उत्तर प्रदेश के जनपद जालौन से एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया है, जिसने आम जनता की सेहत और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि जिले में नकली और मिलावटी दूध का एक बड़ा और संगठित नेटवर्क सक्रिय है, जो शुद्धता और भरोसे के नाम पर लोगों की सेहत से खुलेआम खिलवाड़ कर रहा है। यह मिलावटखोरी न सिर्फ कानून का उल्लंघन है, बल्कि आम लोगों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है।
मामला कुठौंद थाना क्षेत्र स्थित मधुसदन डेरी से जुड़ा बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, दूध के टैंकरों में रास्ते में ही मिलावट की जा रही थी, ताकि मुनाफा बढ़ाया जा सके। आरोप है कि औरैया मार्ग पर स्थित कन्हैया होटल की कथित सह पर यह पूरा खेल लंबे समय से चल रहा था। शुद्ध दूध को केमिकल और अन्य जहरीले पदार्थों से मिलाकर बाजार में सप्लाई किया जा रहा था, जिससे लोगों की सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि डेरी संचालकों के बीच आपसी मिलीभगत के चलते यह मिलावटखोरी बेरोकटोक चल रही थी। दूध की सप्लाई रोजमर्रा की जरूरत होने के कारण आम लोग मजबूरी में वही दूध इस्तेमाल कर रहे थे, जिससे अनजाने में वे और उनके बच्चे धीमे जहर का सेवन कर रहे थे। यही वजह है कि क्षेत्र में पेट से जुड़ी बीमारियों और बच्चों के बीमार पड़ने की शिकायतें भी लगातार बढ़ रही हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इतनी गंभीर शिकायतों और चर्चाओं के बावजूद अब तक जिम्मेदार विभागों द्वारा कोई ठोस और सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की गई। क्या इस पूरे मिलावट के खेल को किसी प्रभावशाली व्यक्ति या तंत्र का संरक्षण प्राप्त है? स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है और प्रशासन की चुप्पी पर लगातार उंगलियां उठ रही हैं।
इस मिलावटखोरी से सबसे ज्यादा खतरा बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों की सेहत पर मंडरा रहा है। दूध जैसे आवश्यक खाद्य पदार्थ में मिलावट होने से जनपद की साख पर भी गहरा दाग लग रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस मामले में कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मिलावट का जाल और अधिक फैल सकता है, जिससे हालात बेकाबू हो सकते हैं।
फिलहाल इस पूरे मामले पर खाद्य सुरक्षा विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। अब सबकी नजरें इसी बात पर टिकी हैं कि क्या विभाग जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाएगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
जनता की मांग है कि मिलावटखोरी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई हो, डेरी और टैंकरों की जांच कर दोषियों को जेल भेजा जाए, ताकि भविष्य में कोई भी लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने की हिम्मत न कर सके। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग कब जागता है और कानून का शिकंजा कब और कैसे कसता है।
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