
भोपाल: मध्य प्रदेश विधानसभा ने मंगलवार को समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) विधेयक को पारित कर दिया। बिल पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और जोरदार हंगामा देखने को मिला। हालांकि, सभी विरोधों के बीच सरकार ने अपना पक्ष मजबूती से रखा और अंततः विधेयक सदन से पास हो गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे राज्य के लिए ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू होना सामाजिक न्याय और संवैधानिक समानता की दिशा में बड़ा फैसला है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने क्या कहा?
विधानसभा में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि “जब भगवान ने सभी इंसानों को समान बनाया है तो इंसानों द्वारा बनाए गए कानूनों में भी समानता होनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में अब धर्म, जाति और समुदाय के आधार पर अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की व्यवस्था समाप्त कर समान अधिकार और समान जिम्मेदारी की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है।
सीएम ने अपने संबोधन में कहा कि अब “राम से रहीम तक और एंथोनी से अकबर तक सभी एक ही संविधान और समान कानून के तहत जीवन बिताएंगे।” उन्होंने दावा किया कि सरकार द्वारा कराए गए परामर्श और सुझावों के दौरान 76 प्रतिशत मुस्लिम महिलाओं और लगभग 40 प्रतिशत मुस्लिम पुरुषों ने भी UCC का समर्थन किया।
विपक्ष ने किया विरोध
विधेयक पेश होने के साथ ही विपक्षी दलों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। विपक्ष का आरोप था कि सरकार बिना व्यापक सामाजिक सहमति और पर्याप्त चर्चा के इतना बड़ा कानून लागू कर रही है। विपक्षी विधायकों ने सदन में नारेबाजी करते हुए बिल को वापस लेने की मांग की।
सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि UCC किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करने वाला कानून है।
UCC क्या है?
समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) का उद्देश्य देश या राज्य के सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने, संपत्ति के अधिकार और पारिवारिक मामलों में एक समान कानून लागू करना है। अभी अलग-अलग धर्मों के लोगों पर उनके व्यक्तिगत कानून लागू होते हैं। UCC लागू होने के बाद इन मामलों में समान कानूनी व्यवस्था लागू होगी।
मध्य प्रदेश के UCC बिल की प्रमुख बातें
- विवाह और तलाक से जुड़े मामलों में समान कानूनी प्रक्रिया लागू होगी।
- उत्तराधिकार और संपत्ति के अधिकारों में समानता सुनिश्चित की जाएगी।
- गोद लेने के नियम सभी नागरिकों के लिए एक जैसे होंगे।
- महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को विशेष कानूनी सुरक्षा देने का प्रावधान किया गया है।
- धार्मिक आधार पर अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह समान नागरिक कानून लागू होगा।
- पारिवारिक विवादों के समाधान के लिए एक समान कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
दूसरे राज्यों से कैसे अलग है मध्य प्रदेश का मॉडल?
मध्य प्रदेश सरकार का दावा है कि राज्य का UCC मॉडल स्थानीय सामाजिक परिस्थितियों और सुझावों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। सरकार का कहना है कि इसमें महिलाओं के अधिकार, पारिवारिक न्याय और सामाजिक समानता पर विशेष जोर दिया गया है। साथ ही राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था के अनुसार कुछ प्रक्रियात्मक प्रावधान भी जोड़े गए हैं, जिससे कानून का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
सरकार ने इसे बताया ऐतिहासिक फैसला
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि यह फैसला केवल कानूनी बदलाव नहीं बल्कि सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम है। उनके अनुसार समान नागरिक संहिता से सभी नागरिकों को समान अधिकार और न्याय मिलेगा तथा संविधान में वर्णित समानता के सिद्धांत को मजबूती मिलेगी।
आगे क्या होगा?
विधानसभा से पारित होने के बाद विधेयक आगे की संवैधानिक प्रक्रिया से गुजरेगा। आवश्यक मंजूरियां मिलने और सरकार द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने के बाद इसे राज्य में लागू किया जाएगा। इसके बाद संबंधित नियमावली और प्रशासनिक दिशा-निर्देश भी जारी किए जाएंगे ताकि कानून को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके।
मध्य प्रदेश में UCC बिल के पारित होने के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। सरकार इसे समान अधिकार और सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे व्यापक सहमति के बिना लिया गया निर्णय मान रहा है। आने वाले दिनों में इस कानून के प्रावधानों और उसके प्रभाव को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा जारी रहने की संभावना है।




