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Bombay HC : मंत्रालय कैंटीन पर हाईकोर्ट सख्त, एफडीए रिपोर्ट पर सवाल, वकीलों की टीम ने जांच शुरू

मंत्रालय की कैंटीन में 'एक भी कीड़ा नहीं' के दावे पर हाईकोर्ट सख्त, FDA की रिपोर्ट पर उठाए सवाल; वकीलों की टीम भेजकर मांगी नई जांच रिपोर्ट

मुंबई: महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा मानकों को लेकर चल रही सख्ती के बीच बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक अहम मामले की सुनवाई के दौरान खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने मंत्रालय (मंत्रालय भवन) की कैंटीन में निरीक्षण के दौरान “एक भी कीट-पतंगा नहीं मिलने” के FDA के दावे पर संदेह जताते हुए इसे अविश्वसनीय बताया। कोर्ट ने मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए तत्काल चार वकीलों की एक स्वतंत्र टीम को कैंटीन का निरीक्षण करने भेजने का आदेश दिया और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराने के निर्देश भी दिए।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब महाराष्ट्र में FDA लगातार निजी होटल, रेस्तरां, फूड चेन और खानपान से जुड़े प्रतिष्ठानों पर छापेमारी कर खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करने में जुटा है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून का पालन केवल निजी संस्थानों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि सरकारी और अर्ध-सरकारी संस्थानों पर भी समान रूप से लागू होना चाहिए।

FDA ने कहा- मंत्रालय की कैंटीन में नहीं मिला कोई कीट

सुनवाई के दौरान FDA की ओर से अदालत को बताया गया कि मंत्रालय की कैंटीन का निरीक्षण किया जा चुका है। विभाग ने दावा किया कि सरकारी और अर्ध-सरकारी संस्थानों की निरीक्षण रिपोर्ट भी तैयार कर अदालत के समक्ष प्रस्तुत की गई है। जहां-जहां अनियमितताएं मिलीं, वहां आवश्यक कार्रवाई की गई।

हालांकि FDA ने यह भी कहा कि मंत्रालय की कैंटीन की जांच के दौरान वहां कोई कीट-पतंगा या गंभीर खाद्य सुरक्षा संबंधी समस्या नहीं मिली। विभाग ने अदालत से विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय भी मांगा, जिसे स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार दोपहर 3 बजे निर्धारित कर दी।

हाईकोर्ट बोला- फाइव स्टार होटल भी पूरी तरह कीट-मुक्त नहीं

FDA के इस दावे पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि यह दावा सामान्य परिस्थितियों में विश्वास करने योग्य नहीं लगता। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि देश के बड़े-बड़े फाइव स्टार होटलों में भी कभी-कभी मक्खियां या छोटे कीट दिखाई दे जाते हैं। ऐसे में मंत्रालय की कैंटीन के पूरी तरह कीट-मुक्त होने का दावा सहज रूप से स्वीकार नहीं किया जा सकता।

अदालत ने कहा कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए। यदि रिपोर्ट वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाती, तो इससे जनता का भरोसा प्रभावित होता है।

हाईकोर्ट ने चार वकीलों की टीम को सौंपा निरीक्षण

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने चार वकीलों की एक स्वतंत्र टीम गठित कर मंत्रालय की कैंटीन का तत्काल निरीक्षण करने का आदेश दिया। अदालत ने निर्देश दिया कि निरीक्षण के दौरान पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाए ताकि जांच की पारदर्शिता पर कोई सवाल न उठे।

कोर्ट ने यह भी कहा कि निरीक्षण के बाद तैयार की गई नई रिपोर्ट उसी दिन दोपहर तक अदालत में पेश की जाए, ताकि सुनवाई के दौरान वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

अनियमितता मिलने पर होगी सख्त कार्रवाई

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने FDA से यह भी पूछा कि यदि दोबारा निरीक्षण में कैंटीन में कीट-पतंगे, गंदगी या खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन मिलता है, तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।

इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि निरीक्षण में किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। कोर्ट ने यह भी दोहराया कि सरकारी संस्थानों को किसी प्रकार की विशेष छूट नहीं दी जा सकती।

निजी संस्थानों के साथ सरकारी संस्थानों पर भी समान कानून

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि खाद्य सुरक्षा कानून सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए। यदि निजी होटल, रेस्तरां और फूड चेन के खिलाफ नियमित कार्रवाई की जा रही है, तो सरकारी कार्यालयों, मंत्रालयों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों की कैंटीनों की भी उसी स्तर पर जांच होनी चाहिए।

अदालत ने संकेत दिया कि सार्वजनिक संस्थानों में भोजन करने वाले कर्मचारियों और आम नागरिकों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी किसी निजी प्रतिष्ठान के ग्राहकों की।

हाल के दिनों में तेज हुई है FDA की कार्रवाई

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में पिछले कुछ दिनों से FDA लगातार विभिन्न होटल, रेस्तरां और फूड आउटलेट्स पर निरीक्षण अभियान चला रहा है। कई स्थानों पर खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन, साफ-सफाई में कमी और अन्य अनियमितताओं के मामले सामने आने के बाद विभाग ने कई प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई भी की है।

अब बॉम्बे हाईकोर्ट की इस सख्त टिप्पणी के बाद यह स्पष्ट संकेत मिला है कि खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन में सरकारी और निजी संस्थानों के बीच किसी भी प्रकार का भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा। अदालत की अगली सुनवाई में स्वतंत्र निरीक्षण रिपोर्ट और FDA के विस्तृत जवाब के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

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