बॉलीवुड अभिनेता रितेश देशमुख का बहुप्रतीक्षित ड्रीम प्रोजेक्ट ‘राजा शिवाजी’ रिलीज से पहले ही सुर्खियों में आ गया है। छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन, संघर्ष और स्वराज की स्थापना पर आधारित इस ऐतिहासिक फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने U/A सर्टिफिकेट के साथ मंजूरी दे दी है, लेकिन इसके साथ कई अहम बदलावों के निर्देश भी जारी किए गए हैं। फिल्म का विशाल रनटाइम, सेंसर बोर्ड की आपत्तियां और स्टारकास्ट—इन तीनों वजहों से यह फिल्म चर्चा का केंद्र बन गई है।

1 मई 2026 को रिलीज होने जा रही ‘राजा शिवाजी’ को सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक भव्य सिनेमाई परियोजना माना जा रहा है। लंबे समय से इस फिल्म पर काम चल रहा था और रितेश देशमुख इसे अपना सबसे बड़ा सपना बताते रहे हैं। अब जब फिल्म रिलीज के करीब है, तो इसकी हर जानकारी दर्शकों के बीच उत्सुकता बढ़ा रही है।
सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात फिल्म का रनटाइम है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘राजा शिवाजी’ का मराठी वर्जन 195 मिनट 5 सेकंड, यानी लगभग 3 घंटे 15 मिनट लंबा है। मौजूदा दौर में जहां अधिकतर फिल्में 2 से ढाई घंटे के बीच सीमित रहती हैं, वहीं इतनी लंबी अवधि की फिल्म अपने आप में बड़ा जोखिम और साहसिक फैसला माना जा रहा है। इसी के साथ यह फिल्म ‘एनिमल’, ‘पुष्पा 2’ जैसी लंबी फिल्मों की सूची में शामिल हो गई है।
फिल्म के निर्माताओं का मानना है कि छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन इतना व्यापक, प्रेरणादायक और घटनाओं से भरा हुआ था कि उसे छोटे प्रारूप में दिखाना संभव नहीं था। शिवाजी महाराज के बचपन, युद्धनीति, कूटनीति, मराठा साम्राज्य की नींव, मुगलों से संघर्ष और स्वराज के सपने को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के लिए लंबे रनटाइम की आवश्यकता थी।
हालांकि, फिल्म को मंजूरी देते हुए सेंसर बोर्ड ने कुछ महत्वपूर्ण दृश्यों और तकनीकी पहलुओं पर आपत्ति जताई। जानकारी के अनुसार, बोर्ड ने फिल्म के दो प्रमुख दृश्यों में बदलाव के निर्देश दिए हैं। पहला दृश्य एक छोटे बच्चे का गला काटने से जुड़ा बताया गया है। बोर्ड ने इस दृश्य को अत्यधिक संवेदनशील और हिंसात्मक मानते हुए इसे संशोधित करने को कहा है।
दूसरा मुद्दा फिल्म के कुछ “म्यूट विजुअल्स” से जुड़ा था। ये ऐसे दृश्य बताए जा रहे हैं जिनमें दृश्य तो मौजूद थे, लेकिन ऑडियो या संवाद नहीं थे। सेंसर बोर्ड ने निर्माताओं से कहा कि इन दृश्यों में उचित ऑडियो, बैकग्राउंड साउंड या नैरेशन जोड़ा जाए, ताकि कहानी का प्रवाह स्पष्ट रहे और दर्शकों को भ्रम न हो।
इतिहास आधारित फिल्मों को लेकर सेंसर बोर्ड विशेष सतर्कता बरतता है, और ‘राजा शिवाजी’ के मामले में भी यही देखने को मिला। सीबीएफसी ने फिल्म निर्माताओं से उन ऐतिहासिक संदर्भों और स्रोतों की जानकारी मांगी है, जिनके आधार पर फिल्म की स्क्रिप्ट, संवाद और गीत तैयार किए गए हैं। बोर्ड चाहता है कि फिल्म में प्रस्तुत घटनाएं तथ्यों के करीब हों और इतिहास को गलत तरीके से पेश न किया जाए।
इसके अलावा बोर्ड ने निर्देश दिया है कि फिल्म में दिखाई गई प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं के साथ उनकी सटीक तारीखें और टेक्स्ट स्लेट्स जोड़ी जाएं। उदाहरण के तौर पर किसी युद्ध, संधि, राज्याभिषेक या बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के समय स्क्रीन पर वर्ष या तारीख स्पष्ट रूप से दिखाई जाए। इससे दर्शकों को घटनाक्रम समझने में आसानी होगी और फिल्म की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।
सीबीएफसी ने यह भी कहा है कि फिल्म की शुरुआत में दिखाया जाने वाला डिस्क्लेमर और अधिक स्पष्ट होना चाहिए। यदि आवश्यक हो तो वॉयसओवर के माध्यम से यह बताया जाए कि फिल्म ऐतिहासिक घटनाओं से प्रेरित है और इसमें सिनेमाई प्रस्तुति के लिए कुछ नाटकीय तत्व जोड़े गए हैं। यह कदम इसलिए अहम माना जा रहा है ताकि भविष्य में किसी विवाद की संभावना कम हो सके।
‘राजा शिवाजी’ की सबसे बड़ी ताकत इसकी स्टारकास्ट भी मानी जा रही है। फिल्म में रितेश देशमुख खुद मुख्य भूमिका निभा रहे हैं और वह छत्रपति शिवाजी महाराज के किरदार में नजर आएंगे। रितेश लंबे समय से इस भूमिका की तैयारी कर रहे थे। उनके लुक, बॉडी लैंग्वेज, संवाद शैली और तलवारबाजी को लेकर काफी मेहनत की गई है।
फिल्म की निर्माता उनकी पत्नी जेनेलिया देशमुख हैं, जो इस प्रोजेक्ट को बड़े स्तर पर तैयार कर रही हैं। बॉलीवुड और मराठी सिनेमा के कई बड़े नाम भी इस फिल्म का हिस्सा हैं। इनमें संजय दत्त, अभिषेक बच्चन, विद्या बालन और फरदीन खान जैसे सितारे शामिल हैं। माना जा रहा है कि सभी कलाकारों को कहानी के अहम ऐतिहासिक किरदारों में पेश किया जाएगा।
फिल्म इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि ‘राजा शिवाजी’ सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व की फिल्म साबित हो सकती है। पिछले कुछ वर्षों में दर्शकों के बीच पौराणिक और ऐतिहासिक फिल्मों की मांग बढ़ी है। ऐसे में यदि यह फिल्म कंटेंट, विजुअल्स और भावनात्मक प्रस्तुति में सफल रहती है, तो बॉक्स ऑफिस पर बड़ा असर डाल सकती है।
हालांकि, 3 घंटे 15 मिनट का रनटाइम मेकर्स के लिए चुनौती भी हो सकता है। लंबी फिल्मों के सामने अक्सर दर्शकों की एकाग्रता बनाए रखना बड़ा मुद्दा होता है। लेकिन यदि कहानी दमदार हो, स्क्रीनप्ले मजबूत हो और भावनात्मक जुड़ाव बना रहे, तो लंबी अवधि भी दर्शकों को बांधे रख सकती है। ‘एनिमल’ और ‘पुष्पा 2’ जैसी फिल्मों ने यह साबित किया है कि अगर कंटेंट प्रभावशाली हो, तो रनटाइम बाधा नहीं बनता।
रितेश देशमुख के करियर के लिहाज से भी यह फिल्म बेहद अहम मानी जा रही है। अब तक उन्हें अधिकतर कॉमेडी, ड्रामा और सपोर्टिंग रोल्स में देखा गया है, लेकिन ‘राजा शिवाजी’ उनके लिए एक अलग और गंभीर पहचान बनाने का मौका है। यह फिल्म बतौर अभिनेता और निर्माता उनके करियर की दिशा बदल सकती है।
सोशल मीडिया पर भी फिल्म को लेकर जबरदस्त चर्चा है। कुछ लोग रनटाइम को लेकर उत्साहित हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि इतने बड़े व्यक्तित्व की कहानी विस्तार से दिखाई जाएगी। वहीं कुछ लोग यह देखने के लिए उत्सुक हैं कि सेंसर बोर्ड द्वारा सुझाए गए बदलावों के बाद अंतिम कट कैसा होगा।
अब सभी की नजर 1 मई 2026 पर टिकी है, जब ‘राजा शिवाजी’ सिनेमाघरों में रिलीज होगी। यह फिल्म सिर्फ एक स्टारकास्ट वाली बड़ी रिलीज नहीं, बल्कि इतिहास, भावना, राष्ट्रगौरव और भव्य सिनेमाई प्रस्तुति का संगम मानी जा रही है। यदि फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर खरी उतरती है, तो यह आने वाले वर्षों की सबसे चर्चित ऐतिहासिक फिल्मों में शामिल हो सकती है।
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