टॉप न्यूज़राज्य

Mumbai Local : मुंबई लोकल में हर दिन जान का खतरा, भीड़ और हादसों ने यात्रियों की बढ़ाई चिंता लगातार

मुंबई लोकल: हर सफर में मौत का डर, रोज़ 70 लाख यात्रियों की जिंदगी दांव पर

मुंबई: मायानगरी मुंबई की पहचान सिर्फ ऊंची इमारतें, फिल्म इंडस्ट्री या तेज रफ्तार जिंदगी नहीं है। इस शहर की असली धड़कन मुंबई लोकल ट्रेनें हैं, जिन्हें करोड़ों लोग “लाइफलाइन” कहते हैं। लेकिन यही लाइफलाइन अब हजारों यात्रियों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। हर सुबह और शाम लाखों लोग भीड़ से जूझते हुए ट्रेन पकड़ते हैं और घर से निकलते समय परिवार वालों की एक ही बात होती है—“सावधानी से जाना, सुरक्षित वापस आना।”

सुबह के व्यस्त समय में किसी भी स्टेशन का नजारा किसी मेले से कम नहीं होता। प्लेटफॉर्म पर पैर रखने तक की जगह नहीं बचती। जैसे ही ट्रेन प्लेटफॉर्म पर पहुंचती है, चंद सेकंड के भीतर उतरने और चढ़ने वालों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो जाती है। सीट मिलना तो दूर, कई यात्रियों के लिए ट्रेन के अंदर घुस पाना ही बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे में हजारों लोग मजबूरी में ट्रेन के दरवाजे पर लटककर सफर करते हैं, जो हर पल हादसे का खतरा बढ़ा देता है।

मुंबई में नौकरी करने वाले लाखों लोगों की जिंदगी लोकल ट्रेनों पर निर्भर है। समय पर ऑफिस पहुंचने और घर लौटने के लिए उनके पास दूसरा कोई व्यावहारिक विकल्प नहीं होता। यही वजह है कि भीड़ चाहे कितनी भी हो, लोग जोखिम उठाकर सफर करने को मजबूर हैं। कई यात्रियों का कहना है कि अगर एक ट्रेन छूट जाए तो अगली ट्रेन भी उतनी ही भरी होती है, इसलिए जान जोखिम में डालकर भी ट्रेन पकड़नी पड़ती है।

2025 में 2,287 यात्रियों की मौत, हर दिन छह से ज्यादा लोगों ने गंवाई जान

सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में मुंबई उपनगरीय रेल नेटवर्क पर 2,287 यात्रियों की मौत हुई, जबकि 2,554 लोग घायल हुए। यानी औसतन हर दिन छह से अधिक लोगों की जान मुंबई लोकल नेटवर्क पर चली गई। इन हादसों में चलती ट्रेन से गिरना, रेलवे ट्रैक पार करते समय दुर्घटना होना और अन्य रेल हादसे प्रमुख कारण रहे।

हालांकि वर्ष 2024 में 2,468 मौतें और 2,697 घायल दर्ज किए गए थे। इसके मुकाबले 2025 में मौतों और घायलों की संख्या में कुछ कमी आई है, लेकिन आंकड़े अब भी बेहद चिंताजनक हैं। यह स्थिति बताती है कि सुरक्षा उपायों के बावजूद मुंबई लोकल में सफर अब भी जोखिम से भरा हुआ है।

रोजाना 70 लाख से अधिक लोग करते हैं सफर

मुंबई लोकल को देश का सबसे व्यस्त उपनगरीय रेल नेटवर्क माना जाता है। पश्चिमी, मध्य और हार्बर लाइन पर रोजाना 70 लाख से अधिक यात्री सफर करते हैं। ऑफिस जाने वाले कर्मचारी, छात्र, छोटे व्यापारी और मजदूर—हर वर्ग के लोगों के लिए यह सेवा जीवनरेखा है।

लेकिन यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ने के बावजूद कई रूटों पर भीड़ कम नहीं हो पा रही है। पीक आवर्स में ट्रेनों की क्षमता से कई गुना अधिक यात्री सफर करते हैं, जिससे हादसों का खतरा और बढ़ जाता है।

दरवाजे पर लटककर सफर करना बन गया मजबूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि मुंबई लोकल में सबसे बड़ा खतरा ओवरक्राउडिंग है। भीड़ के कारण हजारों यात्री दरवाजे पर खड़े होकर या लटककर सफर करते हैं। तेज रफ्तार, अचानक झटका लगना या संतुलन बिगड़ना कई बार जानलेवा साबित होता है। वहीं, समय बचाने के लिए ट्रैक पार करने की कोशिश भी बड़ी संख्या में दुर्घटनाओं की वजह बनती है।

यात्रियों की मांग- बढ़ें ट्रेनें और मजबूत हो सुरक्षा व्यवस्था

यात्री लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि पीक आवर्स में लोकल ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जाए, आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम लागू हो, भीड़ नियंत्रण के लिए बेहतर व्यवस्था की जाए और प्लेटफॉर्म व ट्रेनों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाए। उनका कहना है कि जब तक क्षमता के अनुरूप सेवाओं का विस्तार नहीं होगा, तब तक हादसों पर पूरी तरह रोक लगाना मुश्किल रहेगा।

हर दिन घर लौटने की चिंता

मुंबई लोकल में सफर करने वाले कई यात्रियों का कहना है कि घर से निकलते समय परिवार के लोग हमेशा यही कहते हैं—“सावधानी से जाना और सुरक्षित वापस आना।” यह सिर्फ एक सलाह नहीं, बल्कि उस डर की कहानी है जिसे हर दिन लाखों परिवार महसूस करते हैं।

मुंबई लोकल आज भी शहर की रफ्तार बनाए हुए है, लेकिन बढ़ती भीड़ और लगातार हो रहे हादसे यह सवाल खड़ा कर रहे हैं कि आखिर इस लाइफलाइन को कब पूरी तरह सुरक्षित बनाया जा सकेगा। लाखों यात्रियों की जिंदगी अब बेहतर बुनियादी ढांचे, आधुनिक सुरक्षा उपायों और प्रभावी प्रबंधन का इंतजार कर रही है।

Related Articles

Back to top button