Tuesday , June 25 2024

उत्तराखंड: युवा बोले- कुमाऊं में ही रहे हाईकोर्ट

हाईकोर्ट को कुमाऊं से गढ़वाल शिफ्ट किए जाने की कवायद के बीच युवा, छात्र और लॉ विद्यार्थी भी मुखर हो गए हैं। उनका की कहना है कि हाईकोर्ट कुमाऊं से अन्यत्र शिफ्ट कतई नहीं किया जाना चाहिए।

हाईकोर्ट को कुमाऊं से गढ़वाल शिफ्ट किए जाने की कवायद के बीच युवा, छात्र और लॉ विद्यार्थी भी मुखर हो गए हैं। उनका की कहना है कि हाईकोर्ट कुमाऊं से अन्यत्र शिफ्ट कतई नहीं किया जाना चाहिए। अगर नैनीताल से शिफ्ट किया जाना जरूरी ही है तो इसे हल्द्वानी, रामनगर या ऊधमसिंह नगर जिले में कहीं किया जाना चाहिए। कइयों का कहना है कि कुमाऊं से अगर हाईकोर्ट शिफ्ट हुआ तो रोजगार भी शिफ्ट हो जाएगा, जो कुमाऊं के साथ गलत होगा। सभी का मत है कि जगह की कमी के कारण हाईकोर्ट को यहां से गढ़वाल शिफ्ट करना सही नहीं है, जगह तो कुमाऊं में भी कम नहीं है। नैनीताल में अगर जगह नहीं है तो ऊधमसिंह नगर में हाईकोर्ट के लिए पर्याप्त जगह है।

हाईकोर्ट तो कुमाऊं में ही रहना चाहिए। अगर जनमत संग्रह हो रहा है तो राज्य की राजधानी को लेकर भी इस विषय पर राय ली जानी चाहिए। आखिर कुमाऊं के साथ यह अन्याय कब तक चलता रहेगा।

  • रवि बिष्ट, हल्द्वानी।

उच्च न्यायालय का स्थानांतरण न्यायिक व्यवस्था के लिए नुकसानदेह होगा। नैनीताल में हाईकोर्ट के लिए पर्याप्त जगह व व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं, इसका विस्तार भी किया जा सकता है। अगर शिफ्टिंग पर जनमत हो रहा है तो राजधानी के लिए भी होना चाहिए। – निमिष अग्रवाल, रामनगर

जगह की कमी के कारण हाईकोर्ट को ऋषिकेश शिफ्ट करना ठीक नहीं है। कुमाऊं क्षेत्र के अधिकारियों और लोगों की जेब ढीली होगी। आर्थिक भार पड़ने के साथ ही उनका समय बर्बाद होगा। हाईकोर्ट के लिए कुमाऊं क्षेत्र में जगह तलाशनी चाहिए। – -संदीप रावत, छात्र, चंपावत, महाविद्यालय।

हाईकोर्ट को ऋषिकेश शिफ्ट करने का फैसला भविष्य को ध्यान में रखकर लिया जाना चाहिए। चंपावत क्षेत्र के लोगों और अधिकारियों के लिए इतनी दूर आना आसान नहीं होगा। इससे दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।

  • लीलावती भट्ट, छात्रा, चंपावत, महाविद्यालय।

पर्वतीय क्षेत्रों के विकास के लिए गढ़वाल में राजधानी स्थापित हुई तो कुमाऊं के हिस्से में एकमात्र हाईकोर्ट आया है। गढ़वाल में राजधानी, एम्स अस्पताल, उच्च स्तरीय संस्थान समेत सभी विभागों के मुख्यालय हैं। -गौरव जोशी, रिसर्च स्कॉलर, लॉ।

जन सुविधाओं को देखते हुए हाईकोर्ट को गौलापार में बनाना चाहिए, इससे क्षेत्र का विकास होगा। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के लिए नए विकल्प खुलेंगे। बेहतर होगा कि हाईकोर्ट आसपास के ही क्षेत्र में रहे। -आराध्या मिश्रा, बीए एलएलबी, तृतीय वर्ष।

हाईकोर्ट को कुमाऊं से बाहर नहीं जाना चाहिए। हाईकोर्ट के लिए जनमत संग्रह की बात उठी है तो राजधानी के लिए जनमत होना कोई गलत नहीं है। जनभावनाओं के अनुरूप निर्णय लेना चाहिए।

  • अनिता शर्मा, अध्यक्ष उत्तराखंड महिला संघ काशीपुर।

हाईकोर्ट की बेंच खोलना उचित नहीं है। हाईकोर्ट कुमाऊं में ही रहना चाहिए। यदि हाईकोर्ट शिफ्ट करना आवश्यक है तो इसे रुद्रपुर में किया जाना चाहिए जहां भूमि पर्याप्त उपलब्ध है। एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, रोडवेज सहित अन्य सुविधाएं है।

  • सुरेंद्र शर्मा, अध्यक्ष बाजपुर बार एसोसिएशन

हाईकोर्ट को नैनीताल से स्थानांतरित करना पर्यटकों और कानून सहयोगियों दोनों के लिए एक बुनियादी जरूरत बन गई है। क्योंकि भीड़ बहुत ज्यादा है और सुविधाएं कम। जब हाईकोर्ट के लिए जनमत संग्रह कराया जा रहा है तो इसी तरह राजधानी के लिए भी कराया जाना चाहिए।

  • अरुण कोली, एलएलबी छठवां सेमेस्टर रुद्रपुर।

उत्तराखंड गठन के समय से ही हाईकोर्ट कुमाऊं में है। यदि कोर्ट को नैनीताल से दूसरी जगह शिफ्ट किया जा रहा है तो इसे कुमाऊं में ही सुविधायुक्त स्थान पर शिफ्ट किया जाना चाहिए। कुमाऊं से बाहर हाईकोर्ट शिफ्ट नहीं होना चाहिए।

  • अजय अवस्थी, लॉ स्टूडेंट डीडीहाट, पिथौरागढ़।

कुमाऊं के सुदूर अंचलों ने वैसे ही शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन की अनदेखी झेली है। ऊपर से हाईकोर्ट को शिफ्ट किया जाना कुमाऊं के लिए एक और झटका होगा। हाईकोर्ट यहां से अन्यत्र शिफ्ट नहीं किया जाना चाहिए।

  • किशोर कुमार जोशी, शोध छात्र, पिथौरागढ़।

हाईकोर्ट को कुमाऊं से बाहर शिफ्ट नहीं किया जाना चाहिए। हल्द्वानी में चिह्नित जमीन में कोई दिक्कत है तो यूएस नगर इसके लिए सर्वोत्तम विकल्प है। यहां जमीन की कोई कमी नहीं है, साथ ही किसी किस्म की कोई दिक्कत नहीं है। -चंद्रकला रॉय, विधि छात्रा, रुद्रपुर।

हाईकोर्ट शिफ्टिंग के लिए यूएस नगर जिला सर्वसुलभ है। रुद्रपुर, किच्छा सहित अन्य जगहों पर जमीन खाली हैं। यहां कोर्ट स्थापित हो सकता है। इसके अलावा सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी अन्य जगहों की तुलना बेहतर है।

  • सुषमना पांडे, विधि छात्रा, जवाहर नगर, किच्छा

हाईकोर्ट को गढ़वाल शिफ्ट करना गलत है। जब कुमाऊं के लोग राजधानी देहरादून पहुंच सकते हैं तो दोनों मंडलों के बीच नैनीताल हाईकोर्ट पहुंचना भी आसान है। हाईकोर्ट शिफ्ट हुआ कई तरह की दिक्कत झेलनी पड़ेगी।

  • चैतन्या साह, एलएलबी, छठा सेमेस्टर, अल्मोड़ा

हाईकोर्ट को कुमाऊं से शिफ्ट करना अव्यावहारिक और यहां लोगों की अनदेखी है। यह सोचनीय विषय है कि कुमाऊं के संस्थानों को गढ़वाल शिफ्ट क्यों किया जा रहा है और यहां के जनप्रतिनिधि क्यों चुप हैं। विधि का ही नहीं हर छात्र नैनीताल से हाईकोर्ट को स्थानांतरित करने का विरोध करेगा।

  • पंकज कार्की, एलएलबी, चतुर्थ सेमेस्टर, अल्मोड़ा।

हाईकोर्ट के कुमाऊं में होने से न केवल न्याय वरन विकास, रोजगार और आर्थिक स्थिति को बेहतर करने में मदद मिली है। हाईकोर्ट को अन्यत्र शिफ्ट करना ही पड़े तो भी कुमाऊं मंडल में किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट करना चाहिए। -रीतिका मेहता, डीएलएड प्रशिक्षु, बागेश्वर

Check Also

बरेली: रेलवे ने मथुरा-टनकपुर स्पेशल का संचालन बढ़ाया

कान्हा की नगरी के लिए चलने वाली मथुरा-टनकपुर-मथुरा स्पेशल ट्रेन दिसंबर तक चलती रहेगी। रेलवे …