
बलरामपुर, हरैया सतघरवा।
जनपद बलरामपुर के हरैया सतघरवा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत इटवा के मजरे टिटिहिरिया गांव में रविवार दोपहर एक दर्दनाक अग्निकांड की घटना सामने आई, जिसने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। अचानक लगी भीषण आग ने कुछ ही पलों में एक गरीब परिवार की झोपड़ी को अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में पांच बकरियों की जलकर मौके पर ही मौत हो गई, जबकि परिवार की पूरी गृहस्थी जलकर राख हो गई। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और पीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
अचानक लगी आग, मचा हड़कंप
प्राप्त जानकारी के अनुसार, टिटिहिरिया गांव निवासी शहिजाद की झोपड़ी में रविवार दोपहर करीब अचानक आग लग गई। आग लगने के कारणों का अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल पाया है, लेकिन स्थानीय लोगों का अनुमान है कि यह आग शॉर्ट सर्किट, चूल्हे की चिंगारी या किसी अन्य अज्ञात कारण से लगी हो सकती है।
घटना के समय झोपड़ी के आसपास सामान्य गतिविधियां चल रही थीं। अचानक धुआं उठता देख ग्रामीणों ने शोर मचाया और मौके पर दौड़ पड़े। लेकिन जब तक लोग कुछ समझ पाते, आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और पूरी झोपड़ी को अपनी लपटों में घेर लिया।

ग्रामीणों ने बुझाने की कोशिश की, लेकिन नहीं मिली सफलता
आग की भयावहता को देखते हुए गांव के लोग तुरंत बाल्टियों, टंकियों और हैंडपंप के सहारे आग बुझाने में जुट गए। हालांकि, आग इतनी तेजी से फैल रही थी कि ग्रामीणों के प्रयास नाकाफी साबित हुए। तेज लपटों और धुएं के कारण कोई भी झोपड़ी के अंदर जाकर सामान निकालने की स्थिति में नहीं था।
कुछ ही देर में पूरी झोपड़ी धू-धू कर जलने लगी और देखते ही देखते सब कुछ राख में तब्दील हो गया। इस दौरान झोपड़ी में बंधी पांच बकरियां आग की चपेट में आ गईं और उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
पीड़ित परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
इस हादसे ने शहिजाद और उनके परिवार को पूरी तरह से झकझोर दिया है। बकरियां उनके लिए सिर्फ पशु नहीं थीं, बल्कि आजीविका का मुख्य साधन थीं। बकरियों की मौत और घर के सामान के जलने से परिवार के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
परिवार के सदस्यों का कहना है कि उनकी सारी जमा-पूंजी और जरूरी सामान इसी झोपड़ी में रखा था, जो अब पूरी तरह नष्ट हो चुका है। कपड़े, अनाज, बर्तन और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुएं सब कुछ आग में जलकर खत्म हो गया।
पीड़ित परिवार की महिलाओं और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के लोग भी इस घटना से बेहद दुखी हैं और परिवार को ढांढस बंधाने में लगे हुए हैं।
प्रशासन ने लिया संज्ञान
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन हरकत में आ गया। मौके पर हल्का लेखपाल विनीत कुमार वर्मा पहुंचे और उन्होंने नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने पीड़ित परिवार से बातचीत कर पूरी घटना की जानकारी जुटाई और नुकसान का आकलन करते हुए रिपोर्ट तैयार की।
लेखपाल द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को भेज दी गई है, ताकि पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
पशुचिकित्साधिकारी ने किया पोस्टमार्टम
इस घटना में मृत हुई बकरियों का पोस्टमार्टम पशुचिकित्साधिकारी डॉ. अनिरुद्ध सिंह द्वारा कराया गया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी करने के बाद रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिसे प्रशासन को सौंपा जाएगा। यह रिपोर्ट मुआवजा प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
प्रशासन ने सहायता का दिया भरोसा
स्थानीय प्रशासन ने पीड़ित परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट के आधार पर पीड़ित को अहेतुक सहायता राशि प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही अन्य सरकारी योजनाओं के तहत भी मदद दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि इस प्रकार की घटनाओं से बचाव के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा और गांव में सुरक्षा उपायों को बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
गांव में दहशत और चिंता का माहौल
इस घटना के बाद पूरे टिटिहिरिया गांव में दहशत और चिंता का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में अधिकतर लोग झोपड़ियों में रहते हैं, जहां आग लगने का खतरा हमेशा बना रहता है। ऐसे में इस तरह की घटनाएं कभी भी बड़े हादसे का रूप ले सकती हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव में अग्निशमन से जुड़े संसाधनों की व्यवस्था की जाए और लोगों को आग से बचाव के उपायों के बारे में प्रशिक्षण दिया जाए।
आग से बचाव के उपायों की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह की घटनाएं अक्सर लापरवाही या जानकारी के अभाव में होती हैं। चूल्हे का सही इस्तेमाल, बिजली के तारों की नियमित जांच और ज्वलनशील पदार्थों को सुरक्षित रखने जैसे उपायों से इस प्रकार की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।




