
गया: बिहार के गया जिले से राहत भरी खबर सामने आई है। गुरपा थाना क्षेत्र के रंगून नगर में गुरुवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब खेलते-खेलते एक 3 साल का मासूम करीब 30 फीट गहरे खुले बोरवेल में गिर गया। घटना के बाद पूरे गांव में हड़कंप मच गया। परिजनों की चीख-पुकार सुनकर बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। सूचना मिलते ही पुलिस, जिला प्रशासन, एसडीआरएफ और बाद में एनडीआरएफ की टीम ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू अभियान शुरू किया। करीब सात घंटे तक चले चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन के बाद मासूम पीयूष कुमार को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। बच्चे के बाहर आते ही मौके पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली और परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।

खेलते-खेलते खुले बोरवेल में जा गिरा मासूम
जानकारी के अनुसार, घटना गया जिले के फतेहपुर प्रखंड अंतर्गत गुरपा थाना क्षेत्र के रंगून नगर की है। तीन वर्षीय पीयूष कुमार घर के पास अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। इसी दौरान वह खुले पड़े करीब 30 फीट गहरे बोरवेल के पास पहुंच गया और अचानक संतुलन बिगड़ने से उसमें जा गिरा। घटना इतनी अचानक हुई कि आसपास मौजूद लोग कुछ समझ ही नहीं पाए। कुछ ही मिनटों में पूरे गांव में यह खबर फैल गई और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए।
सूचना मिलते ही हरकत में आया प्रशासन
घटना की जानकारी ग्रामीणों ने तत्काल गुरपा थाना पुलिस और स्थानीय प्रशासन को दी। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। जिला पदाधिकारी के निर्देश पर अंचल अधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी और अन्य प्रशासनिक अधिकारी राहत एवं बचाव कार्य में जुट गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीम को भी बुलाया गया।
ऑक्सीजन की व्यवस्था कर शुरू किया गया वैज्ञानिक रेस्क्यू
बोरवेल काफी संकरा होने के कारण बचाव अभियान आसान नहीं था। सबसे पहले प्रशासन ने पाइप के जरिए बोरवेल में लगातार ऑक्सीजन पहुंचाने की व्यवस्था की, ताकि बच्चे को सांस लेने में कोई परेशानी न हो। इसके बाद एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की विशेषज्ञ टीमों ने वैज्ञानिक तरीके से रेस्क्यू अभियान शुरू किया। बचाव दल ने बोरवेल के आसपास सुरक्षा घेरे बनाकर विशेष उपकरणों की मदद से बच्चे तक पहुंचने की कोशिश की।
मां की सूझबूझ भी आई काम
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक बेहद भावुक पल भी सामने आया। एनडीआरएफ की टीम ने बच्चे तक ऑक्सीजन पाइप पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन संकरे बोरवेल में यह आसान नहीं था। ऐसे में बच्चे की मां ने टीम की मदद करते हुए बेटे को आवाज लगाई और प्यार से समझाते हुए कहा कि अगर वह पाइप पकड़ लेगा तो उसे चॉकलेट मिलेगी। मां की आवाज सुनकर मासूम ने पाइप पकड़ लिया, जिससे बचाव दल को उसे सुरक्षित बाहर निकालने में काफी मदद मिली। इस दौरान वहां मौजूद लोग लगातार बच्चे की सलामती की दुआ करते रहे।
सात घंटे तक चला चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन
करीब सात घंटे तक चले इस रेस्क्यू अभियान में प्रशासन, पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर लगातार प्रयास किया। बचाव दल ने बेहद सावधानी से हर कदम उठाया ताकि बच्चे को किसी तरह की चोट न पहुंचे। आखिरकार कई घंटों की मेहनत के बाद मासूम पीयूष को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
बच्चे के बाहर आते ही गूंज उठीं तालियां
जैसे ही बच्चे को बोरवेल से बाहर निकाला गया, घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर रेस्क्यू टीम का स्वागत किया। परिजनों ने राहत की सांस ली और बच्चे को सीने से लगाकर भावुक हो गए। प्राथमिक स्वास्थ्य जांच के लिए बच्चे को तत्काल चिकित्सा टीम के पास ले जाया गया, जहां उसकी हालत सामान्य बताई गई।
प्रशासन और रेस्क्यू टीम का जताया आभार
मासूम के सकुशल बाहर आने के बाद परिजनों ने जिला प्रशासन, पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और सभी बचावकर्मियों का धन्यवाद किया। ग्रामीणों ने भी टीम की तत्परता और पेशेवर तरीके से किए गए रेस्क्यू अभियान की सराहना की। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खुले बोरवेल को तुरंत बंद कराया जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
खुले बोरवेल बने हुए हैं बड़ा खतरा
देश के कई राज्यों में खुले बोरवेल में बच्चों के गिरने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। ऐसे हादसों में कई बार जान बचाना बेहद मुश्किल हो जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन बोरवेल का उपयोग नहीं हो रहा है, उन्हें तत्काल सुरक्षित तरीके से बंद कर देना चाहिए। प्रशासन ने भी लोगों से लापरवाही न बरतने और खुले बोरवेल की सूचना तुरंत संबंधित विभाग को देने की अपील की है।




