
बीजिंग/तिब्बत: चीन में तिब्बती बौद्ध परंपराओं पर बढ़ती सख्ती के बीच एक वरिष्ठ तिब्बती अधिकारी को कथित तौर पर भारी कीमत चुकानी पड़ी है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पूर्वी तिब्बत के ड्रक्कार काउंटी में कम्युनिस्ट पार्टी सचिव और काउंटी प्रमुख के पद पर तैनात द्रुक बुम ग्याल (Druk Bum Gyal) को इसलिए उनके पद से हटा दिया गया क्योंकि उन्होंने तिब्बती बौद्ध धार्मिक परंपराओं पर लगाए जा रहे नए प्रतिबंधों को तत्काल लागू करने पर आपत्ति जताई थी। उनका मानना था कि यदि इन आदेशों को बिना किसी तैयारी के लागू किया गया तो क्षेत्र में सामाजिक असंतोष और तनाव बढ़ सकता है।

तिब्बती समाचार पोर्टल फयुल (Phayul) ने तिब्बत टाइम्स (Tibet Times) के हवाले से दावा किया है कि चीन ने सेरचेन, त्रिका, ड्रक्कार, मंगरा और बा सहित पांच काउंटियों के अधिकारियों को तिब्बती धार्मिक गतिविधियों पर कड़े नियंत्रण लागू करने का निर्देश दिया था। इन आदेशों के तहत पारंपरिक बौद्ध धार्मिक कार्यक्रमों पर कई नई पाबंदियां लगाने की योजना बनाई गई थी।
धार्मिक आयोजनों पर सख्ती बढ़ाने के निर्देश
रिपोर्ट के अनुसार, नए निर्देशों में न्युंगने (Nyungne) नामक पारंपरिक बौद्ध उपवास एवं साधना कार्यक्रम के सार्वजनिक आयोजन पर रोक लगाने की बात कही गई थी। इसके अलावा प्रार्थना झंडों और धार्मिक बैनरों को हटाने, धार्मिक आयोजनों की निगरानी बढ़ाने तथा प्रत्येक घर के बाहर चीन का राष्ट्रीय ध्वज लगाना अनिवार्य करने जैसे आदेश भी शामिल थे।
बताया गया है कि द्रुक बुम ग्याल ने इन निर्देशों का पूरी तरह विरोध नहीं किया था, बल्कि उन्होंने सुझाव दिया था कि इन्हें धीरे-धीरे लागू किया जाए ताकि स्थानीय लोगों में असंतोष और विरोध की स्थिति पैदा न हो। उनका तर्क था कि अचानक लगाए गए प्रतिबंध सामाजिक और धार्मिक तनाव को बढ़ा सकते हैं।
विरोध के बाद पद से हटाए गए
रिपोर्टों के मुताबिक, अधिकारियों ने उनके इस रुख को सरकारी आदेशों का पालन न करने के रूप में देखा। इसके बाद उन्हें उनके सभी महत्वपूर्ण नेतृत्व पदों से हटाकर अपेक्षाकृत कम महत्व वाले प्रशासनिक पद पर भेज दिया गया। हालांकि, स्थानीय तिब्बती समुदाय के बीच द्रुक बुम ग्याल की छवि मजबूत हुई है। कई लोगों का मानना है कि उन्होंने धार्मिक परंपराओं और स्थानीय भावनाओं की रक्षा करने का प्रयास किया।
स्थानीय लोगों ने बताया साहसी अधिकारी
तिब्बती समुदाय के लोगों का कहना है कि द्रुक बुम ग्याल ने प्रशासनिक दबाव के बावजूद स्थानीय धार्मिक परंपराओं का सम्मान करने की कोशिश की। इसी कारण वे आम लोगों के बीच एक साहसी और संवेदनशील अधिकारी के रूप में उभरकर सामने आए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि लोगों ने उनके फैसले की खुलकर सराहना की और इसे तिब्बती संस्कृति की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना।
अप्रैल के बाद और तेज हुआ अभियान
रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल में हान चीनी अधिकारी श्योंग युआनलाई के त्सोल्हो प्रीफेक्चर के कम्युनिस्ट पार्टी सचिव बनने के बाद तिब्बती धार्मिक परंपराओं के खिलाफ कार्रवाई और तेज हो गई। इसके बाद कई क्षेत्रों में धार्मिक प्रतीकों और परंपराओं को हटाने के लिए व्यापक अभियान चलाया गया।
धार्मिक प्रतीकों को हटाने के आरोप
फयुल और तिब्बत टाइम्स की रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अभियान के दौरान बौद्ध मंत्रों से अंकित मणि पत्थरों को तोड़ा गया, प्रार्थना झंडों और बैनरों को हटाकर जलाया गया तथा हर घर पर चीनी राष्ट्रीय ध्वज लगाने का निर्देश दिया गया। इसके साथ ही कुछ तिब्बती सरकारी कर्मचारियों को यह कहते हुए पदों से हटाया गया कि प्रशासन में तिब्बती अधिकारियों की संख्या अधिक है।
रिपोर्टों के अनुसार, इन कार्रवाइयों के कारण तिब्बती समाज पर मानसिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। मानवाधिकार संगठनों और निर्वासित तिब्बती समूह लंबे समय से आरोप लगाते रहे हैं कि चीन तिब्बती पहचान, भाषा और धार्मिक स्वतंत्रता पर लगातार नियंत्रण बढ़ा रहा है। हालांकि, चीन इन आरोपों को खारिज करते हुए कहता है कि उसके कदम राष्ट्रीय एकता, कानून-व्यवस्था और सामाजिक स्थिरता बनाए रखने के लिए उठाए जाते हैं।
दलाई लामा के निर्वासन का भी उल्लेख
रिपोर्ट में तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा के भारत में निर्वासन का भी उल्लेख किया गया है। दावा किया गया है कि तिब्बत में लंबे समय से जारी सरकारी नियंत्रण और धार्मिक प्रतिबंधों के कारण ही दलाई लामा को भारत में शरण लेनी पड़ी थी। रिपोर्ट इन हालिया घटनाओं को राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शासनकाल में अपनाई गई कड़ी प्रशासनिक और वैचारिक नीतियों से भी जोड़ती है।
कौन हैं द्रुक बुम ग्याल?
रिपोर्ट के अनुसार, द्रुक बुम ग्याल का जन्म वर्ष 1973 में मंगरा काउंटी में हुआ था। उन्होंने छिंगहाई यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त करने के बाद प्रशासनिक सेवा में लंबा कार्यकाल बिताया। उन्होंने कई जिला स्तरीय प्रशासनिक पदों पर जिम्मेदारियां निभाईं और बाद में ड्रक्कार काउंटी के कम्युनिस्ट पार्टी सचिव तथा काउंटी प्रमुख नियुक्त किए गए। तिब्बती मामलों की अच्छी समझ रखने वाले अधिकारी के रूप में उनकी पहचान रही है।
विवाद क्यों बढ़ा?
विशेषज्ञों का मानना है कि तिब्बत में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों पर बढ़ती निगरानी लंबे समय से विवाद का विषय रही है। तिब्बती समुदाय का आरोप है कि ऐसी नीतियां उनकी धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक पहचान को प्रभावित करती हैं, जबकि चीन का कहना है कि सभी प्रशासनिक फैसले कानून के दायरे में और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं। द्रुक बुम ग्याल का मामला इसी बहस के बीच सामने आया है, जिसने एक बार फिर तिब्बत में धार्मिक स्वतंत्रता और प्रशासनिक नीतियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज कर दी है।




