
अयोध्या के प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास महाराज रविवार को औरैया जनपद पहुंचे, जहां उनका स्वागत किसी भव्य समारोह से कम नहीं था।

उनके पहुंचने पर मंदिर पदाधिकारियों, भक्तों और स्थानीय नागरिकों ने फूल-मालाओं से उनका जोरदार स्वागत किया। पूरे शहर में धार्मिक उत्साह और श्रद्धा का माहौल नजर आया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा इंडियन ऑयल तिराहे के पास स्थापित श्री वीर विजय हनुमान प्रतिमा का विधिवत अनावरण, जो महंत राजू दास महाराज के कर-कमलों से सम्पन्न हुआ। अनावरण के समय जय श्रीराम और हनुमानजी के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से वातावरण को आलोकित कर दिया।
प्रतिमा अनावरण के बाद निकली भव्य कलश यात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। कलश यात्रा ने पूरे क्षेत्र को धार्मिक उत्सव में तब्दील कर दिया। जगह-जगह महंत राजू दास महाराज का फूल-मालाओं से स्वागत हुआ और लोगों ने उनके दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
अनावरण कार्यक्रम के पश्चात महंत राजू दास महाराज ने एक पत्रकार वार्ता में भाग लिया, जहां उन्होंने हाल के सामाजिक घटनाक्रमों और देश में फैल रही विचारधाराओं पर खुलकर अपने विचार रखे।
उन्होंने कहा कि —
“समाज में किसी भी वर्ग या समुदाय के साथ अन्याय स्वीकार्य नहीं है। मानवता ही सर्वोपरि है।”
महंत राजू दास ने महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि —
“ईश्वर-अल्लाह एक हैं, और समाज में सौहार्द और भाईचारा बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।”
उन्होंने यह भी कहा कि धर्म का वास्तविक उद्देश्य केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवता, सामाजिक समरसता और एकता को बनाए रखना है।
महंत ने कहा कि भारत की संस्कृति हमेशा से “वसुधैव कुटुंबकम्” के सिद्धांत पर आधारित रही है। समाज में अगर आपसी सहयोग, सम्मान और प्रेम बना रहेगा, तो किसी भी प्रकार का विभाजन संभव नहीं। उन्होंने बताया कि धर्म की रक्षा तभी संभव है जब समाज एकजुट, संगठित और शांतिप्रिय बना रहे।
महंत राजू दास ने अपने प्रवचन में कहा कि सभी धर्मों का सार एक ही है — “मानवता सर्वोपरि।” उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि धार्मिक परंपराओं के साथ-साथ उन्हें सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्रीय एकता के प्रति सजग रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि —
“भारत की शक्ति उसकी विविधता में है। हमें किसी भी भेदभाव से ऊपर उठकर, शांति और एकता के मार्ग पर चलना चाहिए।”
पूरा कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और उत्साह से परिपूर्ण रहा। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में धार्मिक संगीत, भजन और प्रसाद वितरण के आयोजन हुए। श्रद्धालुओं ने इसे एक ऐतिहासिक पल बताया।
इस मौके पर क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक, धार्मिक पदाधिकारी, सामाजिक संगठनों के सदस्य और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने महंत राजू दास महाराज के प्रवचन और उनके एकता के संदेश की सराहना की।
महंत राजू दास महाराज का यह दौरा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि यह समाज में आपसी भाईचारे, सौहार्द और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बन गया। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि धर्म का असली अर्थ मानवता की सेवा और समाज को संगठित करना है।




