
इस्लामाबाद/स्वात: पाकिस्तान के अशांत खैबर पख्तूनख्वा प्रांत से एक बार फिर बड़े आतंकी हमले की खबर सामने आई है। रविवार को स्वात जिले के कबाल कस्बे में आयोजित एक शांति रैली के दौरान जोरदार धमाका हो गया। इस विस्फोट में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 15 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। धमाके के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और चारों ओर चीख-पुकार सुनाई देने लगी।

स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, यह विस्फोट स्वात अमन जिरगा (स्थानीय जनजातीय परिषद) की ओर से आयोजित शांति रैली के दौरान हुआ। रैली का उद्देश्य क्षेत्र में बढ़ती हिंसा और असुरक्षा के खिलाफ लोगों की आवाज उठाना तथा सरकार से स्थायी शांति बहाल करने की मांग करना था। हालांकि, कार्यक्रम के दौरान हुए इस धमाके ने पूरे इलाके को दहला दिया।
फिदायीन हमले की आशंका, जांच शुरू
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियां इस विस्फोट को संभावित फिदायीन (आत्मघाती) हमला मानकर जांच कर रही हैं। हालांकि, अधिकारियों ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। धमाके के तुरंत बाद पुलिस, बम निरोधक दस्ता और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र को घेर लिया तथा घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने का काम शुरू कर दिया।
अब तक किसी भी आतंकी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि धमाका आत्मघाती हमले से हुआ या पहले से लगाए गए विस्फोटक के कारण।
घायलों को अस्पतालों में कराया गया भर्ती
धमाके के तुरंत बाद रेस्क्यू 1122 और स्थानीय राहत टीमों ने मौके पर पहुंचकर घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया। अस्पताल प्रशासन ने कई घायलों की हालत गंभीर बताई है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। प्रशासन ने सभी अस्पतालों में आपातकालीन व्यवस्था लागू कर दी है।
स्वात में लगातार बिगड़ रही सुरक्षा स्थिति
स्वात घाटी, जिसे कभी पाकिस्तान का प्रमुख पर्यटन स्थल माना जाता था, पिछले कुछ महीनों से लगातार सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रही है। क्षेत्र में उग्रवादी गतिविधियों में बढ़ोतरी के कारण स्थानीय लोगों में भय का माहौल बना हुआ है। हाल के समय में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच कई बार मुठभेड़ भी हो चुकी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इलाके में सक्रिय उग्रवादी संगठन फिर से अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे आम नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
एक सप्ताह पहले भी हुआ था धमाका
गौरतलब है कि यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 26 जुलाई को भी खैबर पख्तूनख्वा के बाजौर जिले में ताली बांध के पास हुए एक विस्फोट में दो लोगों की मौत हो गई थी। पुलिस के अनुसार, मृतकों की पहचान गुलाम और सुलेमान कारी के रूप में हुई थी। लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने पूरे प्रांत की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्यों अशांत है खैबर पख्तूनख्वा?
खैबर पख्तूनख्वा पाकिस्तान का वह सीमावर्ती प्रांत है, जिसकी सीमा अफगानिस्तान से लगती है। यह इलाका लंबे समय से आतंकवाद, उग्रवादी संगठनों की गतिविधियों और सीमा पार घुसपैठ जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच स्थित डूरंड लाइन को लेकर भी लंबे समय से विवाद बना हुआ है। सीमा के दोनों ओर रहने वाले कई जनजातीय समुदाय इस सीमा को स्वीकार नहीं करते, जिसके कारण सुरक्षा बलों और उग्रवादी समूहों के बीच अक्सर संघर्ष देखने को मिलता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अफगानिस्तान में बदलते हालात और सीमा पार आतंकियों की आवाजाही ने खैबर पख्तूनख्वा की सुरक्षा स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। ऐसे में शांति बहाली की मांग को लेकर आयोजित रैली में हुआ यह धमाका एक बार फिर पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।




