
भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव का असर दोनों देशों की जनता की सोच पर भी दिखाई देता है। एक अमेरिकी सर्वे में दोनों देशों के लोगों की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों को लेकर राय सामने आई है। सर्वे के मुताबिक, पाकिस्तान में करीब 10 में से 9 लोग भारत को अपने देश के लिए खतरा मानते हैं। वहीं, भारतीयों के लिए रूस महत्वपूर्ण साझेदारों में शामिल है, जबकि पाकिस्तानियों की पहली पसंद चीन बताई गई है।

भारत को खतरा मानने वाले पाकिस्तानियों की संख्या यह दिखाती है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास अभी भी काफी गहरा है। 1947 में विभाजन के बाद से भारत और पाकिस्तान के रिश्ते लगातार तनावपूर्ण रहे हैं। कश्मीर विवाद, सीमा तनाव, आतंकवाद और सैन्य टकराव जैसे मुद्दों ने दोनों देशों के संबंधों को प्रभावित किया है।
दोनों देश कई युद्ध और सैन्य संघर्ष झेल चुके हैं। समय-समय पर नियंत्रण रेखा पर तनाव बढ़ने और आतंकी घटनाओं के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध भी प्रभावित हुए हैं। ऐसे माहौल में पाकिस्तान की जनता के बीच भारत को सुरक्षा खतरे के तौर पर देखने की धारणा मजबूत बनी हुई है।
भारत के लिए रूस क्यों अहम?
सर्वे में भारत की विदेश नीति से जुड़ी तस्वीर भी महत्वपूर्ण है। रूस और भारत के बीच संबंध कई दशकों पुराने हैं। रक्षा क्षेत्र दोनों देशों की साझेदारी का सबसे मजबूत आधार रहा है। भारतीय सेना के पास लंबे समय से रूसी मूल के हथियार और सैन्य प्रणालियां मौजूद हैं।
इसके अलावा दोनों देश परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, ऊर्जा, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भी सहयोग करते हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों और रूस के बीच तनाव बढ़ने के बावजूद भारत ने मॉस्को के साथ अपने पारंपरिक संबंधों को बनाए रखा है।
हालांकि, भारत की विदेश नीति केवल रूस तक सीमित नहीं है। अमेरिका, फ्रांस, जापान, यूरोपीय देशों और अन्य साझेदारों के साथ भी भारत के रणनीतिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। भारत का जोर राष्ट्रीय हितों के आधार पर संतुलित और स्वतंत्र विदेश नीति पर रहा है।
पाकिस्तान की पहली पसंद चीन
पाकिस्तान में चीन को सबसे अहम साझेदारों में माना जाता है। दोनों देशों के बीच आर्थिक, सैन्य और रणनीतिक सहयोग काफी मजबूत है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा यानी सीपीईसी इस साझेदारी का प्रमुख उदाहरण है।
सीपीईसी के तहत पाकिस्तान में सड़क, ऊर्जा, परिवहन और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई परियोजनाएं विकसित की गई हैं। ग्वादर बंदरगाह भी चीन-पाकिस्तान सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग भी काफी गहरा है।
पाकिस्तान चीन से लड़ाकू विमान, हथियार और सैन्य तकनीक हासिल करता है। यही कारण है कि पाकिस्तान की विदेश नीति और सुरक्षा व्यवस्था में चीन की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है।
भारत-पाकिस्तान की अलग-अलग सोच
सर्वे के आंकड़े दोनों देशों की रणनीतिक सोच के बीच बड़ा अंतर दिखाते हैं। पाकिस्तान में भारत को सबसे बड़ा खतरा मानने की धारणा मजबूत है, जबकि चीन को वहां प्रमुख साझेदार के रूप में देखा जाता है। दूसरी ओर, भारत में रूस के साथ ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों को काफी महत्व दिया जाता है।
हालांकि बदलती वैश्विक राजनीति के बीच भारत और पाकिस्तान दोनों ही अपने-अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को नए तरीके से मजबूत करने में जुटे हैं। आने वाले समय में अमेरिका, रूस, चीन और अन्य बड़ी शक्तियों के साथ इन देशों के रिश्ते दक्षिण एशिया की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं।




