
देहरादून: उत्तराखंड में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक बारिश और ठंडी हवाओं का असर दिखाई दे रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को राज्य के पांच जिलों नैनीताल, चंपावत, पिथौरागढ़, बागेश्वर और चमोली के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में गरज-चमक, आकाशीय बिजली, ओलावृष्टि और तेज हवाओं के साथ बारिश होने की आशंका जताई गई है।
मौसम विभाग के अनुसार कुछ इलाकों में हवाओं की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। पिथौरागढ़, बागेश्वर, नैनीताल और चंपावत के कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। वहीं चमोली सहित अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में भी गरज-चमक और मौसम खराब रहने की आशंका है। ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी का दौर भी जारी रह सकता है।
इन पांच जिलों में सबसे ज्यादा खतरा
मौसम विभाग ने जिन पांच जिलों को ऑरेंज अलर्ट पर रखा है, वहां लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
- नैनीताल: बारिश, तेज हवाओं और ओलावृष्टि की आशंका।
- चंपावत: गरज-चमक के साथ भारी बारिश संभव।
- पिथौरागढ़: कुछ इलाकों में भारी बारिश और बिजली गिरने का खतरा।
- बागेश्वर: तेज हवाओं और खराब मौसम की चेतावनी।
- चमोली: पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश, ओलावृष्टि और बर्फबारी की संभावना।
ऑरेंज अलर्ट का मतलब है कि मौसम की स्थिति गंभीर हो सकती है और इसका असर सामान्य जनजीवन, यातायात तथा बिजली आपूर्ति पर पड़ सकता है।
केदारनाथ और गंगोत्री में बर्फबारी, बढ़ी ठंड

राज्य के ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम का असर पहले से दिखाई देने लगा है। केदारनाथ और गंगोत्री में बर्फबारी हुई है, जबकि निचले क्षेत्रों में बारिश के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। केदारनाथ में तापमान शून्य से नीचे पहुंचने की खबर है। ऊंचाई वाले रास्तों पर बर्फ और पाले के कारण आवाजाही भी प्रभावित हो सकती है।
चारधाम यात्रियों और पर्यटकों के लिए चेतावनी
खराब मौसम को देखते हुए प्रशासन ने चारधाम यात्रा मार्गों पर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। केदारनाथ जाने वाले श्रद्धालुओं को गर्म कपड़े पहनने, मौसम की जानकारी लेते रहने और अनावश्यक रूप से खुले स्थानों पर रुकने से बचने की सलाह दी गई है। मौसम बिगड़ने पर यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोकने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को किया अलर्ट
मौसम विभाग की चेतावनी के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शासन और जिला प्रशासन के अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। आपदा प्रबंधन से जुड़ी तैयारियां पूरी रखने, संवेदनशील इलाकों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर यातायात नियंत्रित करने को कहा गया है।
भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने और सड़क बंद होने की स्थिति में तुरंत रास्ता खुलवाने के निर्देश भी दिए गए हैं। ट्रेकिंग गतिविधियों को मौसम सामान्य होने तक नियंत्रित रखने की बात कही गई है।

लोगों के लिए जरूरी सावधानियां
- खराब मौसम में गैर-जरूरी यात्रा से बचें।
- नदी, नालों और जलधाराओं के किनारे न जाएं।
- पहाड़ी रास्तों पर सफर से पहले मौसम और सड़क की स्थिति जांचें।
- आकाशीय बिजली के दौरान खुले मैदान और पेड़ों के नीचे खड़े न हों।
- चारधाम यात्रियों और पर्यटकों को प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करना चाहिए।
मौसम विभाग के अनुसार 31 अक्टूबर से 5 नवंबर तक राज्य के लिए कोई व्यापक चेतावनी दर्ज नहीं है, हालांकि स्थानीय स्तर पर मौसम बदल सकता है। इसलिए पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों को ताजा अपडेट लेते रहना चाहिए।




