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सारा अली खान केदारनाथ में पूजा करने पर फंसीं, यूपी के मौलाना ने जारी किया फतवा; मांगी तौबा

सारा अली खान केदारनाथ पूजा विवाद पर मौलाना ने जारी किया फतवा

बॉलीवुड अभिनेत्री सारा अली खान एक बार फिर केदारनाथ धाम में दर्शन और पूजा-अर्चना को लेकर चर्चा में हैं। उत्तराखंड के प्रसिद्ध केदारनाथ मंदिर में पूजा करने के बाद अभिनेत्री को लेकर धार्मिक विवाद खड़ा हो गया है। उत्तर प्रदेश के बरेली के एक मौलाना ने उनके इस कदम पर आपत्ति जताते हुए फतवा जारी किया है। मौलाना ने सारा अली खान के मंदिर में पूजा-पाठ करने को इस्लामिक शरीयत के खिलाफ बताया और उन्हें अल्लाह से माफी मांगने यानी तौबा करने की सलाह दी है। इस बयान के सामने आने के बाद सोशल मीडिया से लेकर मनोरंजन जगत तक इस मामले पर बहस शुरू हो गई है।

केदारनाथ में दर्शन करने पहुंची थीं सारा अली खान

अभिनेत्री सारा अली खान 25 अक्टूबर 2026 को उत्तराखंड स्थित केदारनाथ धाम पहुंची थीं। यहां उन्होंने भगवान शिव के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। सामने आई तस्वीरों में अभिनेत्री मंदिर परिसर में हाथ जोड़कर प्रार्थना करती नजर आईं। बताया जा रहा है कि उन्होंने मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतार में भी इंतजार किया।

सारा अली खान का केदारनाथ से पुराना जुड़ाव रहा है। वह पिछले कुछ वर्षों से लगातार इस धार्मिक स्थल पर जाती रही हैं। अभिनेत्री कई बार सोशल मीडिया पर अपनी केदारनाथ यात्रा की तस्वीरें भी साझा कर चुकी हैं। उनके लिए यह स्थान सिर्फ धार्मिक पर्यटन का केंद्र नहीं, बल्कि उनकी पहली फिल्म से भी जुड़ा हुआ है।

साल 2018 में सारा ने अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के साथ फिल्म ‘केदारनाथ’ से बॉलीवुड में कदम रखा था। फिल्म की कहानी भी केदारनाथ की पृष्ठभूमि पर आधारित थी।

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने क्या कहा?

सारा अली खान की केदारनाथ यात्रा पर आपत्ति जताने वाले मौलाना का नाम मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी है। वह ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उन्होंने एक वीडियो बयान जारी कर अभिनेत्री के मंदिर जाने और पूजा करने पर अपनी धार्मिक राय रखी।

मौलाना के मुताबिक, इस्लामिक शरीयत किसी भी मुस्लिम पुरुष या महिला को दूसरे धर्म की धार्मिक पूजा-पद्धतियों में शामिल होने की अनुमति नहीं देती। उन्होंने कहा कि मंदिर में पूजा-पाठ करना शरीयत की नजर में नाजायज और हराम है।

उन्होंने सारा अली खान को इस मामले में गुनहगार बताते हुए तौबा करने और अल्लाह की बारगाह में माफी मांगने की बात कही। मौलाना ने यह भी कहा कि कई मुस्लिम युवाओं ने उनसे अभिनेत्री के केदारनाथ जाने और वहां पूजा करने को लेकर सवाल पूछे थे। उन्हीं सवालों के जवाब में उन्होंने अपना धार्मिक पक्ष रखा।

दूसरे धर्मगुरु ने फतवे पर उठाए सवाल

इस विवाद के बीच ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने इस तरह के फतवे पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि किसी अभिनेत्री को मंदिर जाने या किसी धार्मिक स्थल पर पहुंचने के लिए निशाना बनाना उचित नहीं है।

उनका मानना है कि भारत में प्रत्येक व्यक्ति को अपनी आस्था और पूजा-पद्धति चुनने की स्वतंत्रता है। उन्होंने धार्मिक मामलों में अनावश्यक फतवे जारी करने की परंपरा की भी आलोचना की।

वहीं, जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने भी सारा अली खान का समर्थन किया है। उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता और भारतीय संविधान में दिए गए अधिकारों का हवाला देते हुए अभिनेत्री के मंदिर जाने का बचाव किया।

मंदिर समिति के नियमों की भी चर्चा

सारा की यात्रा के बाद बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के नियम भी चर्चा में आ गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, गैर-हिंदू श्रद्धालुओं को मंदिर में पूजा-अर्चना करने के लिए निर्धारित शपथ-पत्र जमा करना अनिवार्य है। समिति के सीईओ सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि सारा की टीम ने यात्रा से पहले आवश्यक शपथ-पत्र जमा किया था।

क्या सारा अली खान देंगी जवाब?

फिलहाल इस पूरे विवाद पर सारा अली खान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, उनके केदारनाथ दौरे को लेकर अलग-अलग धार्मिक और सामाजिक विचार सामने आ रहे हैं।

अब देखना होगा कि अभिनेत्री इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ती हैं या नहीं। फिलहाल एक धार्मिक यात्रा से शुरू हुआ यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता, व्यक्तिगत आस्था और अभिव्यक्ति के अधिकार को लेकर नई बहस का विषय बन गया है।

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