
ई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद पूर्व मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने आई है। संसद भवन के गलियारे में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश से हुई मुलाकात के दौरान धर्मेंद्र प्रधान ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा, “I am a street fighter, not an AC room activist.” उनका यह बयान अब सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

संसद के कॉरिडोर में जयराम रमेश से मुलाकात
सोमवार को संसद भवन पहुंचने पर धर्मेंद्र प्रधान की मुलाकात कांग्रेस सांसद जयराम रमेश से हुई। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने पुराने राजनीतिक दिनों को याद किया। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि एक समय जयराम रमेश ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की शासन शैली की सार्वजनिक रूप से सराहना की थी। उस वक्त वे उनसे मिलने के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के कार्यालय तक पहुंच गए थे।
प्रधान ने आगे बताया कि बाद में जब जयराम रमेश केंद्रीय वाणिज्य मंत्री बने और वे स्वयं सांसद बने, तब उन्होंने अपने क्षेत्र की मिर्च उत्पादक किसानों की समस्याओं को लेकर जयराम रमेश से मुलाकात की थी।
‘इट हैपन्स’ पर दिया जवाब
बातचीत के दौरान जयराम रमेश ने मुस्कुराते हुए कहा, “It happens.” इसके जवाब में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा,
“Nothing happens. I am a street fighter, not an AC room activist.”
प्रधान का यह बयान उनके राजनीतिक संघर्ष और जमीनी कार्यकर्ता की छवि को सामने रखने वाला माना जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी उनके इस बयान की काफी चर्चा हो रही है।
संसद पहुंचने पर NDA सांसदों ने किया स्वागत
शिक्षा मंत्री पद छोड़ने के बाद सोमवार को जब धर्मेंद्र प्रधान पहली बार संसद पहुंचे तो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के कई सांसदों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान उनके चेहरे पर मुस्कान दिखाई दी। एक सांसद ने टिप्पणी करते हुए कहा,
“यह शायद पहली बार है कि किसी केंद्रीय मंत्री ने बिना किसी व्यक्तिगत आरोप या भ्रष्टाचार के आरोप के इस्तीफा दिया है।”
हालांकि सरकार की ओर से अभी तक इस्तीफे को लेकर विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
सरकार लाई नया एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक
इसी बीच सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक पर रोक लगाने के लिए सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 लोकसभा में पेश किया है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन में यह विधेयक प्रस्तुत किया।
सरकार का कहना है कि 2024 में बने कानून को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए इसमें कई महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं ताकि संगठित पेपर लीक गिरोहों पर सख्त कार्रवाई हो सके।
2024 के कानून और 2026 के संशोधन में क्या बदला?
नए संशोधन के तहत पहली बार अलग-अलग श्रेणियों के दोषियों के लिए अलग-अलग दंड का प्रावधान किया गया है।
- यदि कोई व्यक्ति अकेले पेपर लीक में शामिल पाया जाता है तो उसके लिए अलग कानूनी प्रावधान लागू होंगे।
- यदि कोई संगठित गिरोह का सदस्य है तो उसके खिलाफ कहीं अधिक कठोर कार्रवाई की जाएगी।
- बायोमैट्रिक सत्यापन, प्रश्नपत्रों के परिवहन और परीक्षा संचालन से जुड़ी निजी एजेंसियों को भी सीधे कानून के दायरे में लाया गया है।
- यदि किसी सर्विस प्रोवाइडर कंपनी का निदेशक, वरिष्ठ प्रबंधक या अन्य जिम्मेदार अधिकारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई होगी।
सजा और जुर्माना दोनों बढ़ाए गए
2024 के कानून में संबंधित एजेंसियों के दोषी अधिकारियों के लिए अधिकतम 5 वर्ष की सजा और 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान था।
अब 2026 के संशोधन विधेयक में इसे बढ़ाकर:
- 10 वर्ष तक की सजा
- 5 करोड़ रुपये तक का जुर्माना
कर दिया गया है। सरकार का दावा है कि इससे परीक्षा माफिया और संगठित गिरोहों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
विपक्ष और सरकार के बीच बढ़ सकती है राजनीतिक बहस
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, उनके बयान और उसी दिन सरकार द्वारा नया एंटी पेपर लीक संशोधन विधेयक पेश किए जाने से संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। एक ओर विपक्ष सरकार को शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली को लेकर घेरने की कोशिश करेगा, वहीं सरकार नए कानून के जरिए यह संदेश देने का प्रयास कर रही है कि परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ अब पहले से कहीं अधिक कठोर कार्रवाई की जाएगी।




