Thursday , April 18 2024

इस वजह से दीपक ने अपने सिर लिया था आरोप…

दिल्ली के कंझावला कांड में सुल्तानपुरी थाना पुलिस कार मालिक आशुतोष और मुख्य साजिशकर्ता अंकुश समेत अब तक 7 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। कोर्ट ने शुक्रवार को आशुतोष को तीन दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। वारदात के बाद से दोनों शख्स फरार चल रहे थे। इसमें से आशुतोष को शुक्रवार सुबह गिरफ्तार किया गया। वहीं, अंकुश खुद ही शुक्रवार शाम को सुल्तानपुरी थाने में सरेंडर कर दिया।
जांच में पता लगा है कि पूरे घटनाक्रम को छिपाने के लिए आशुतोष और अंकुश ने ही योजना बनाई थी। घटना के बाद अमित ने आशुतोष और अंकुश को पूरी कहानी बताई। कार में सिर्फ चार शख्स अमित, मिथुन, मनोज और कृष्ण थे। इसमें अमित कार चला रहा था। वहीं, दीपक ने रुपयों के लालच में जुर्म अपने सिर लिया था। पुलिस के अनुसार, आशुतोष और अंकुश कॉन्फ्रेंस कॉल पर अमित से बात कर रहे थे। इन्होंने ही अमित को बचाने के लिए दीपक को पूरे घटनाक्रम में शामिल करने की योजना बनाई थी। इसी के तहत अंकुश सभी को लेकर दीपक के घर गया और उसे योजना में शामिल होने के लिए कहा। जब पुलिस आशुतोष के पास पहुंची तो उसने बरगलाना शुरू कर दिया। यह आशुतोष ही था, जिसने पुलिस को दीपक के कार चलाने की कहानी सुनाई थी। इस पर पुलिस ने विश्वास कर लिया था। दीपक को मामूली दुर्घटना की जानकारी दी गई थी 26 वर्षीय दीपक ग्रामीण सेवा का चालक है। उसे मामूली दुर्घटना की जानकारी दी गई और जुर्म अपने सिर पर लेने पर टेम्पो खरीदने के लिए रुपये देने का लालच दिया गया, इसलिए दीपक ने बयान दिया, लेकिन पुलिस ने गंभीर श्रेणी में धाराएं लगाईं तो खुद को फंसता देख पुलिस के सामने पूरी कहानी खोल दी। दिल्ली पुलिस की जांच में पता चला था कि जिस व्यक्ति पर अंजलि सिंह को घसीटकर ले जाने वाली कार चलाने का आरोप है, हादसे के समय कार के अंदर नहीं था। पुलिस ने कहा कि आरोपी दीपक खन्ना को उसके चचेरे भाई और दोस्तों ने पुलिस को यह बताने के लिए कहा था कि वह उस समय उनके साथ था, क्योंकि वह ड्राइविंग लाइसेंस वाला एकमात्र व्यक्ति है। जांच के दौरान, पुलिस ने पाया कि दीपक की उस समय की फोन लोकेशन मामले के अन्य चार आरोपियों से मेल नहीं खा रही थी। पुलिस को उसकी फोन लोकेशन और कॉल रिकॉर्ड से पता चला कि वह पूरे दिन घर पर ही था। 26 वर्षीय दीपक पुलिस द्वारा पहले गिरफ्तार किए गए पांच लोगों में से एक है।

Check Also

उत्तराखंड: 35-40 साल की सेवा के बाद बिना पदोन्नति रिटायर हो रहे शिक्षक

शिक्षा विभाग में शिक्षक 35 से 40 साल की सेवा के बाद बिना पदोन्नति सेवानिवृत्त …