बहराइच में अमृत सरोवर योजना में घोटाले के आरोप, मनरेगा फर्जीवाड़े से हड़कंप
रिपोर्ट – प्रीतम सिंह, बहराइच
उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के रिसिया ब्लॉक अंतर्गत रघुनाथपुर भावनियापुर गांव में केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी अमृत सरोवर योजना पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों ने सरोवर निर्माण में भ्रष्टाचार, साफ-सफाई में लापरवाही और मनरेगा के तहत फर्जी मजदूर दिखाकर सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस योजना का उद्देश्य जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास था, वही अब भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। गांव के लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
अमृत सरोवर योजना में घोटाले के आरोप
स्थानीय लोगों के अनुसार रघुनाथपुर भावनियापुर में बनाए गए अमृत सरोवर के निर्माण कार्य में भारी अनियमितताएं हुई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों, सचिवों और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।
लोगों का कहना है कि कागजों में विकास कार्य पूरा दिखाया गया, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। सरोवर की हालत देखकर यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं कि निर्माण और रखरखाव में गंभीर लापरवाही बरती गई है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया और योजना के नाम पर केवल सरकारी धन निकालने का काम किया गया।
साफ-सफाई के अभाव में बदहाल हुआ सरोवर
अमृत सरोवर के आसपास गंदगी का अंबार लगा हुआ है। सरोवर के किनारों पर झाड़ियां और घास उगी हुई हैं, जिससे पूरे क्षेत्र की स्थिति बदहाल दिखाई दे रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरोवर की नियमित साफ-सफाई नहीं कराई जाती, जिसके कारण वहां दुर्गंध और गंदगी फैल रही है। लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजों में सफाई और रखरखाव दिखाकर सरकारी रिकॉर्ड पूरा कर रहे हैं।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि सरोवर का उद्देश्य गांव में जल संरक्षण और सौंदर्यीकरण था, लेकिन वर्तमान स्थिति में यह योजना अपनी मूल भावना से भटक चुकी है।
मनरेगा में फर्जी लेबर दिखाने का आरोप
ग्रामीणों ने मनरेगा योजना में भी बड़े फर्जीवाड़े के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सरोवर की सफाई और विकास कार्य के नाम पर फर्जी मजदूरों की एंट्री कर भुगतान निकाला गया।
ग्रामीणों के मुताबिक मौके पर कोई कार्य होता दिखाई नहीं देता, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में काम पूरा दिखाया जा चुका है। सरोवर परिसर में उगी घास और झाड़ियां इस बात की गवाही दे रही हैं कि लंबे समय से वहां कोई सफाई या श्रम कार्य नहीं हुआ।
लोगों का आरोप है कि मनरेगा के तहत मजदूरों के नाम पर सरकारी धन का बंदरबांट किया गया है।
ग्रामीणों ने जांच की उठाई मांग
मामले को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। लोगों ने जिला प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो योजनाओं का लाभ जनता तक कभी नहीं पहुंच पाएगा। उन्होंने मांग की कि अमृत सरोवर और मनरेगा कार्यों की भौतिक जांच कराई जाए और सरकारी धन के दुरुपयोग की जिम्मेदारी तय की जाए।
सरकार की योजनाओं पर उठ रहे सवाल
केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई मिशन अमृत सरोवर योजना का उद्देश्य गांवों में जल संरक्षण को बढ़ावा देना और जल स्रोतों का पुनर्जीवन करना है। लेकिन कई जिलों से लगातार भ्रष्टाचार और लापरवाही की शिकायतें सामने आने के बाद योजना की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।
बहराइच के रिसिया ब्लॉक से सामने आया यह मामला भी सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और ग्रामीणों को कब तक न्याय मिल पाता है।
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