
अलीगढ़ जिले के थाना अतरौली क्षेत्र के ग्राम रायपुर मुजफता में एक मामूली उधार विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। दो पक्षों में पैसे की मांग को लेकर झगड़ा इतना बढ़ गया कि लाठी-डंडों का इस्तेमाल किया गया। इस हिंसक झगड़े में दो महिलाएँ सहित तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने मामले की जानकारी मिलने के बाद तुरंत 112 नंबर टीम को मौके पर भेजा और घायलों को अतरौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाया गया।

जानकारी के अनुसार, नौरंगीलाल पुत्र चुन्नी लाल का कहना है कि उनका बेटा, जो रामगोपाल का ट्रैक्टर चलाता है, अपने मजदूरी के ₹700 लेने गया था। पैसे मांगने के दौरान दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हुई और देखते ही देखते यह बहस हिंसक झगड़े में बदल गई।
झगड़े में संतोष देवी (पत्नी रामगोपाल), नौरंगीलाल, और मीना देवी (पत्नी नौरंगीलाल) घायल हो गए। उन्हें प्राथमिक उपचार के लिए अतरौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। गंभीर रूप से घायल नौरंगीलाल और मीना देवी को अलीगढ़ जिला अस्पताल रेफर किया गया।
घटना के बाद दोनों पक्षों ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।
नौरंगीलाल का आरोप है कि उनका बेटा अपने मजदूरी के पैसे लेने गया था, लेकिन रामगोपाल और उनके परिवार ने उस पर हमला कर दिया।
वहीं रामगोपाल का कहना है कि नौरंगीलाल का बेटा उनके घर शराब पीकर आया और गाली-गलौज करने लगा। इस पर विवाद बढ़ा और झगड़ा हो गया। रामगोपाल ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके ऊपर किसी का पैसा नहीं था और झगड़े को लेकर उसने कोतवाली अतरौली में शिकायत पत्र दे दिया है।
पुलिस ने दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल, पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि झगड़ा किस कारण से और किसकी वजह से हिंसक रूप लिया। पुलिस अधिकारी ने कहा कि दोनों पक्षों को बुलाकर सत्यापित विवरण लिया जा रहा है और उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
गांव में इस घटना ने तनाव का माहौल बना दिया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि छोटी सी उधार की मांग को लेकर इस तरह हिंसा फैलाना न केवल समाज में भय पैदा करता है बल्कि आम जनजीवन को भी प्रभावित करता है।
पुलिस और प्रशासन का संदेश है कि विवादों को हिंसक तरीके से हल करने की बजाय कानूनी मार्ग अपनाना चाहिए और स्थानीय प्रशासन से सहायता ली जा सकती है।
अलीगढ़ जिले के ग्राम रायपुर मुजफता में हुई यह घटना बताती है कि मामूली विवाद भी सही दिशा न मिलने पर गंभीर रूप ले सकता है। अब पुलिस मामले की जांच में जुटी है और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
यह मामला न केवल सामाजिक चेतना का संकेत देता है बल्कि लोगों को यह भी याद दिलाता है कि विवाद समाधान के लिए कानून का सहारा लेना ही सुरक्षित और उचित तरीका है।




