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Ethanol From Hair : बेकार बालों में छिपा है बड़ा खजाना, वैज्ञानिकों ने खोजा नया रास्ता!

Ethanol From Hair: गन्ने-मक्के के बाद अब बालों से बनेगा इथेनॉल, गुजरात के स्टार्टअप ने पेश की नई तकनीक

नई दिल्ली: भारत में पेट्रोल के विकल्प तलाशने और पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए लगातार नए प्रयोग किए जा रहे हैं। अब इस दिशा में गुजरात के एक स्टार्टअप ने ऐसा दावा किया है, जिसने सबका ध्यान खींचा है। आमतौर पर बेकार समझकर फेंक दिए जाने वाले इंसानों के बालों से भी इथेनॉल बनाने की तकनीक विकसित करने की बात सामने आई है। अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है, तो भविष्य में बायोफ्यूल बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल के विकल्प बढ़ सकते हैं।

गुजरात के स्टार्टअप ने विकसित की नई तकनीक

गुजरात स्थित टेक्नोलॉजी कंपनी Techofest Global ने इंसानों के बेकार बालों से बायोइथेनॉल बनाने के लिए एक तकनीक विकसित करने का दावा किया है। कंपनी इस परियोजना पर बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र की कंपनी Biomakerz के साथ मिलकर काम कर रही है। स्टार्टअप के मुताबिक, उसकी तकनीक का परीक्षण पायलट स्तर की सुविधा में किया जा चुका है और अब इसे व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

कंपनी इस प्रक्रिया को पांचवीं पीढ़ी यानी 5G बायोइथेनॉल तकनीक के रूप में पेश कर रही है। इसका उद्देश्य ऐसे कच्चे माल का इस्तेमाल करना है, जो पारंपरिक खाद्य फसलों पर निर्भर नहीं हैं। हालांकि, इस तकनीक को बड़े स्तर पर अपनाने से पहले इसकी उत्पादन क्षमता, लागत और व्यावसायिक उपयोगिता का और आकलन करना जरूरी होगा।

आखिर बालों से कैसे बनाया जाएगा इथेनॉल?

इंसानों के बाल मुख्य रूप से केराटिन नामक प्रोटीन से बने होते हैं। यह प्रोटीन काफी मजबूत होता है और आसानी से टूटता नहीं है। यही वजह है कि बालों को सीधे गन्ने या मक्के की तरह किण्वन प्रक्रिया में डालकर इथेनॉल बनाना आसान नहीं है।

इस चुनौती से निपटने के लिए विशेष जैविक प्रक्रियाओं और एंजाइमों की मदद ली जा सकती है। कंपनी के अनुसार, उसकी तकनीक में बालों को चरणबद्ध तरीके से ऐसे मध्यवर्ती पदार्थों में बदला जाता है, जिन्हें आगे की जैविक प्रक्रिया के जरिए इथेनॉल में परिवर्तित किया जा सके।

इस पूरी प्रक्रिया में वैज्ञानिक तकनीक की अहम भूमिका है। बालों की संरचना को तोड़ना, उपयोगी घटकों को प्राप्त करना और फिर उनसे इथेनॉल तैयार करना अलग-अलग चरणों में होने वाला काम है।

स्टार्टअप ने अपनी तकनीक के लिए पेटेंट का दावा भी किया है। हालांकि, इसकी वास्तविक उत्पादन क्षमता और लागत संबंधी फायदे की स्वतंत्र पुष्टि के लिए बड़े स्तर पर परीक्षणों के नतीजे महत्वपूर्ण होंगे।

गन्ने और मक्के पर निर्भरता कम करने में मिल सकती है मदद

भारत में इथेनॉल बनाने के लिए गन्ना, शीरा, मक्का और कुछ अन्य कृषि उत्पादों का इस्तेमाल किया जाता है। इथेनॉल को पेट्रोल में मिलाकर इस्तेमाल करने से पारंपरिक पेट्रोलियम ईंधन की खपत कम करने में मदद मिल सकती है।

लेकिन खाद्य फसलों से ईंधन बनाने के साथ एक महत्वपूर्ण सवाल भी जुड़ा है। जब अनाज और कृषि उत्पादों की मांग बढ़ती है, तो खाद्य जरूरतों, पशु चारे और ईंधन उत्पादन के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी हो जाता है।

ऐसे में अगर बालों जैसे गैर-खाद्य अपशिष्ट से पर्याप्त मात्रा में इथेनॉल तैयार करना आर्थिक रूप से संभव होता है, तो इससे कच्चे माल के नए विकल्प मिल सकते हैं।

इसका एक संभावित फायदा यह भी है कि ईंधन उत्पादन के लिए कृषि उत्पादों पर पूरी तरह निर्भर रहने की जरूरत कम हो सकती है। हालांकि, बालों से बनने वाला इथेनॉल भविष्य में गन्ने या मक्के से बनने वाले इथेनॉल की जगह कितनी मात्रा में ले पाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

कूड़े में फेंके जाने वाले बाल बन सकते हैं उपयोगी संसाधन

देशभर में हर दिन हजारों सैलून, नाई की दुकानों और ब्यूटी पार्लर से बड़ी मात्रा में बाल निकलते हैं। इनमें से काफी बाल कचरे के साथ फेंक दिए जाते हैं। आमतौर पर इन्हें उपयोगी औद्योगिक संसाधन के रूप में नहीं देखा जाता।

यदि बालों से इथेनॉल बनाने की प्रक्रिया व्यावसायिक स्तर पर सफल होती है, तो इस कचरे को इकट्ठा करने और उसका उपयोग करने के लिए एक नई व्यवस्था विकसित की जा सकती है।

इससे सैलून और ब्यूटी पार्लर से निकलने वाले बालों के निपटान का एक अतिरिक्त विकल्प मिल सकता है। साथ ही, कचरा संग्रहण, छंटाई, परिवहन और प्रसंस्करण से जुड़े रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

हालांकि, इसके लिए बालों को साफ तरीके से इकट्ठा करना, उनकी गुणवत्ता बनाए रखना और उन्हें प्रसंस्करण केंद्रों तक पहुंचाना आवश्यक होगा। इन सभी कामों की लागत भी अंतिम ईंधन की कीमत को प्रभावित करेगी।

केवल बाल ही नहीं, दूसरे कचरे से भी ईंधन बनाने पर काम

Techofest Global का काम सिर्फ इंसानों के बालों से इथेनॉल बनाने तक सीमित नहीं है। कंपनी के अनुसार, वह इस्तेमाल किए जा चुके खाना पकाने के तेल से इथेनॉल बनाने और फेंके गए सैनिटरी नैपकिन से प्राप्त सामग्री के जरिए बायोमीथेन उत्पादन की तकनीकों पर भी काम कर रही है।

इन प्रयोगों के पीछे मूल विचार कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलना है। इस तरह की व्यवस्था को व्यापक रूप से अपनाया जा सके, तो कुछ औद्योगिक और शहरी अपशिष्टों का बेहतर इस्तेमाल संभव हो सकता है।

कंपनी ने लगभग 100 लीटर क्षमता वाली पायलट सुविधा में अपनी कुछ तकनीकों का परीक्षण करने की जानकारी दी है। अब इन प्रक्रियाओं को व्यावसायिक स्तर तक ले जाने के लिए आगे के परीक्षण और विकास महत्वपूर्ण होंगे।

क्या बालों से बना इथेनॉल जल्द पेट्रोल में मिलाया जाएगा?

इस तकनीक को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भविष्य में बालों से बना इथेनॉल सीधे पेट्रोल में मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकेगा?

फिलहाल ऐसा निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। इसके लिए यह साबित करना होगा कि तैयार इथेनॉल निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरता है और इसे मौजूदा ईंधन आपूर्ति व्यवस्था में सुरक्षित तरीके से शामिल किया जा सकता है।

इसके अलावा, बड़े पैमाने पर बालों की उपलब्धता, उत्पादन लागत, ऊर्जा की खपत, प्रक्रिया की दक्षता और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का भी आकलन करना होगा।

कुल मिलाकर, गुजरात के स्टार्टअप का यह प्रयोग कचरे से उपयोगी ईंधन तैयार करने की दिशा में एक दिलचस्प पहल है। यदि तकनीक बड़े स्तर पर सफल और आर्थिक रूप से व्यावहारिक साबित होती है, तो यह भारत के बायोफ्यूल क्षेत्र में एक नया विकल्प बन सकती है। लेकिन फिलहाल इसे पेट्रोल का स्थापित विकल्प नहीं, बल्कि विकास और परीक्षण के दौर में चल रही तकनीक के रूप में देखना अधिक उचित होगा।

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