
रायबरेली। बछरावां कस्बे के लखनऊ-प्रयागराज हाईवे पर स्थित आर.के. चौधरी हॉस्पिटल एक बार फिर विवादों के घेरे में है। गुरुवार को नॉर्मल डिलीवरी के बाद एक महिला की हालत बिगड़ने पर उसे लखनऊ रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में मोहनलालगंज के संजीवनी हॉस्पिटल पहुँचते ही उसकी मौत हो गई। वहीं नवजात शिशु का इलाज जारी है।
महज 15 दिन के भीतर हॉस्पिटल में यह दूसरी मौत है। इससे पहले 15 अगस्त को भी कथित तौर पर गलत ऑपरेशन के कारण एक महिला की जान चली गई थी। उस समय मृतका के परिजनों ने हॉस्पिटल के सामने शव रखकर जमकर हंगामा किया था। अब एक और महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने स्थानीय लोगों और पीड़ित परिवार को आक्रोशित कर दिया है।
परिजनों का आरोप
मृतका के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और जिम्मेदार डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अस्पताल ऊँची राजनीतिक और प्रशासनिक पकड़ के चलते अब तक सुरक्षित है और उस पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती। परिवार का आरोप है कि लापरवाह इलाज और सही समय पर सुविधाएं न मिलने की वजह से महिला की मौत हुई।
परिजनों ने रायबरेली के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि सीएमओ की लापरवाह कार्यशैली के कारण जिले में ऐसे अस्पताल बिना किसी सख्त कार्रवाई के खुलेआम काम कर रहे हैं।
संतोष कुमार, मृतका के परिजन ने कहा—
“यह कोई पहली घटना नहीं है। 15 दिन पहले भी इसी अस्पताल में गलत ऑपरेशन से एक महिला की जान गई थी। लेकिन तब भी कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया। अगर कार्रवाई होती तो शायद आज हमारी बहन की जान बच जाती।”
वहीं स्थानीय महिला रेखा ने कहा—
“इस अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ हो रहा है। प्रशासन को तुरंत जांच कर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।”
स्थानीय लोगों का आक्रोश
लगातार हो रही घटनाओं से क्षेत्रीय लोगों में आक्रोश है। कस्बे के लोगों का कहना है कि निजी अस्पताल अक्सर बिना पर्याप्त सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों के इलाज शुरू कर देते हैं, जिससे मरीजों की जान पर बन आती है। उनका आरोप है कि प्रशासनिक उदासीनता के चलते ऐसे अस्पतालों के हौसले बुलंद हैं।
प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
आर.के. चौधरी हॉस्पिटल पर लगातार हो रहे विवादों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। सवाल यह उठता है कि आखिर प्रशासन कब तक ऐसी घटनाओं को नजरअंदाज करता रहेगा। पीड़ित परिवारों और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि जिले में चल रहे सभी निजी अस्पतालों की जाँच की जाए और नियमों का पालन न करने वाले संस्थानों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
निष्कर्ष
महज 15 दिनों में एक ही अस्पताल में दो महिलाओं की मौत ने स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर स्थिति और जिम्मेदार अफसरों की लापरवाही को उजागर कर दिया है। लोगों का कहना है कि जब तक प्रशासन ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक ऐसे हादसे रुकने वाले नहीं हैं।




