
नई दिल्ली/वॉशिंगटन: मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी संघर्ष के बीच शांति की दिशा में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर गठित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के प्रयासों को महत्वपूर्ण सफलता मिलने का दावा किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, गाजा में स्थायी युद्धविराम और शांति स्थापित करने के लिए तैयार किए गए प्रस्ताव पर हमास और कुछ अन्य फिलिस्तीनी सशस्त्र गुटों ने सैद्धांतिक रूप से हथियार छोड़ने की सहमति जताई है। वहीं प्रस्ताव के तहत इजरायल भी चरणबद्ध तरीके से गाजा से अपनी सैन्य मौजूदगी कम करने और सेना हटाने पर विचार करेगा।

यदि यह समझौता पूरी तरह लागू होता है तो अक्टूबर 2023 में शुरू हुए युद्ध के बाद यह अब तक की सबसे बड़ी शांति पहल मानी जाएगी। हालांकि, इस समझौते को लागू करने के लिए कई शर्तें और अंतरराष्ट्रीय निगरानी व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई है।
क्या है ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की योजना?
रिपोर्टों के अनुसार, ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का उद्देश्य गाजा में स्थायी युद्धविराम स्थापित करना, बंधकों की रिहाई सुनिश्चित करना, मानवीय सहायता की निर्बाध आपूर्ति बहाल करना और क्षेत्र में नई प्रशासनिक व्यवस्था तैयार करना है।
योजना के प्रमुख बिंदुओं में शामिल हैं—
- हमास और अन्य सशस्त्र गुटों द्वारा चरणबद्ध तरीके से हथियार छोड़ना।
- गाजा में सक्रिय सैन्य ढांचे को समाप्त करना।
- इजरायल द्वारा तय समयसीमा के भीतर अपनी सेना की चरणबद्ध वापसी।
- अंतरराष्ट्रीय निगरानी में सुरक्षा व्यवस्था लागू करना।
- गाजा के पुनर्निर्माण के लिए बहुपक्षीय सहायता कार्यक्रम शुरू करना।
- नागरिकों तक भोजन, दवाइयों और आवश्यक राहत सामग्री की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना।
हमास ने क्या कहा?
रिपोर्टों के मुताबिक, हमास ने संकेत दिया है कि यदि प्रस्ताव की सभी शर्तों का निष्पक्ष तरीके से पालन किया जाता है और गाजा में स्थायी युद्धविराम लागू होता है, तो वह हथियार छोड़ने की प्रक्रिया में शामिल हो सकता है। हालांकि संगठन की ओर से अंतिम और औपचारिक घोषणा संबंधित वार्ताओं के पूरा होने के बाद ही की जाएगी।
विश्लेषकों का मानना है कि यह रुख पहले की तुलना में बड़ा बदलाव माना जा सकता है, लेकिन इसकी सफलता सभी पक्षों के बीच अंतिम सहमति पर निर्भर करेगी।
इजरायल की क्या होगी भूमिका?
योजना के अनुसार, यदि सुरक्षा संबंधी सभी शर्तें पूरी होती हैं और गाजा से सशस्त्र गतिविधियां समाप्त होती हैं, तो इजरायल भी अपनी सेना की चरणबद्ध वापसी करेगा। इसके साथ ही सीमा सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय सहयोग से संचालित व्यवस्था को सौंपी जा सकती है।
हालांकि इजरायल की ओर से आधिकारिक तौर पर अंतिम निर्णय संबंधित सुरक्षा मूल्यांकन और समझौते के पूर्ण स्वरूप पर निर्भर बताया जा रहा है।
युद्ध से गाजा को हुआ भारी नुकसान
गाजा में लंबे समय से जारी संघर्ष के कारण बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है। हजारों लोगों की मौत और लाखों नागरिकों के विस्थापन के अलावा अस्पताल, स्कूल, सड़कें और अन्य बुनियादी ढांचे को भी भारी क्षति पहुंची है। संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने लगातार युद्धविराम और मानवीय सहायता बढ़ाने की अपील की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रस्ताव लागू होता है तो इससे न केवल हिंसा में कमी आएगी, बल्कि गाजा के पुनर्निर्माण और सामान्य जीवन की बहाली का रास्ता भी खुलेगा।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर
शांति प्रस्ताव पर अमेरिका, मिस्र, कतर और अन्य मध्यस्थ देशों की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है। कई देशों ने वार्ता को सकारात्मक कदम बताया है, लेकिन साथ ही यह भी कहा है कि समझौते का वास्तविक असर तभी दिखाई देगा, जब सभी पक्ष अपने-अपने वादों का पूरी तरह पालन करेंगे।
आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
हालांकि विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में इस शांति योजना को लेकर सकारात्मक दावे किए गए हैं, लेकिन समझौते की सभी शर्तों, समयसीमा और अंतिम स्वरूप पर अभी संबंधित पक्षों की विस्तृत आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। इसलिए हथियार छोड़ने, सेना हटाने और स्थायी शांति से जुड़े सभी कदम औपचारिक पुष्टि और लागू होने की प्रक्रिया के बाद ही प्रभावी माने जाएंगे।
यदि यह पहल सफल होती है, तो इसे हाल के वर्षों में मध्य पूर्व की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धियों में से एक माना जा सकता है, जिससे गाजा में शांति और स्थिरता की नई उम्मीद पैदा होगी।




