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Diabetes Effect on Health: शुगर की बीमारी आंख, किडनी और नसों को पहुंचा सकती है नुकसान, समय रहते कराएं ये 6 जरूरी जांच

डायबिटीज का आंखों किडनी और नसों पर असर जानें जरूरी जांच

डायबिटीज यानी शुगर की बीमारी आज के समय में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल है। अक्सर लोग इसे सिर्फ ब्लड शुगर बढ़ने की बीमारी समझते हैं, लेकिन लंबे समय तक अनियंत्रित शुगर शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है। इसका असर आंखों, किडनी, नसों और दिल पर भी पड़ सकता है। सबसे चिंता की बात यह है कि शुरुआती दौर में कई बार शरीर में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। ऐसे में व्यक्ति को पता भी नहीं चलता कि उसके शरीर के अंदर बीमारी धीरे-धीरे गंभीर रूप ले रही है। इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है।

1. आंखों की रोशनी पर पड़ सकता है असर

लगातार बढ़ा हुआ ब्लड शुगर आंखों की रेटिना में मौजूद छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। इस स्थिति को डायबिटिक रेटिनोपैथी कहा जाता है। शुरुआत में धुंधला दिखाई देना, आंखों के सामने धब्बे नजर आना या पढ़ने में परेशानी हो सकती है। गंभीर स्थिति में आंखों की रोशनी भी जा सकती है।

जरूरी जांच: डायलेटेड रेटिना एग्जामिनेशन यानी आंखों की पुतली फैलाकर रेटिना की जांच। टाइप-2 डायबिटीज में निदान के समय और टाइप-1 में बीमारी शुरू होने के पांच साल बाद जांच कराने की सलाह दी जाती है।

2. किडनी को धीरे-धीरे पहुंचता है नुकसान

डायबिटीज किडनी की फिल्टर करने वाली छोटी रक्त वाहिकाओं को प्रभावित कर सकती है। इससे किडनी की कार्यक्षमता कम होने लगती है। शुरुआती चरण में इसके लक्षण दिखाई देना जरूरी नहीं है। बाद में पैरों में सूजन, थकान और पेशाब में बदलाव जैसे संकेत मिल सकते हैं।

जरूरी जांच:

  • Urine Albumin-to-Creatinine Ratio (UACR): पेशाब में प्रोटीन यानी एल्ब्यूमिन की मात्रा पता करने के लिए।
  • Serum Creatinine और eGFR: किडनी की कार्यक्षमता जांचने के लिए।

टाइप-2 डायबिटीज में निदान के समय से और टाइप-1 में पांच साल बाद इनकी नियमित जांच जरूरी होती है।

3. नसों को नुकसान पहुंचा सकती है शुगर

लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़ी रहने से शरीर की नसें प्रभावित हो सकती हैं। इसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहते हैं। इसके कारण हाथ-पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन, जलन और दर्द महसूस हो सकता है। कई बार पैरों में चोट लगने के बाद भी व्यक्ति को दर्द महसूस नहीं होता।

जरूरी जांच: डॉक्टर द्वारा न्यूरोलॉजिकल परीक्षण, वाइब्रेशन टेस्ट और 10-ग्राम मोनोफिलामेंट टेस्ट किया जाता है। इससे पैरों की संवेदना और नसों की स्थिति का पता लगाया जाता है।

4. दिल की बीमारी का भी बढ़ता है खतरा

डायबिटीज से पीड़ित लोगों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। लंबे समय तक हाई ब्लड शुगर रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करती है। इसके साथ हाई ब्लड प्रेशर और खराब कोलेस्ट्रॉल स्थिति को गंभीर बना सकते हैं।

जरूरी जांच: ब्लड प्रेशर, लिपिड प्रोफाइल और जरूरत के अनुसार ECG व अन्य हृदय संबंधी जांच।

5. पैरों में घाव और संक्रमण का खतरा

डायबिटीज में नसों और रक्त संचार पर असर पड़ने से पैरों में चोट या छाले गंभीर हो सकते हैं। कई बार मरीज को घाव का पता देर से चलता है। संक्रमण बढ़ने पर इलाज मुश्किल हो सकता है।

डायबिटीज को नियंत्रित रखने के लिए क्या करें?

  • डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं नियमित लें।
  • मीठे पेय और अत्यधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थों से बचें।
  • संतुलित भोजन और नियमित व्यायाम अपनाएं।
  • ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर की निगरानी करें।
  • धूम्रपान से बचें और पर्याप्त नींद लें।
  • डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित जांच कराएं।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

अगर आंखों से अचानक धुंधला दिखने लगे, पैरों में घाव हो जाए, लगातार सुन्नपन रहे या पैरों में सूजन दिखाई दे तो डॉक्टर से संपर्क करें। अचानक नजर कम होना, सीने में दर्द या सांस लेने में परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

निष्कर्ष: डायबिटीज को पूरी तरह नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। नियमित जांच, संतुलित जीवनशैली और सही इलाज से आंखों, किडनी और नसों को होने वाले नुकसान के जोखिम को कम किया जा सकता है। याद रखें, शुगर नियंत्रित रखना ही नहीं, उससे होने वाली जटिलताओं की समय पर पहचान करना भी जरूरी है।

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