प्रधानमंत्री के महत्वाकांक्षी अभियान “जल बचाओ, जीवन बचाओ” को जहां देशभर में जन-जन तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है, वहीं दिबियापुर नगर पंचायत में इस अभियान की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यहां नगर पंचायत की लापरवाही के चलते बीते पखवाड़े भर से लगातार पानी का लीकेज हो रहा है, लेकिन सूचना देने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी आंख मूंदे बैठे हैं।
यह पूरा मामला दिबियापुर नगर पंचायत क्षेत्र का है, जहां नगर पंचायत की पाइपलाइन से लगातार पानी का रिसाव हो रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह और शाम के समय हजारों लीटर साफ पानी यूं ही सड़कों पर बह जाता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पानी लीकेज की जानकारी नगर पंचायत को कई बार दी गई, लेकिन एक पखवाड़ा बीत जाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं किया गया। इससे साफ जाहिर होता है कि नगर पंचायत के अधिकारी और कर्मचारियों को पानी की बर्बादी की कोई चिंता नहीं है।
जहां एक ओर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर दिबियापुर नगर पंचायत में रोजाना हजारों लीटर पानी बेवजह बर्बाद किया जा रहा है। यह स्थिति सीधे तौर पर सरकारी योजनाओं और अभियानों की अनदेखी को दर्शाती है।
सबसे हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर लापरवाही पर नगर पंचायत के अधिकारी और कर्मचारी खुद को पूरी तरह अनजान बता रहे हैं। जिम्मेदारी तय करने के बजाय सभी अधिकारी एक-दूसरे पर पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का सवाल है कि आखिर इस पानी की बर्बादी का जिम्मेदार कौन है? क्या नगर पंचायत के अधिकारी और कर्मचारी अपने दायित्वों से बच सकते हैं? लोगों का कहना है कि अगर समय रहते लीकेज ठीक कर दिया जाता, तो अब तक लाखों लीटर पानी बचाया जा सकता था।
नगर पंचायत के अधिकारियों से जब इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने मामले की जानकारी न होने की बात कहते हुए लिखित सूचना या शिकायत का हवाला मांगा। जबकि स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मौखिक और लिखित दोनों रूपों में सूचना पहले ही दी जा चुकी है।
एक तरफ सरकार जल संरक्षण को लेकर करोड़ों रुपये खर्च कर अभियान चला रही है, वहीं दूसरी ओर दिबियापुर नगर पंचायत की यह लापरवाही पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर रही है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में कब तक कार्रवाई करते हैं और पानी की इस बर्बादी पर कब रोक लगती है।




