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ब्रज में होली पर्व की शुरुआत : पहले भगवान को लगाया गुलाल, फिर भक्तों को किया सराबोर

मथुरा। ब्रज में चालीस दिनों तक चलने वाले होली पर्व की शुरुआत मथुरा वृंदावन में हो चुकी है। यहां पर होली पर्व की शुरुआत होली से 40 दिन पहले हो जाती है।

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मान्यता है कि, वसंत-पंचमी यानी सरस्वती पूजन के दिन भगवान श्रीकृष्ण अपने भक्तों संग वृंदावन में होली खेलते हैं। यह फाग उत्सव 40 दिन यानी 960 घंटे तक चलता है।

इस अवसर पर आज श्रद्धालुओं ने जमकर अबीर गुलाल उड़ाए। यहां इसकी कई दिनों पहले से तैयारी शुरू हो जाती है।

उड़त गुलाल, लाल भए बदरा

यूपी में वैसे तो चुनावी रंग बरस रहे हैं, लेकिन ब्रज में लोगों को इस बार दो रंगों का आनंद मिल रहा है। चुनावी रंग के साथ ही होली के रंग भी उड़ने लगे हैं और लोग कहते हैं, उड़त गुलाल लाल भए बदरा।

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ठाकुर जी भक्तों संग खेलते हैं होली

ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में वसंत पंचमी के दिन से होली की शुरुआत का अनोखा नजारा देखने के लिए देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं जो अगले 40 दिनों तक ब्रज के फाग महोत्सव का आनंद उठाते हैं।

भक्तों का मानना है कि, पहला रंग उनके ऊपर भगवान के प्रसाद के तौर पर रंग के रूप में बरसे।

बांके बिहारी मंदिर में उड़ा गुलाल

शनिवार को वसंत पंचमी के अवसर पर बांके बिहारी मंदिर के पट जैसे ही भक्तों के लिए खुले, वैसे ही पूरा मंदिर गुलाल की सतरंगी छटा से भर गया।

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मंदिर के पुजारी भगवान बांके बिहारी के प्रसाद के तौर पर गुलाल भक्तों पर डाल रहे थे। इस दौरान मंदिर में हर तरफ हरे, पीले, नीले गुलाल ही गुलाल नजर आ रहे थे।

ब्रज के अन्य मंदिरों में भी खेली गई होली

भगवान राधा कृष्ण के प्रेम स्वरूप खेली जाने वाली होली की धूम बरसाना, नंद गांव, मथुरा सहित वृंदावन के अन्य मंदिरों मे भी देखने को मिली।

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वसंत पंचमी के साथ ही यहां के सभी प्रमुख मंदिरों में गुलाल उड़ाने की शुरुआत हो गई और ये सिलसिला अगले 40 दिन तक चलता रहेगा।

परंपरा के अनुसार वसंत पंचमी के दिन मंदिर में सुबह की आरती के बाद सबसे पहले मंदिर के सेवायत पुजारी भगवान बांके बिहारी को गुलाल का टीका लगाकर होली के इस पर्व की विधिवत शुरुआत करते है।

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और उसके बाद इस पल के साक्षी बने मंदिर प्रांगण में मौजूद श्रद्धालुओं पर सेवायत पुजारियों द्वारा जमकर वसंती गुलाल उड़ाया जाता है।

वसंत-पंचमी के दिन से ही मंदिरों में होली खेलने की शुरुआत होने के साथ ही ब्रज में जगह-जगह पूजा-अर्चना करने के साथ होलिका बनाने की भी शुरुआत हो जाती है।

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