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मनीष तिवारी का विदेश मंत्री एस जयशंकर को सलाह, कहा…

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर इन दिनों विदेश यात्रा पर हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कश्मीर का मुद्दा उठाने के लिए पाकिस्तान को करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि एक देश जिसने अल-कायदा नेता ओसामा बिन लादेन की मेजबानी की और अपने पड़ोसी देश की संसद पर हमला किया, उसके पास संयुक्त राष्ट्र में उपदेश देने की साख नहीं है। विदेश मंत्री के इस बयान पर कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने उन्होंने पंडित जवाहर लाल नेहरू की सरकार में रक्षा मंत्री रहे कृष्ण मेनन वाली गलती नहीं करने की सलाह दी है।
मनीष तिवारी ने ट्वीट कर कहा, ”विदेश मंत्री एस जयशंकर को शायद भारतीय इतिहास और कूटनीति के कुछ अध्यायों पर दोबारा गौर करना चाहिए। दुर्भाग्य से वे वही गलती कर रहे हैं जो रक्षा मंत्री कृष्णा मेनन ने की थी। जब खतरा चीन से है तो वह पाकिस्तान पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं!” आपको बता दें कि मनीष तिवारी ने चीन के साथ सीमा की स्थिति पर चर्चा के लिए लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव नोटिस दिया है। क्या कहा था जयशंकर ने? संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कश्मीर का मुद्दा उठाने पर भारत ने बुधवार को पाकिस्तान को करारा जवाब देते हुए कहा कि एक देश जिसने अल-कायदा नेता ओसामा बिन लादेन की मेजबानी की और अपने पड़ोसी देश की संसद पर हमला किया, उसके पास संयुक्त राष्ट्र में उपदेश देने की साख नहीं है। उन्होंने कहा, ”दुनिया जिसे अस्वीकार्य मानती है, उसे सही ठहराने का सवाल ही नहीं उठना चाहिए। यह निश्चित रूप से सीमा पार आतंकवाद के राज्य प्रायोजन पर लागू होता है। न ही ओसामा बिन लादेन की मेजबानी करना और पड़ोसी देश की संसद पर हमला करना इस परिषद के सामने उपदेश देने के लिए प्रमाणिकता के रूप में काम कर सकता है।” संसद में उठा चीनी अतिक्रमण का मुद्दा, विपक्ष ने किया दोनों सदनों से वॉकआउट बुधवार को संसद में कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के सदस्यों ने अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में भारत एवं चीन के सैनिकों के बीच पिछले दिनों हुई झड़प के मुद्दे को फिर उठाया और इस पर चर्चा कराने की मांग की। दोनों सदनों में इस मुद्दे पर चर्चा की अनुमति नहीं मिलने पर विभिन्न विपक्षी दलों के सदस्यों ने वॉकआउट किया। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने शून्यकाल में चीनी अतिक्रमण के मुद्दे पर चर्चा कराने की मांग की। उन्होंने कहा, ”हमने कल भी इस मुद्दे पर चर्चा के लिए नोटिस दिया था। जो चीनी अतिक्रमण हुआ है, उसके बारे में हम विस्तृत चर्चा चाहते हैं। हमारी कोशिश रही है कि सदन को पूरी जानकारी मिले, देश के लोगों को भी जानकारी मिले कि वहां की वास्तविक स्थिति क्या है।” तवांग झड़प पर रक्षा मंत्रा का बयान इससे पहले मंगलवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को लोकसभा एवं राज्यसभा में स्वत: आधार पर दिये गये अपने बयान में बताया था कि चीन के सैनिकों ने नौ दिसंबर को तवांग सेक्टर में यांग्त्से क्षेत्र में यथास्थिति बदलने का एकतरफा प्रयास किया जिसका भारत के जवानों ने दृढ़ता से जवाब दिया और उन्हें लौटने के लिए मजबूर किया। रक्षा मंत्री ने यह भी सूचना दी थी कि इस झड़प में किसी भी सैनिक की मृत्यु नहीं हुई है और न ही कोई गंभीर रूप से घायल हुआ है। उन्होंने कहा था कि इस मुद्दे को चीनी पक्ष के साथ कूटनीतिक स्तर पर भी उठाया गया है और इस तरह की कार्रवाई के लिये मना किया गया है।

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