Ganga Yamuna Link Expressway -बुलंदशहर: गंगा-यमुना लिंक एक्सप्रेसवे भूमि अधिग्रहण के विरोध में किसानों की महापंचायत, एक करोड़ प्रति बीघा मुआवजे की मांग

बुलंदशहर में गंगा-यमुना लिंक एक्सप्रेसवे के खिलाफ किसानों का बड़ा आंदोलन, हजारों किसानों ने शुरू किया सत्याग्रह

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में गंगा-यमुना लिंक एक्सप्रेसवे और जेवर ग्रीन लिंक एक्सप्रेसवे के लिए किए जा रहे भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों का विरोध तेज हो गया है। बुलंदशहर के स्याना क्षेत्र स्थित बहापुर गांव में रविवार को हजारों किसानों और महिलाओं ने एकजुट होकर महापंचायत आयोजित की और सरकार के खिलाफ सत्याग्रह शुरू कर दिया।

किसानों ने सरकार से प्रति बीघा एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की है। इसके साथ ही भूमिहीन होने वाले परिवारों को सरकारी नौकरी और एक्सप्रेसवे पर टोल फ्री सुविधा देने की भी मांग उठाई गई। आंदोलन का नेतृत्व किसान कामगार यूनियन (तेवतिया) कर रही है।

बड़ी संख्या में पहुंचे किसान और महिलाएं

महापंचायत में आसपास के कई गांवों से किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और निजी वाहनों से पहुंचे। आंदोलन स्थल पर महिलाओं की भी भारी भागीदारी देखने को मिली। किसानों ने आरोप लगाया कि सरकार भूमि अधिग्रहण कानून 2013 की मूल भावना से हटकर जबरन जमीन अधिग्रहण कर रही है।

किसानों का कहना है कि सरकार ने भूमि अधिग्रहण बिल की धाराओं में बदलाव कर किसानों के हितों की अनदेखी की है और कम मुआवजा देकर जमीन लेने का दबाव बनाया जा रहा है।

किसान नेता मनवीर तेवतिया ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

महापंचायत को संबोधित करते हुए किसान कामगार यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनवीर तेवतिया ने कहा कि किसानों की जमीन उनकी आजीविका का एकमात्र सहारा है और सरकार दबाव बनाकर बैनामा कराने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण 2013 के प्रावधानों के तहत किसानों को उचित मुआवजा और सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि एक्सप्रेसवे बनने के बाद स्थानीय किसानों को हाईवे पर पर्याप्त कनेक्टिविटी भी दी जाए ताकि गांवों का संपर्क बाधित न हो।

मनवीर तेवतिया ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि “जान चली जाएगी लेकिन जमीन नहीं जाएगी।” उनके इस बयान के बाद आंदोलन स्थल पर मौजूद किसानों ने जोरदार नारेबाजी की।

किसानों की प्रमुख मांगें

महापंचायत में किसानों ने सरकार के सामने कई अहम मांगें रखीं। इनमें प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—

  • प्रति बीघा एक करोड़ रुपये मुआवजा
  • भूमिहीन किसानों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी
  • एक्सप्रेसवे से प्रभावित परिवारों के लिए टोल फ्री सुविधा
  • भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के तहत पारदर्शी प्रक्रिया
  • स्थानीय किसानों और गांवों के लिए हाईवे कनेक्टिविटी
  • जबरन बैनामा और दबाव की कार्रवाई पर रोक

सरकार के खिलाफ लंबे आंदोलन की चेतावनी

किसानों ने साफ किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने बातचीत कर समाधान नहीं निकाला तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा।

महापंचायत के दौरान किसानों ने सरकार विरोधी नारे लगाए और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को किसान विरोधी बताया। प्रशासन की ओर से इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और पुलिस बल तैनात किया गया है।

 

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क्षेत्र में बढ़ी राजनीतिक हलचल

गंगा-यमुना लिंक एक्सप्रेसवे और जेवर ग्रीन लिंक एक्सप्रेसवे को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों की बड़ी भागीदारी को देखते हुए कई किसान संगठन भी आंदोलन के समर्थन में आने लगे हैं।

आने वाले दिनों में यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है, क्योंकि किसान संगठन लगातार गांव-गांव जाकर लोगों को जोड़ने का अभियान चला रहे हैं।

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