कन्नौज जनपद के छिबरामऊ क्षेत्र में लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती को लेकर किसानों का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा। भारतीय किसान यूनियन (किसान) के बैनर तले सैकड़ों किसान मंगलवार को छिबरामऊ बिजलीघर पहुंच गए और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। किसानों ने बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि ग्रामीण क्षेत्रों में घंटों बिजली गायब रहती है, जिससे खेती पूरी तरह प्रभावित हो रही है।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे भाकियू (किसान) के जिलाध्यक्ष राजा शुक्ला ने कहा कि इस समय मक्का और मूंगफली की फसल को सिंचाई की बेहद जरूरत है, लेकिन लगातार बिजली कटौती के कारण किसान खेतों की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई गांवों में रातभर बिजली नहीं आती और दिन में भी बार-बार आपूर्ति बाधित रहती है। किसानों का आरोप था कि शिकायत करने पर अधिकारी फोन तक नहीं उठाते, जिससे उनकी परेशानियां और बढ़ रही हैं।
किसानों का कहना था कि उमस भरी गर्मी और भीषण तापमान के बीच बिजली संकट ने ग्रामीण जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। खेतों में लगे ट्यूबवेल बंद पड़े हैं, पशुपालक परेशान हैं और छोटे कारोबारी भी प्रभावित हो रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा।
करीब कई घंटों तक बिजलीघर परिसर में हंगामा चलता रहा। किसानों ने अधिकारियों से वार्ता की मांग की, लेकिन जब काफी देर तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो प्रदर्शन उग्र हो गया। गुस्साए किसानों ने अधिशासी अभियंता (एक्सियन) कार्यालय की बिजली आपूर्ति ही बंद कर दी। कार्यालय की बत्ती गुल होते ही वहां मौजूद अधिकारी और कर्मचारी गर्मी व उमस से परेशान होकर बाहर निकल आए।
स्थिति बिगड़ती देख बिजली विभाग के अधिकारियों ने किसानों से बातचीत शुरू की। अधिशासी अभियंता ने तत्काल सौरिख और सिकंदरपुर क्षेत्र के एसडीओ को बिजली आपूर्ति बहाल करने के निर्देश दिए। अधिकारियों के आश्वासन के बाद कई इलाकों में बिजली सप्लाई शुरू कराई गई, तब जाकर किसानों का गुस्सा कुछ शांत हुआ।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने साफ कहा कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की गई तो आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। किसानों ने ऊर्जा राज्यमंत्री के घेराव की चेतावनी देते हुए कहा कि फसलों को बचाने के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति जरूरी है।
भाकियू नेताओं ने कहा कि सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर किसान बिजली संकट से जूझ रहे हैं। उन्होंने मांग की कि ग्रामीण फीडरों पर पर्याप्त बिजली दी जाए और शिकायतों के समाधान के लिए अधिकारियों को जवाबदेह बनाया जाए।
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