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Nepal Violence : नेपाल हिंसा के बीच सरकार और मृतकों के परिवारों में सात सूत्रीय समझौता, मदरसे की जांच होगी

नेपाल में हिंसा के बीच बड़ा समझौता, मृतकों के परिवारों से सरकार की 7 सूत्रीय डील; मदरसे की कानूनी स्थिति की होगी जांच

काठमांडू: नेपाल के सुनसरी जिले में हालिया हिंसा और पुलिस फायरिंग में दो युवकों की मौत के बाद अब सरकार और मृतकों के परिवारों के बीच सात सूत्रीय समझौता हुआ है। गुरुवार देर रात हुए इस समझौते के बाद दोनों परिवारों को राहत, सरकारी रोजगार और मृतकों को शहीद घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करने समेत कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। इसके साथ ही देवानगंज गाउंपालिका क्षेत्र में स्थित एक मदरसे की कानूनी स्थिति की तत्काल जांच कराने पर भी सहमति बनी है।

सुनसरी के कप्तानगंज इलाके में पुलिस फायरिंग के दौरान ओमप्रकाश मेहता और जयप्रकाश मेहता की मौत हुई थी। दोनों की मौत के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया था। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को कड़े कदम उठाने पड़े। अब सरकार और दोनों मृतकों के परिजनों के बीच हुए समझौते को इलाके में शांति बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

गृह मंत्री और मृतकों के परिवारों के बीच हुआ समझौता

यह सात सूत्रीय समझौता गुरुवार देर रात नेपाल सरकार की ओर से गृह मंत्री सुदन गुरुङ और दोनों मृतकों के परिजनों के बीच हुआ। देवानगंज गाउंपालिका के अध्यक्ष बेचन प्रसाद मेहता के अनुसार, समझौते पर गृह मंत्री सुदन गुरुङ के अलावा ओमप्रकाश मेहता के पिता कृष्णदेव मेहता और जयप्रकाश मेहता के पिता नरेश मेहता ने हस्ताक्षर किए।

समझौते के बाद सरकार ने दोनों परिवारों की प्रमुख मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इसमें आर्थिक सहायता से लेकर मृतकों को शहीद का दर्जा देने की प्रक्रिया और घटना की निष्पक्ष जांच जैसे मुद्दे शामिल हैं।

दोनों मृतकों को शहीद घोषित करने की प्रक्रिया शुरू होगी

समझौते के तहत नेपाल सरकार दोनों मृतकों को शहीद घोषित करने की प्रक्रिया तत्काल शुरू करेगी। इसके अलावा दोनों परिवारों को आर्थिक राहत के तौर पर 10-10 लाख नेपाली रुपये दिए जाएंगे।

सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया है कि पुलिस फायरिंग और दोनों युवकों की मौत की घटना की निष्पक्ष एवं प्रभावी जांच कराई जाएगी। जांच में यदि किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मदरसे की कानूनी स्थिति की होगी तत्काल जांच

सात सूत्रीय समझौते का एक महत्वपूर्ण बिंदु देवानगंज गाउंपालिका में स्थित मदरसे की कानूनी स्थिति की जांच से जुड़ा है।

समझौते के अनुसार, संबंधित मदरसे की कानूनी स्थिति की तत्काल जांच शुरू की जाएगी। साथ ही वहां रह रहे ऐसे लोगों, जिनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई बनती है, उन्हें कानूनी दायरे में लाने की प्रतिबद्धता सरकार ने जताई है।

हालांकि, किसी भी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और लागू कानून के आधार पर ही किए जाने की बात समझौते में कही गई है।

परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी

सरकार ने दोनों शोकाकुल परिवारों के लिए एक और महत्वपूर्ण घोषणा की है। समझौते के मुताबिक, दोनों परिवारों के एक-एक योग्य सदस्य को सरकारी रोजगार का अवसर उपलब्ध कराया जाएगा।

इस फैसले का उद्देश्य हिंसा में जान गंवाने वाले युवकों के परिवारों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। सरकारी नौकरी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया संबंधित नियमों और पात्रता के आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी।

जांच समिति की रिपोर्ट की सिफारिशों पर भी होगी कार्रवाई

घटना की जांच के लिए पहले से गठित समिति की रिपोर्ट को भी समझौते में महत्व दिया गया है। सरकार ने समिति की रिपोर्ट में शामिल सिफारिशों और सुझावों को कानून के अनुसार जल्द से जल्द लागू करने पर सहमति जताई है।

इसका मतलब है कि घटना की जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए समिति की सिफारिशों के आधार पर प्रशासनिक एवं कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।

मृतकों की याद में बनेगा स्मारक पार्क

समझौते के तहत स्थानीय सरकार के समन्वय से क्षेत्र में उपयुक्त स्थान पर दोनों मृतकों की स्मृति में स्मारक पार्क बनाने पर भी सहमति बनी है।

यह पार्क दोनों युवकों की स्मृति को बनाए रखने के साथ-साथ घटना के बाद प्रभावित परिवारों और स्थानीय लोगों के बीच शांति एवं सामाजिक सद्भाव का संदेश देने के उद्देश्य से विकसित किया जाएगा।

समझौते के बाद अंतिम संस्कार का फैसला

सरकार और मृतकों के परिवारों के बीच समझौता होने के बाद दोनों युवकों के अंतिम संस्कार का कार्यक्रम भी तय किया गया है। समझौते के बाद आज दोपहर 2 बजे दोनों मृतकों का अंतिम संस्कार किए जाने की बात सामने आई है।

परिजनों के लिए यह समझौता लंबे तनाव के बाद एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजरें सरकार की ओर से किए गए वादों को लागू करने और घटना की जांच के परिणाम पर रहेंगी।

धार्मिक जुलूस के दौरान शुरू हुआ था विवाद

सुनसरी जिले में हालिया तनाव की शुरुआत एक धार्मिक जुलूस के दौरान विवाद से हुई थी। गुरुवार को विवाद बढ़ने के बाद दो समुदायों के लोगों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई। इसके बाद कई इलाकों में पथराव, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं।

हिंसा के दौरान कई वाहनों को आग के हवाले किए जाने और कुछ इमारतों को नुकसान पहुंचाए जाने की खबरें सामने आईं। दुकानों और मकानों में भी तोड़फोड़ की गई। हालात बिगड़ने के बाद प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी।

चार जिलों में कर्फ्यू, सेना ने संभाला मोर्चा

हिंसा की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने चार जिलों में कर्फ्यू लगाने का फैसला किया। संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई। इसके साथ ही सेना को भी प्रभावित इलाकों में मोर्चा संभालना पड़ा।

सुरक्षा बलों ने कई इलाकों में फ्लैग मार्च किया, जबकि जमीन के साथ-साथ हवाई निगरानी भी बढ़ाई गई। प्रशासन का उद्देश्य हिंसा को और फैलने से रोकना तथा कानून-व्यवस्था बहाल करना है।

पीएम बालेंद्र शाह ने की शांति की अपील

हिंसा के बीच नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई किए जाने का भरोसा भी दिया है।

सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल करना और दोनों समुदायों के बीच तनाव कम करना है। सात सूत्रीय समझौते के बाद प्रशासन को उम्मीद है कि मृतकों के परिवारों और स्थानीय लोगों की नाराजगी को कम करने में मदद मिलेगी।

आगे क्या होगा?

अब इस पूरे मामले में तीन चीजों पर खास नजर रहेगी—पहली, दोनों मृतकों को शहीद घोषित करने की प्रक्रिया कितनी तेजी से पूरी होती है; दूसरी, पुलिस फायरिंग और हिंसा की जांच में जिम्मेदारी किसकी तय होती है; और तीसरी, मदरसे की कानूनी स्थिति की जांच के बाद सरकार क्या कार्रवाई करती है।

साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि सरकार समझौते में किए गए आर्थिक सहायता, रोजगार, स्मारक पार्क और जांच संबंधी वादों को किस समयसीमा में लागू करती है। क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए प्रशासन और स्थानीय प्रतिनिधियों की भूमिका भी अहम होगी।

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