
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत और अमेरिका के रिश्तों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत के साथ अमेरिका का संबंध सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहा है और दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। रुबियो ने क्वाड (QUAD) को चीन के खिलाफ बना गठबंधन मानने की धारणा को भी सही नहीं बताया। उनके मुताबिक, इस समूह का उद्देश्य केवल किसी एक देश का विरोध करना नहीं, बल्कि साझा हितों के क्षेत्रों में चार देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है।
रुबियो का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, टैरिफ, वीजा नीति और रूस से तेल खरीदने जैसे मुद्दों पर बातचीत जारी है। इन विषयों को लेकर दोनों देशों के संबंधों में कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं।
क्वाड को लेकर क्या बोले मार्को रुबियो?
मार्को रुबियो ने कहा कि क्वाड अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण मंच है। इसका मकसद चारों देशों के बीच समन्वय बढ़ाना और ऐसे क्षेत्रों में ठोस नतीजे हासिल करना है, जहां उनके हित एक-दूसरे से मेल खाते हैं।
उन्होंने बताया कि क्वाड के माध्यम से समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण सप्लाई चेन, तकनीक और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में काम किया जा रहा है। समुद्र के भीतर मौजूद केबल और अन्य अहम बुनियादी ढांचे की सुरक्षा तथा समुद्री गतिविधियों की निगरानी जैसे विषयों पर भी चारों देश मिलकर काम कर रहे हैं।
रुबियो के अनुसार, किसी एक देश पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता कम करना भी भारत और अमेरिका दोनों के हित में है। उन्होंने कहा कि दुनिया के किसी भी देश पर जरूरी वस्तुओं और तकनीक के लिए अत्यधिक निर्भर रहना उचित नहीं है। इस दिशा में दोनों देश अपनी घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ आपसी सहयोग कर सकते हैं।
भारत के साथ रिश्तों पर दिया भरोसा
रुबियो ने भारत को अमेरिका का महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के संबंध सकारात्मक हैं और अमेरिकी विदेश नीति में इस साझेदारी को खास महत्व दिया जाता है।
भारत की पाकिस्तान और चीन के साथ संबंधों को लेकर चिंताओं पर भी रुबियो ने भरोसा दिलाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान या दुनिया के किसी अन्य देश के साथ अमेरिका के संबंध भारत के साथ उसके रिश्तों की कीमत पर नहीं होंगे। अमेरिका भारत के साथ अपने संबंधों को किसी दूसरे देश के साथ रिश्तों के मुकाबले के रूप में नहीं देखता।
उनका यह बयान भारत के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि हाल के समय में अमेरिका के पाकिस्तान के साथ संपर्क और चीन के साथ उसके बदलते कूटनीतिक रुख को लेकर कई सवाल उठे हैं।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर 99 प्रतिशत काम पूरा
रुबियो ने भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर भी सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने कहा कि इस समझौते पर करीब 99 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और दोनों देश इसे अंतिम रूप देने के काफी करीब हैं। उनके मुताबिक, समझौते को पूरा होने में महीनों नहीं, बल्कि कुछ सप्ताह लग सकते हैं।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समझौते के बाकी बचे मुद्दों को अंतिम रूप देना जरूरी है। कुछ बिंदुओं पर भाषा और शर्तों को लेकर बातचीत जारी है।

टैरिफ और वीजा नीति पर भी दी सफाई
अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीति का उद्देश्य भारत को नुकसान पहुंचाना या दंडित करना नहीं है। उन्होंने वीजा प्रतिबंधों को भी भारत के खिलाफ लक्षित कदम मानने से इनकार किया। रुबियो के अनुसार, अमेरिका अपनी आव्रजन व्यवस्था में सुधार करने की कोशिश कर रहा है।
कुल मिलाकर, मार्को रुबियो के बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिका भारत के साथ रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाना चाहता है। हालांकि, व्यापार समझौते और अन्य मतभेदों पर अंतिम सहमति बनना अभी बाकी है।




