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US Visa Rules : अमेरिका ने विदेशी छात्रों के लिए बदला वीजा नियम, भारतीय विद्यार्थियों की बढ़ी चिंता और मुश्किलें

ट्रंप प्रशासन का बड़ा फैसला! विदेशी छात्रों के लिए बदला अमेरिका का वीजा सिस्टम, 3.3 लाख से ज्यादा भारतीयों पर पड़ सकता है असर

अमेरिका में पढ़ाई का सपना देखने वाले लाखों विदेशी छात्रों के लिए एक बड़ा बदलाव सामने आया है। अमेरिकी प्रशासन ने छात्र वीजा से जुड़े नियमों में अहम संशोधन करते हुए दशकों से लागू ‘ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस (Duration of Status – D/S)’ व्यवस्था को समाप्त करने का फैसला किया है। नए नियम के लागू होने के बाद अब F-1 वीजा पर अमेरिका आने वाले अधिकांश विदेशी छात्र अधिकतम चार साल तक ही अमेरिका में रह सकेंगे। यदि किसी छात्र का कोर्स चार साल से अधिक अवधि का है, तो उसे तय समय सीमा समाप्त होने से पहले अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (Department of Homeland Security) से विशेष अनुमति लेकर अपने वीजा की अवधि बढ़ानी होगी।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका दुनिया भर के छात्रों, खासकर भारत, चीन और अन्य एशियाई देशों के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। नए नियम का सबसे ज्यादा असर भारत पर पड़ सकता है, क्योंकि वर्तमान में अमेरिका के विभिन्न विश्वविद्यालयों में 3.3 लाख से अधिक भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे हैं।

क्या था पुराना ‘ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस’ सिस्टम?

अब तक अमेरिका में पढ़ने आने वाले विदेशी छात्रों को ‘ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस (D/S)’ के तहत रहने की अनुमति मिलती थी। इसका मतलब यह था कि छात्र अपने पूरे शैक्षणिक कार्यक्रम के दौरान अमेरिका में रह सकते थे। यदि उनकी पढ़ाई की अवधि बढ़ जाती थी या वे मास्टर्स के बाद पीएचडी या अन्य उच्च शिक्षा में प्रवेश लेते थे, तो उन्हें अलग से हर चार साल बाद रहने की अनुमति नहीं लेनी पड़ती थी। जब तक वे अपने संस्थान में वैध छात्र बने रहते थे, उनका कानूनी दर्जा सुरक्षित रहता था।

नए नियम के लागू होने के बाद यह व्यवस्था समाप्त हो जाएगी और छात्रों को निर्धारित समय सीमा के भीतर ही अपनी पढ़ाई पूरी करनी होगी या फिर समय रहते एक्सटेंशन के लिए आवेदन करना होगा।

क्या है नया नियम?

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग द्वारा जारी अंतिम नियम के तहत अधिकांश विदेशी छात्रों को अमेरिका में रहने के लिए अधिकतम चार साल की अवधि दी जाएगी। यदि किसी छात्र का कोर्स इससे लंबा है या किसी कारणवश उसकी पढ़ाई समय पर पूरी नहीं हो पाती है, तो उसे निर्धारित अवधि समाप्त होने से पहले एक्सटेंशन के लिए आवेदन करना होगा। बिना मंजूरी के निर्धारित समय से अधिक रुकने पर छात्र का कानूनी दर्जा प्रभावित हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम में निगरानी बढ़ेगी और सरकार विदेशी छात्रों के रिकॉर्ड पर अधिक नियंत्रण रख सकेगी।

भारतीय छात्रों पर सबसे ज्यादा असर क्यों?

भारत लगातार अमेरिका में सबसे अधिक अंतरराष्ट्रीय छात्रों को भेजने वाले देशों में शामिल रहा है। वर्तमान में करीब 3.3 लाख भारतीय छात्र अमेरिकी विश्वविद्यालयों में इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, बिजनेस मैनेजमेंट, मेडिकल, रिसर्च और अन्य पेशेवर पाठ्यक्रमों की पढ़ाई कर रहे हैं।

कई कोर्स, विशेष रूप से रिसर्च आधारित प्रोग्राम, पीएचडी और कुछ संयुक्त डिग्री कार्यक्रम चार साल से अधिक समय लेते हैं। ऐसे में इन छात्रों को अब अतिरिक्त प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है। यदि समय रहते एक्सटेंशन नहीं मिला तो उनकी पढ़ाई और भविष्य की योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।

किन छात्रों को होगी ज्यादा परेशानी?

सबसे अधिक चुनौती उन छात्रों के सामने आ सकती है जो पीएचडी, रिसर्च आधारित कार्यक्रम, मेडिकल शिक्षा या लंबे अवधि वाले प्रोफेशनल कोर्स कर रहे हैं। इसके अलावा, जिन छात्रों की पढ़ाई किसी व्यक्तिगत, स्वास्थ्य या शोध संबंधी कारणों से लंबी हो जाती है, उन्हें समय रहते एक्सटेंशन लेना अनिवार्य होगा।

क्या होंगे नए नियम के संभावित प्रभाव?

विशेषज्ञों का मानना है कि नए नियम से विदेशी छात्रों पर दस्तावेज़ी प्रक्रिया और कानूनी औपचारिकताओं का बोझ बढ़ सकता है। छात्रों को अपने कोर्स की समयसीमा, वीजा अवधि और एक्सटेंशन प्रक्रिया पर पहले से अधिक ध्यान देना होगा। वहीं, विश्वविद्यालयों को भी अंतरराष्ट्रीय छात्रों को समय पर आवश्यक मार्गदर्शन और दस्तावेज़ उपलब्ध कराने होंगे।

हालांकि, यदि छात्र समय रहते सभी नियमों का पालन करते हैं और निर्धारित प्रक्रिया के तहत एक्सटेंशन प्राप्त कर लेते हैं, तो वे अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे। लेकिन नए नियम के कारण अमेरिका में उच्च शिक्षा की योजना बना रहे छात्रों को अब पहले से अधिक सतर्कता और योजना के साथ आगे बढ़ना होगा।

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