
नई दिल्ली: भारतीय पैरा-एथलेटिक्स जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। एशियन पैरा गेम्स में तीन स्वर्ण पदक जीतने वाले भारतीय खिलाड़ी नीरज यादव की 42 वर्ष की उम्र में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। शुरुआती मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, 27 अक्टूबर की रात दिल्ली में उनकी मौत हुई। मामले की जांच की जा रही है और घटना से जुड़ी परिस्थितियों को लेकर आधिकारिक जांच के निष्कर्षों का इंतजार है। नीरज की मौत की खबर से खेल जगत में शोक का माहौल है।
कौन थे नीरज यादव, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया?
उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले नीरज यादव भारत के प्रतिभाशाली पैरा-एथलीटों में गिने जाते थे। उन्होंने शारीरिक चुनौतियों के बावजूद खेल के मैदान में अपनी अलग पहचान बनाई थी। महज सात साल की उम्र में वह पोलियो के बाद होने वाले लकवे से प्रभावित हुए थे। हालांकि, इस कठिन परिस्थिति ने उनके खेल के प्रति जुनून को खत्म नहीं किया।
नीरज ने अपने खेल करियर की शुरुआत व्हीलचेयर टेनिस से की थी। वर्ष 2005 से 2012 के बीच उन्होंने इस खेल में हिस्सा लिया। इसके बाद उन्होंने पैरा-एथलेटिक्स की ओर रुख किया और भाला फेंक तथा चक्का फेंक जैसी स्पर्धाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
उनकी मेहनत का परिणाम तब सामने आया, जब उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए पदक जीतने शुरू किए।
2018 से 2023 तक ऐसा रहा उनका शानदार सफर
नीरज यादव को पहली बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलता 2018 में जकार्ता में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में मिली। उन्होंने पुरुषों की एफ55 श्रेणी में भाला फेंक स्पर्धा का स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस प्रतियोगिता में उन्होंने 29.84 मीटर का थ्रो करते हुए एशियाई रिकॉर्ड भी बनाया था।
इसके बाद 2023 में चीन के हांगझोऊ में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में भी नीरज ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने भाला फेंक और चक्का फेंक में स्वर्ण पदक जीते। इस तरह उनके नाम एशियन पैरा गेम्स के तीन स्वर्ण पदक दर्ज हुए।
उनकी उपलब्धियां इस बात का उदाहरण थीं कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद लगातार अभ्यास और मेहनत से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की जा सकती है।
डोपिंग मामले ने करियर को पहुंचाया बड़ा नुकसान
नीरज यादव का खेल करियर बाद में डोपिंग विवाद की वजह से प्रभावित हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, अक्टूबर 2023 में बेंगलुरु में लिए गए उनके एक नमूने में प्रतिबंधित पदार्थ स्टैनोजोलोल पाए जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (NADA) ने उनके खिलाफ कार्रवाई की और उन्हें अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया।
इस मामले के चलते उन्हें चार साल के प्रतिबंध का सामना करना पड़ा। डोपिंग प्रक्रिया के बाद हांगझोऊ एशियन पैरा गेम्स में जीते गए उनके दोनों स्वर्ण पदक भी वापस ले लिए गए। इससे उनकी खेल उपलब्धियों और संभावित पुरस्कारों पर असर पड़ा।
हालांकि, नीरज ने कथित तौर पर नमूने की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे और अपनी बेगुनाही का दावा किया था। उन्होंने नमूने की पुष्टि के लिए डीएनए जांच की मांग भी की थी।
हाल के एशियन पैरा गेम्स में नहीं ले सके हिस्सा
डोपिंग प्रतिबंध के कारण नीरज अक्टूबर 2026 में जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में हिस्सा नहीं ले सके। भारतीय पैरा-एथलेटिक्स के मुख्य कोच एस. सत्यनारायण ने मीडिया रिपोर्टों में कहा कि प्रतियोगिता में शामिल नहीं हो पाने के कारण नीरज भावनात्मक तनाव से गुजर रहे हो सकते थे।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि उनकी मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या था। किसी एक परिस्थिति को उनकी मौत का निश्चित कारण मानना उचित नहीं होगा। मामले से जुड़ी सभी परिस्थितियों की जांच जरूरी है।
खेल जगत में शोक, जांच के निष्कर्षों का इंतजार

नीरज यादव की मौत ने भारतीय पैरा-एथलेटिक्स जगत को गहरे सदमे में डाल दिया है। एक ऐसे खिलाड़ी का निधन, जिसने बचपन से शारीरिक चुनौतियों का सामना करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई, खेल समुदाय के लिए बेहद दुखद है।
फिलहाल, उनकी मौत से जुड़े घटनाक्रम की जांच की जा रही है। घटना के कारणों और परिस्थितियों को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे। नीरज का जीवन और उनका खेल सफर उन खिलाड़ियों के संघर्ष की याद दिलाता है, जो तमाम मुश्किलों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने के लिए लगातार प्रयास करते हैं।




