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने महिला को जिला अस्पताल हमीरपुर के लिए रेफर कर दिया।
महिला को एंबुलेंस के जरिए जिला अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन नेशनल हाईवे-34 पर लगे भीषण जाम ने एंबुलेंस की रफ्तार थाम दी। करीब 25 किलोमीटर लंबे जाम में एंबुलेंस लगभग पांच घंटे तक फंसी रही। इस दौरान प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला तड़पती रही, लेकिन समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाई।
इलाज में हुई देरी का खामियाजा महिला को इस कदर भुगतना पड़ा कि जन्म से पहले ही उसके गर्भ में पल रहे शिशु की मौत हो गई। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने शिशु को मृत घोषित कर दिया।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस मार्ग पर करीब 26 घंटे तक जाम की स्थिति बनी रही, जिसमें भारी वाहनों से लेकर छोटे वाहन तक रेंगते नजर आए। जाम की वजह से न केवल आम लोग बल्कि एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित रहीं।
घटना के बाद परिजनों में कोहराम मचा हुआ है और लोगों में भारी आक्रोश है। सवाल उठ रहे हैं कि अगर हाईवे पर समय रहते ट्रैफिक व्यवस्था दुरुस्त की गई होती और एंबुलेंस के लिए रास्ता बनाया गया होता, तो शायद एक मासूम की जान बचाई जा सकती थी।
फिलहाल प्रशासन की ओर से मामले की जांच की बात कही जा रही है, लेकिन यह हादसा एक बार फिर साबित करता है कि जाम सिर्फ परेशानी नहीं, बल्कि जानलेवा भी हो सकता है।




