
प्रयागराज: सावन माह की शुरुआत से पहले उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित प्राचीन श्री मनकामेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए नए नियम लागू कर दिए गए हैं। मंदिर प्रशासन ने गर्भगृह में प्रवेश और पूजा-अर्चना के लिए ड्रेस कोड अनिवार्य कर दिया है। अब केवल भारतीय पारंपरिक वेशभूषा में आने वाले श्रद्धालुओं को ही गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति मिलेगी।

मंदिर प्रशासन के इस फैसले का उद्देश्य मंदिर की गरिमा, धार्मिक मर्यादा और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं को बनाए रखना बताया गया है। सावन में बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था पहले ही लागू कर दी गई है।
गर्भगृह में पूजा के लिए पारंपरिक पहनावा जरूरी
मंदिर प्रशासन के अनुसार, गर्भगृह में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा करने के लिए श्रद्धालुओं को भारतीय पारंपरिक वेशभूषा पहनकर ही आना होगा।
नए नियमों के तहत जींस, टी-शर्ट, रिप्ड जींस और हाफ पैंट पहनकर आने वाले श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति नहीं मिलेगी।
- पुरुष श्रद्धालुओं के लिए धोती-कुर्ता पहनना अनिवार्य किया गया है।
- महिला श्रद्धालुओं को साड़ी या सलवार-सूट जैसे पारंपरिक परिधान में ही पूजा-अर्चना करने की अनुमति होगी।
धार्मिक मर्यादा बनाए रखने की अपील
मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे नए नियमों का पालन करें और मंदिर की पवित्रता एवं धार्मिक परंपराओं का सम्मान बनाए रखें। प्रशासन का कहना है कि यह फैसला किसी पर प्रतिबंध लगाने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि मंदिर की आध्यात्मिक गरिमा को संरक्षित रखने के लिए लिया गया है।
सावन के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने पहले से ही इन नियमों की जानकारी सार्वजनिक कर दी है।
हर दिन सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहता है मंदिर
प्रयागराज के छावनी क्षेत्र स्थित श्री मनकामेश्वर मंदिर सप्ताह के सातों दिन श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है। यहां प्रतिदिन सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक दर्शन किए जा सकते हैं।
हालांकि, मंदिर में सालभर दर्शन किए जा सकते हैं, लेकिन अक्टूबर से मार्च के बीच का समय यहां आने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान प्रयागराज का मौसम सुहावना रहता है, जिससे श्रद्धालु और पर्यटक आराम से दर्शन कर सकते हैं।
सावन से पहले लागू किए गए इस नए ड्रेस कोड की चर्चा पूरे प्रयागराज समेत आसपास के क्षेत्रों में हो रही है। मंदिर प्रशासन को उम्मीद है कि श्रद्धालु इस व्यवस्था का पालन करते हुए धार्मिक मर्यादाओं का सम्मान करेंगे।




