
नई दिल्ली: देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों पर सख्त कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही यह विधेयक अब कानून बन गया है। नए कानून के लागू होने के बाद पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच, सुनवाई और सजा की पूरी प्रक्रिया तय समय-सीमा में पूरी की जाएगी। सरकार का दावा है कि इस कानून का उद्देश्य केवल आरोपियों को दंडित करना नहीं, बल्कि पूरे पेपर लीक नेटवर्क को जड़ से खत्म करना है।

इस संशोधन के तहत अब पेपर लीक मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी और 90 दिनों के भीतर ट्रायल पूरा कर फैसला सुनाने का प्रावधान किया गया है। वहीं जांच एजेंसियों को भी दो महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी, ताकि वर्षों तक मामलों के लंबित रहने की समस्या समाप्त हो सके।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून हुआ लागू
पेपर लीक संशोधन विधेयक हाल ही में संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ था। लोकसभा में इसे लेकर लंबी बहस और हंगामे के बाद बिल पारित किया गया, जबकि इसी सप्ताह राज्यसभा ने भी इसे मंजूरी दे दी थी। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद अब यह कानून पूरे देश में लागू हो गया है।
सरकार का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं के पेपर लीक होने से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। इसी को देखते हुए कानून को पहले से कहीं अधिक कठोर बनाया गया है।
शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने क्या कहा?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने विधेयक पारित होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा था कि यह संशोधन परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
उन्होंने कहा कि नए कानून में सख्त सजा, त्वरित न्याय, आधुनिक जांच व्यवस्था और पेपर लीक नेटवर्क के खिलाफ व्यापक कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। सरकार का लक्ष्य केवल दोषियों को सजा देना नहीं बल्कि ऐसे संगठित गिरोहों को पूरी तरह समाप्त करना है, जो वर्षों से भर्ती परीक्षाओं को प्रभावित कर रहे हैं।
नए कानून में क्या-क्या बदला?
संशोधित कानून के तहत पेपर लीक के मामलों में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।
1. 90 दिन में फैसला
अब प्रत्येक राज्य में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाई जाएंगी। इन अदालतों में रोजाना सुनवाई होगी और अधिकतम 90 दिनों के भीतर ट्रायल पूरा कर फैसला सुनाया जाएगा।
2. दो महीने में जांच पूरी
पहले जांच पूरी करने की कोई निश्चित समय-सीमा नहीं थी। अब जांच एजेंसियों को 60 दिनों के भीतर जांच पूरी करनी होगी, ताकि मामले वर्षों तक लंबित न रहें।
3. सजा हुई दोगुनी
2024 के कानून में दोषियों के लिए 3 से 5 वर्ष तक की सजा का प्रावधान था। संशोधन के बाद अब 5 से 10 वर्ष तक की कठोर कैद दी जा सकेगी।
4. जुर्माना 10 लाख से बढ़कर 10 करोड़
पहले पेपर लीक मामलों में अधिकतम 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाता था। अब इसे बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये तक कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि भारी आर्थिक दंड से संगठित गिरोहों पर प्रभावी रोक लगेगी।
5. स्पेशल टास्क फोर्स करेगी जांच
पहले ऐसे मामलों की जांच केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा की जाती थी। अब विशेष रूप से स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का गठन किया जाएगा, जो केवल पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े अपराधों की जांच करेगी।
क्यों जरूरी माना गया यह कानून?
पिछले कुछ वर्षों में देश के कई राज्यों में भर्ती परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं के पेपर लीक होने की घटनाएं सामने आईं। इससे लाखों अभ्यर्थियों की मेहनत पर पानी फिरा और कई परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं। सरकार का मानना है कि संगठित गिरोहों, तकनीकी माध्यमों और बड़े आर्थिक नेटवर्क की वजह से पेपर लीक एक गंभीर अपराध बन चुका है।
इसी कारण संशोधित कानून में केवल आरोपियों को सजा देने के बजाय पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने, तेजी से जांच करने और समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
युवाओं में बढ़ी उम्मीद
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू हुए इस कानून से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं को राहत मिलने की उम्मीद है। यदि कानून का प्रभावी ढंग से पालन होता है तो भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, पेपर लीक की घटनाओं पर अंकुश लगेगा और योग्य अभ्यर्थियों को निष्पक्ष अवसर मिल सकेगा।
सरकार का कहना है कि यह कानून केवल दंडात्मक व्यवस्था नहीं है, बल्कि देश की परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार है। अब देखने वाली बात होगी कि नए प्रावधानों के लागू होने के बाद पेपर लीक के मामलों में कितनी तेजी से कार्रवाई होती है और इसका जमीनी स्तर पर कितना असर दिखाई देता है।




