
यूपीआई भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू करने के मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। केंद्र सरकार की ओर से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू करने के फैसले को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। इसी बीच बीजेपी ने दावा किया कि संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति में शामिल कांग्रेस सांसदों ने MDR से जुड़े राजस्व मॉडल का समर्थन किया था। कांग्रेस ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि समिति के सामने ऐसा कोई प्रस्ताव ही नहीं रखा गया था, जिस पर सांसदों से सहमति या असहमति दर्ज कराने की बात हो।
बीजेपी ने क्या दावा किया?
बीजेपी की ओर से कहा गया कि वित्त संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने यूपीआई के आर्थिक मॉडल और MDR जैसे विकल्पों पर विचार किया था। रिपोर्ट में हाई-वैल्यू लेनदेन के लिए एक संतुलित और चरणबद्ध MDR व्यवस्था की जरूरत का उल्लेख होने का दावा किया गया है। बीजेपी का तर्क है कि समिति की चर्चा और रिपोर्ट के दौरान कांग्रेस के सदस्यों की ओर से कोई औपचारिक असहमति दर्ज नहीं की गई थी। इसी आधार पर पार्टी ने कांग्रेस पर संसद की समिति में अलग रुख और सार्वजनिक मंच पर अलग रुख अपनाने का आरोप लगाया।
रिपोर्टों के मुताबिक समिति में कांग्रेस के पांच सांसद मौजूद थे। इनमें पी. चिदंबरम, गौरव गोगोई और मनीष तिवारी समेत अन्य सदस्य शामिल बताए गए हैं। समिति से जुड़े घटनाक्रम को लेकर अब दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
कांग्रेस ने क्या कहा?
कांग्रेस ने बीजेपी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसके सांसदों ने मौजूदा MDR व्यवस्था का समर्थन नहीं किया था। पार्टी का कहना है कि समिति के सामने 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाने का कोई विशिष्ट प्रस्ताव विचार के लिए नहीं आया था। कांग्रेस सांसदों की ओर से यह भी कहा गया कि जिस रिपोर्ट या चर्चा का हवाला दिया जा रहा है, उसका मतलब मौजूदा सरकार के घोषित MDR फैसले का समर्थन मान लेना सही नहीं है।
कांग्रेस ने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि यूपीआई शुल्क को लेकर हो रही आलोचना से ध्यान हटाने के लिए संसदीय समिति की पुरानी चर्चा का हवाला दिया जा रहा है। पार्टी नेताओं ने कहा कि सरकार को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि नए MDR ढांचे का वास्तविक आर्थिक बोझ किस पर पड़ेगा।
क्या है नया MDR ढांचा?
नए ढांचे के तहत 2,000 रुपये से अधिक के कुछ व्यापारी भुगतान पर 0.4 प्रतिशत तक MDR लागू करने की व्यवस्था बताई गई है। सरकार का कहना है कि सामान्य ग्राहकों से यह शुल्क सीधे नहीं लिया जाएगा और छोटे मूल्य के यूपीआई भुगतान मुफ्त बने रहेंगे। सरकार के मुताबिक इस बदलाव का उद्देश्य यूपीआई के बुनियादी ढांचे को लंबे समय तक आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना और भुगतान व्यवस्था में अधिक भागीदारी को बढ़ावा देना है।

हालांकि, इस व्यवस्था को लेकर राजनीतिक विवाद अभी थमा नहीं है। एक तरफ बीजेपी संसदीय समिति की रिपोर्ट और उसमें दर्ज सिफारिशों को कांग्रेस के पुराने रुख से जोड़ रही है, वहीं कांग्रेस का कहना है कि समिति की चर्चा को मौजूदा MDR फैसले की मंजूरी के तौर पर पेश किया जा रहा है। अब बहस का केंद्र यही है कि संसदीय समिति की सिफारिशों और सरकार के मौजूदा MDR ढांचे के बीच वास्तविक संबंध क्या है।




