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छठ महापर्व 2025: संध्याकाल में गोमती तट पहुंचे सीएम योगी, भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना

लखनऊ।
आस्था, अनुशासन और प्रकृति के प्रति समर्पण का प्रतीक महापर्व छठ पूजा पूरे उत्तर प्रदेश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। सोमवार शाम राजधानी लखनऊ के गोमती तट पर भव्य दृश्य देखने को मिला, जब डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इसी दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी लक्ष्मण मेला मैदान स्थित घाट पर पहुंचे और भगवान भास्कर (सूर्य देव) को अर्घ्य अर्पित कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और जनकल्याण की प्रार्थना की।

मुख्यमंत्री योगी के साथ उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और महापौर सुषमा खर्कवाल भी मौजूद रहीं। मुख्यमंत्री ने सूर्य देव और छठी मइया के प्रति नमन करते हुए कहा कि “छठ पर्व समाज में स्वच्छता, संयम और सामूहिकता का अद्भुत उदाहरण है। यह पर्व हमें प्रकृति के प्रति सम्मान और कृतज्ञता सिखाता है।”

गोमती तट पर दिखा श्रद्धा और भक्ति का संगम

लक्ष्मण मेला मैदान पर प्रशासन की ओर से विशेष तैयारियां की गई थीं। घाटों को आकर्षक रोशनी, फूलों और रंगीन झालरों से सजाया गया था। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें तैनात थीं, वहीं नगर निगम की ओर से सफाई और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा गया।

संध्याकाल में जब सूर्य अस्ताचल की ओर अग्रसर हुआ, तो घाट पर उपस्थित हजारों व्रती महिलाओं ने गीतों और मंत्रोच्चार के बीच भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। पूरा वातावरण “जय छठी मइया” और “हर-हर सूर्यदेव” के जयकारों से गूंज उठा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पहुंचने पर श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल देखने को मिला। लोग “जय श्रीराम” और “योगी-योगी जय योगी” के नारे लगाते नजर आए। मुख्यमंत्री ने उपस्थित लोगों से संवाद कर उन्हें छठ पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं का भी जायज़ा लिया।

भक्तिमय माहौल में डूबा लखनऊ

छठ पर्व के अवसर पर लखनऊ के अन्य घाटों — गौरीघाट, कुकरैल तट, झूलेलाल वाटिका और जनेश्वर मिश्र पार्क झील — पर भी श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा रहा। व्रती महिलाओं ने चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व के तीसरे दिन अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया और अगले दिन उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने की तैयारियां कीं।

यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह समाज में स्वच्छता, अनुशासन, समर्पण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देता है।

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