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government project security-उद्घाटन के 12 दिन बाद ही पानी की टंकी में चोरी, सुरक्षा पर सवाल

जनपद कानपुर देहात के डेरापुर थाना क्षेत्र से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां करोड़ों रुपये की लागत से बनी पानी की टंकी उद्घाटन के महज 12 दिन बाद ही चोरों के निशाने पर आ गई। इस वारदात ने न सिर्फ स्थानीय प्रशासन बल्कि सरकारी योजनाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

डेरापुर थाना क्षेत्र के अगवासी गांव में करीब 4.12 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित पानी की टंकी का हाल ही में राज्यमंत्री अजीत पाल द्वारा भव्य उद्घाटन किया गया था। यह परियोजना गांव में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार की गई थी, लेकिन उद्घाटन के कुछ ही दिनों के भीतर यह टंकी बदमाशों के निशाने पर आ गई।

बताया जा रहा है कि देर रात कुछ अज्ञात बदमाश पानी की टंकी परिसर में घुस आए। उस समय वहां तैनात चौकीदार सो रहा था। बदमाशों ने चौकीदार को तमंचे के बल पर बंधक बना लिया और उसे जान से मारने की धमकी दी। डर के साए में चौकीदार कुछ भी करने में असमर्थ रहा, जिसका फायदा उठाकर बदमाशों ने वहां से इनवर्टर, बैटरी और चौकीदार का मोबाइल फोन लूट लिया।

घटना को अंजाम देने के बाद बदमाश मौके से फरार हो गए। किसी तरह खुद को सुरक्षित करने के बाद चौकीदार ने गांव के एक युवक का मोबाइल लेकर डायल 112 पर पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी।

इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों में आक्रोश भी देखने को मिल रहा है, क्योंकि करोड़ों की लागत से बनी सरकारी संपत्ति की सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नई-नई परियोजनाएं भी सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

वहीं, डेरापुर थाना प्रभारी धीरेन्द्र सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और जल्द ही मुकदमा पंजीकृत कर आरोपियों की तलाश शुरू की जाएगी। पुलिस आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है और संदिग्धों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है।

यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है—क्या सरकारी योजनाओं पर करोड़ों खर्च करने के बाद उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाती? क्या जिम्मेदार विभाग अपनी जवाबदेही निभा रहे हैं? उद्घाटन के महज 12 दिन के भीतर इस तरह की घटना होना लापरवाही का बड़ा उदाहरण है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या ठोस कार्रवाई करता है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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