उत्तर प्रदेश के Bulandshahr जिले से स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। खुर्जा स्थित Shri Surajmal Jatiya Community Health Center में एक मासूम बच्चे के हर्निया ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकीय चूक ने पूरे अस्पताल प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया। आरोप है कि बच्चे की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में बाईं ओर हर्निया बताया गया था, लेकिन डॉक्टर ने गलती से दाईं ओर ऑपरेशन कर दिया। मामला सामने आने के बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया और परिजनों ने जमकर नाराजगी जताई।
अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में बाईं ओर था हर्निया
जानकारी के अनुसार खुर्जा निवासी एक परिवार अपने छोटे बच्चे को हर्निया की समस्या के चलते श्री सूरजमल जटिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचा था। जांच के बाद बच्चे का अल्ट्रासाउंड कराया गया, जिसमें साफ तौर पर बाईं ओर हर्निया होने की पुष्टि हुई। चिकित्सकों ने ऑपरेशन की सलाह दी, जिसके बाद परिवार ने सरकारी अस्पताल में इलाज कराने का फैसला किया।
परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने रिपोर्ट को सही ढंग से नहीं देखा और बच्चे का दाईं ओर ऑपरेशन कर दिया। ऑपरेशन के बाद जब परिवार ने स्थिति को समझा तो उन्होंने सवाल उठाए। इसके बाद अस्पताल प्रशासन में अफरा-तफरी मच गई।
लापरवाही उजागर होने पर दोबारा किया गया ऑपरेशन
बच्चे के पिता पुष्पेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि चिकित्सकों की गलती उजागर होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले को दबाने की कोशिश की। हालांकि जब परिजनों ने विरोध किया तो डॉक्टरों ने दोबारा बच्चे का ऑपरेशन किया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद परिवार बेहद आक्रोशित है और जिम्मेदार चिकित्सकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है।
परिजनों का कहना है कि अगर समय रहते गलती पकड़ में नहीं आती तो बच्चे की हालत और गंभीर हो सकती थी। इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
सीएमएस ने मांगा चिकित्सक से स्पष्टीकरण
मामले के तूल पकड़ने के बाद अस्पताल प्रशासन भी हरकत में आया। अस्पताल के सीएमएस डॉ. दिनेश कुमार ने पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित चिकित्सक से स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सीएमएस के बयान के बाद स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में इस तरह की लापरवाही पहली बार नहीं हुई है, लेकिन मासूम बच्चों के इलाज में ऐसी गंभीर गलती बेहद चिंताजनक है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना के बाद एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकीय लापरवाही को लेकर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी ऑपरेशन से पहले मरीज की रिपोर्ट, मेडिकल हिस्ट्री और ऑपरेशन साइट की कई स्तरों पर पुष्टि की जाती है। इसके बावजूद इतनी बड़ी चूक होना बेहद गंभीर मामला माना जा रहा है।
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