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यूपी के पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन की पुस्तक का लोकार्पण, आईएएस उम्मीदवारों को दिए गुरु-मंत्र

यूपी के पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन की लिखी पुस्तक  ‘‘मेकिंग ए डिफरेन्स-आईएएस एज़ ए कैरियर’’ का आज लखनऊ में लोकार्पण किया गया। जयपुरिया इन्टीटयूट ऑफ मैनेजमेन्ट में आयोजित एक कार्यक्रम में श्री रंजन ने  कहा कि उनकी पुस्तक 38 साल की सेवा के दौरान मिले अनुभवों का निचोड़ है और नए बनने वाले आईएएस अधिकारियों और उम्मीदवारों को इसका सबसे ज़्यादा लाभ मिलेगा।

पुस्तक में आलोक रंजन द्वारा आई0ए0एस0 में आने के उद्देश्य के बारे में अपने विचार रखते हुए आई0ए0एस0 जैसी कठिन परीक्षा के लिए गुरुमंत्र भी दिया है जो कि विद्यार्थियों के लिए अत्यन्त उपयोगी सिद्ध होगी। पुस्तक में उन्होंने लिखा है कि जिला प्रशासन, प्रदेश सरकार व भारत सरकार सभी स्तर पर एक आई0ए0एस0 अधिकारी को कैसे चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और वह किस प्रकार समाज में अपना योगदान दे सकते हैं। यह किताब मशहूर प्रकाशन पेन्गुइन द्वारा प्रकाशित की गयी है।

कार्यक्रम का संचालन टीसीएस के पूर्व अधिशासी निदेशक और राष्ट्रीय स्किल डेवलेपमेंट कार्पोरेशन के पूर्व एमडी जयन्त कृष्णा द्वारा किया गया। उन्होंने आलोक रंजन के साथ अपने सकारात्मक अनुभवों का विश्लेषण करते हुए कहा कि आलोक रंजन ने अपने सेवाकाल में एक जनसेवक के रूप में कार्य किया और देश व प्रदेश के विकास में महती भूमिका निभायी। उन्होने कहा कि श्री रंजन वास्तविक रूप में एक लोकप्रिय जनसेवक रहे।

पुस्तक के विषय में श्री रंजन ने बताया कि यह किताब उनकी आत्मकथा नहीं है, परन्तु उनके 38 साल के लम्बे सेवाकाल के प्रशासनिक अनुभवों का निचोड़ है। उन्होंने अपने प्रशासनिक अनुभवों के आधार पर कुशल नेतृत्व और सुप्रशासन के मंत्र पाठक के सामने रखे हैं। उनका कहना है कि आई0ए0एस0 सेवा का सच्चा उद्देश्य समाज मे बदलाव लाना है और एक आई0ए0एस0 अधिकारी को निरन्तर यह प्रयास करना चाहिए कि किस प्रकार से समाज के शोषित, गरीब व पिछडे़ वर्ग के लोगों को सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं से किस प्रकार लाभान्वित कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जनकल्याणकारी योजनाओं से पात्र लाभार्थियों को पारदर्शिता के साथ अधिक से अधिक लाभ दिलाकर गरीबी स्तर को उपर लाने का प्रयास प्रत्येक नौकरशाह को करना चाहिए। उन्होंने कहा कि नौकरशाह के सामने अपने शासकीय दायित्वों को पारदर्शिता एवं निष्पक्षता के साथ निर्वहन करने में काफी चुनौतियों का सामना अवश्य करना पड़ता है। परन्तु किसी भी नौकरशाह को अपने शासकीय सेवाकाल में अपने दायित्वों के निर्वहन में कभी भी घबराकर कोई भी अनुचित शासकीय कार्य नहीं करना चाहिए।

पुस्तक के विषय में बताते हुए श्री रंजन ने अपने सेवाकाल में कराए कार्यों की भी जानकारी दी है। इसमें

मेट्रो रेल का आरम्भ, इकाना स्टेडियम की स्थापना, एम्बुलेन्स सेवा, डायल-100 की सेवा, प्रदेश में मेडिकल कालेजों का निर्माण आदि के साथ-साथ 308 किलोमीटर लम्बे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे का निर्माण मात्र 23-24 माह में करा देना शामिल हैं।

लोकार्पण कार्यक्रम में अध्यक्ष, राज्य लोक सेवा अधिकरण सुधीर सक्सेना, उत्तर प्रदेश के सेवानिवृत्त मुख्य सचिव नवीन चन्द्र वाजपेयी एवं अतुल गुप्ता के द्वारा भी आई0ए0एस0 सेवा एवं श्री रंजन की कार्यशैली के बारे में अपने विचार व्यक्त किये। लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अरविन्द मोहन और कैरियर काउन्सलर सुरभि सहाय ने भी नौकरशाह की जनसेवक की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम में भूतपूर्व एवं वर्तमान आई0ए0एस0 अधिकारी, लेखक, पत्रकार एवं समस्त बुद्धजीवी वर्ग ने प्रतिभाग किया एवं पुस्तक के विषय में अपने विचार व्यक्त किये।

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