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India government policy-छोटे व्यापारियों की मांग: 5 किलो कमर्शियल गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने की उठी आवाज

अलीगढ़ से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां कमर्शियल गैस की किल्लत ने छोटे व्यापारियों और उद्यमियों की परेशानी बढ़ा दी है। सासनी गेट औद्योगिक वेलफेयर संस्थान ने सरकार से 5 किलो के छोटे कमर्शियल गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने की मांग उठाई है, ताकि छोटे स्तर के कारोबारियों को राहत मिल सके।

अलीगढ़ के सासनी गेट क्षेत्र में स्थित औद्योगिक वेलफेयर संस्थान (रजि.) ने बाजार में लगातार बढ़ रही कमर्शियल गैस की कमी को लेकर गंभीर चिंता जताई है। संस्थान के पदाधिकारियों का कहना है कि गैस की अनुपलब्धता के कारण छोटे उद्योग-धंधों पर गहरा असर पड़ रहा है, जिससे उत्पादन कार्य प्रभावित हो रहा है और व्यापारियों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।

संस्थान द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि वर्तमान समय में कमर्शियल गैस सिलेंडर की पर्याप्त आपूर्ति न होने से कास्टिंग कार्य, लैकर की भट्टियों और अन्य छोटे ग्राम-उद्योगों का संचालन बाधित हो रहा है। कई छोटे उद्यमी ऐसे हैं जिनका पूरा व्यवसाय गैस पर निर्भर है, और गैस न मिलने के कारण उनका काम लगभग ठप होने की स्थिति में पहुंच गया है।

संस्थान के अध्यक्ष राजेश सरकोडा ने कहा कि सरकार को इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि छोटे दुकानदारों और उद्यमियों के लिए 5 किलोग्राम के कमर्शियल गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएं, जिससे वे अपनी जरूरत के अनुसार गैस का उपयोग कर सकें और अनावश्यक आर्थिक बोझ से बच सकें।

महासचिव कौशल गौड़ और वरिष्ठ उपाध्यक्ष नवीन भूमिक ने संयुक्त रूप से कहा कि पहले की तरह बाजार में कमर्शियल गैस की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि व्यापारिक गतिविधियां सामान्य हो सकें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो छोटे उद्योगों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

इस दौरान आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोषाध्यक्ष नितिन अग्रवाल और मनोज काका भी मौजूद रहे। सभी पदाधिकारियों ने एक स्वर में सरकार से मांग की कि छोटे स्तर के कारोबारियों को ध्यान में रखते हुए नीतिगत निर्णय लिए जाएं और गैस आपूर्ति को सुचारू बनाया जाए।

व्यापारियों का मानना है कि 5 किलो के छोटे कमर्शियल गैस सिलेंडर न केवल उनकी जरूरतों को पूरा करेंगे, बल्कि इससे गैस की बचत भी होगी और छोटे उद्यमों को नई ऊर्जा मिलेगी। अब देखना यह होगा कि सरकार इस मांग पर कितना जल्दी और कितना प्रभावी कदम उठाती है।

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