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आरएसएस प्रमुख ने देश के बंटवारे पर कह दी बड़ी बात, भागवत बोले- बंटवारे का दर्द कभी नहीं मिटेगा, विभाजन को खत्म करके ही होगा समाधान

आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत ने आज एक बार फिर देश के बंटवारे का मुद्दा उठाया. मोहन भागवत ने कहा कि देश का बंटवारा एक कभी ना मिटने वाला दर्द है और यह तभी खत्म हो सकता है जबकि विभाजन को समाप्त किया जाए।

श्री भागवत ने नोएडा के भाऊराव देवरस सरस्वती विद्या मंदिर में जागृति प्रकाशन द्वारा प्रकाशित ग्रंथ विभाजनकालीन भारत के साक्षी का लोकार्पण किया। इस पुस्तक के लेखक कृष्णानंद सागर है। इस मौके पर संघ प्रमुख बोले- देश का विभाजन न मिटने वाली वेदना, यह तभी मिटेगी जब विभाजन निरस्त होगा। मेरा जन्म विभाजन के बाद हुआ, इस बात को समझने में बचपन के कुछ साल और लगे। मैंने काफी अध्ययन के बाद समझा कि जिस मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए कई बलिदान हुए उसका विभाजन हुआ। भारत एक जमीन का टुकड़ा नहीं हमारी मातृभूमि है। संपूर्ण दुनिया को कुछ देने लायक हम तब होंगे जब विभाजन हटेगा। यह राजनीति नहीं हमारे अस्तित्व का विषय है। यह बात राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत ने कही।

इस दौरान उन्होंने लोगों से कहा कि खंडित भारत को अखंडित बनाना होगा यह हमारा राष्ट्रीय एवं धार्मिक कर्तव्य है। विभाजन इस्लामिक आक्रमण, अंग्रेजों के आक्रमण का नतीजा है। इसकी पृष्ठभूमि इन आक्रमणों से जुड़ी है। आक्रमणकारियों की मनोवृत्ति अलगाव एवं स्वयं को बेहतर साबित करने की रही। अंग्रेजों ने समझा कि बिना लोगों में अलगाव किए यहां राज नहीं कर सकते।

राजा सबका होता है सबकी उन्नति उसका धर्म है। 2021 है 1947 नहीं अब विभाजन संभव नहीं है। भारत विभाजन को भूलेगा नहीं, अब विभाजन का प्रयास करने वालों का नुकसान है यह मेरा आत्मविश्वास है। हिंदू समाज को संगठित होने की आवश्यकता है। हमने समझौता कर लिया इसलिए विभाजन हुआ। हमारी संस्कृति कहती है विविधता में एकता है इसलिए हिंदू यह नहीं कह सकता कि मुसलमान नहीं रहेंगे। सब मिलकर अनुशासन में रहेंगे यही हमारी संस्कृति है। अनुशासन का पालन सबको करना होगा। अशफाक उल्ला खान जैसे मुसलमान देश में हुए हैं जो जन्नत की जगह भारत में दोबारा जन्म की चाह रखते थे।

भारत के उत्थान में धर्म का हमेशा स्थान रहा है। 1947 की खंडित स्वतंत्रता के बाद भी अलगाव की मानसिकता से टकराव जारी है। कैसे देश टूटा उस इतिहास को पढ़ना होगा। अप्रिय हो लेकिन जो सत्य हो वही इतिहास पढ़ना जरूरी है। इतिहास को समझकर सीखकर आगे बढ़ना होगा लेकिन जब एक बार अलगाव हो गया तो अब दंगे क्यों होते हैं। हम ही सही बाकी गलत की मानसिकता विभाजनकारी। दूसरों के लिए भी वही आवश्यक मानना जो खुद को सही लगे गलत मानसिकता है। अपने प्रभुत्व का सपना देखना गलत है।

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